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लोनी का असलम टीचर नहीं था, परिजनों को धोखे में रखा
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खतौली (मुजफ्फरनगर)। खतौली गंगनहर कांवड़ मार्ग पर मृत पाए गए गाजियाबाद के लोनी निवासी असलम के मामले में कई चौंकाने वाले सच सामने आए है। पुलिस की जांच में पता चला कि वह सरकारी टीचर नहीं था, उसने परिजनों को भी धोखे में रखा। गाजियाबाद में डीआईओएस कार्यालय से इसकी पुष्टि हुई है। असलम की न तो हत्या हुई और न ही उससे दो लाख रुपये लूटे गए। दरअसल, वह खतौली पहुंचकर लूटपाट का नाटक रचना चाहता था। इसी नाटकबाजी के चक्कर में वह सड़क हादसे में अपनी जान गंवा बैठा। इस चौंका देने वाले खुलासे को सुनकर परिजन व रिश्तेदार भी हैरान रह गए।
गाजियाबाद के थाना लोनी क्षेत्र के मीनाक्षी एनक्लेव अशोक बिहार निवासी टीचर असलम (25) पुत्र नसीम का शव 30 अप्रैल की रात को खतौली गंगनहर कांवड़ मार्ग पटरी पर पड़ा मिला था। परिजनों ने दो लाख लूटने के बाद हत्या की आशंका जताई थी। पुलिस ने मामले की जांच में जुटी तो कई चौंकाने वाले सच सामने आए। इंस्पेक्टर हरसरन शर्मा के मुताबिक असलम गाजियाबाद के किसी भी सरकारी स्कूल का टीचर नहीं निकला। साथ ही वह 30 अप्रैल की सुबह घर से दो लाख रुपये लेकर भी नहीं चला था। उसने परिजनों को धोखा देने और पुलिस को गुमराह करने के लिए लूटपाट की योजना बनाई। उनका मानना है कि असलम खतौली पहुंचा। लूटपाट का नाटक रचने के लिए उसने पहले गंगनहर में गोता लगाया। कपड़ों को गीला करने के बाद रात में सड़क पर लेट गया, ताकि राहगीरों को लगे कि उसके साथ कोई घटना घटी है। इस नाटकबाजी के टक्कर में कोई वाहन उसे कुचल कर चला गया। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। असलम की धोखाबाजी की कहानी पर परिजन व रिश्तेदार भी हैरान रह गए हैं।
पिता से भी छह लाख रुपये ठगे
पुलिस को परिजनों और रिश्तेदारों से पूछताछ करने पर पता चला कि असलम ने अपने पिता नसीम से भी सरकारी टीचर की नौकरी लगवाने नाम पर लाखों रुपये ठगे। इसके अलावा उसने परिजनों को छह माह पूर्व बताया था कि उसकी टीचर की नौकरी लग गई। छह महीने की तनख्वाह आने पर उधार लौटाने की बात कहकर वह पिता से रुपये ठगता रहा। इस तरह असलम ने पिता से करीब छह लाख रुपये ठग लिए।
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बीएड बताकर निकाह भी करवा लिया
पुलिस ने ससुराल वालों से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि असलम ने बताया था कि उसने बीएड किया है। असलम ने अपने परिजनों को भी यही बता रखा था कि उसने बीएड कर ली है। असलम ने परिजनों तक भी यह अहसास नहीं होने दिया कि वह बीएड डिग्री धारक नहीं है। 2017 में असलम का निकाह हो गया था। पत्नी तक को भी धोखा देता रहा। असलम छह माह से सुबह स्कूल के टाइम पर निकलता था, ताकि परिजनों को लगे कि वह पढ़ाने जा रहा है। स्कूल की छुट्टी के समय ही वह घर लौट आता था। परिजनों और पत्नी को यह लगता था कि असलम स्कूल में बच्चों को शिक्षा देकर आ रहा है।
शिक्षा विभाग के कर्मचारी भी चौंक उठे
परिजनों और ससुराल वालों को पुलिस से पता चला कि असलम टीचर नहीं था तो उनको यकीन नहीं हुआ। वे गाजियाबाद में डीआईओएस कार्यालय पहुंचे। जिला गाजियाबाद के सभी स्कूलों में तैनात अध्यापकों के नामों की सूची का रिकार्ड निकलवाया गया। रिकार्ड में असलम नाम का कोई भी टीचर नहीं निकला। इसे लेकर शिक्षा विभाग के कर्मचारी भी चौंक उठे। इसके बाद परिजनों और रिश्तेदारों को पक्का यकीन हुआ कि असलम टीचर नहीं था।
एजेंसी वाले को दो लाख रुपये का चेक दिया था
पुलिस के मुताबिक अप्रैल में ही असलम ने पिता को किसान मोटर्स एजेंसी से लोन पर ट्रैक्टर खरीदवाया था। 91 हजार रुपये पिता ने कैश जमा कराए थे जबकि दो लाख रुपये का चेक दिया गया था। पुलिस ने एजेंसी पर जांच पड़ताल की तो वहां से पता चला कि असलम ने किसी दूसरे के नाम का दो लाख रुपये का चेक दिया था, जो बाउंस हो गया था। फिर असलम ने एजेंसी वालों से कहा कि वह अपने खोते से दो लाख रुपये निकाल कर दे देगा। पता चला कि उसके बैंक खाते में मात्र आठ रुपये ही है। खाते में काफी दिनों से पैसों का लेनदेन नहीं होने से वह भी बंद हो गया। पुलिस का मानना है कि इन्हीं दो लाख रुपये के कर्ज को गोलमाल करने के लिए ही असलम लूटपाट का नाटक रचना चाहता था।
पुलिस की जांच में पता चला कि असलम सरकारी टीचर नहीं था। उसके पास कोई रुपये भी नहीं थे, वह तो एजेंसी वालों और अपने परिजनों को धोखा देने और पुलिस को गुमराह करने को लूटपाट का नाटक रचना चाहता था। इसी चक्कर में कोई वाहन उसे कुचलकर निकल गया, जिससे उसकी मौत हुई है। - हरसरन शर्मा, इंस्पेक्टर, खतौली।
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गाजियाबाद के थाना लोनी क्षेत्र के मीनाक्षी एनक्लेव अशोक बिहार निवासी टीचर असलम (25) पुत्र नसीम का शव 30 अप्रैल की रात को खतौली गंगनहर कांवड़ मार्ग पटरी पर पड़ा मिला था। परिजनों ने दो लाख लूटने के बाद हत्या की आशंका जताई थी। पुलिस ने मामले की जांच में जुटी तो कई चौंकाने वाले सच सामने आए। इंस्पेक्टर हरसरन शर्मा के मुताबिक असलम गाजियाबाद के किसी भी सरकारी स्कूल का टीचर नहीं निकला। साथ ही वह 30 अप्रैल की सुबह घर से दो लाख रुपये लेकर भी नहीं चला था। उसने परिजनों को धोखा देने और पुलिस को गुमराह करने के लिए लूटपाट की योजना बनाई। उनका मानना है कि असलम खतौली पहुंचा। लूटपाट का नाटक रचने के लिए उसने पहले गंगनहर में गोता लगाया। कपड़ों को गीला करने के बाद रात में सड़क पर लेट गया, ताकि राहगीरों को लगे कि उसके साथ कोई घटना घटी है। इस नाटकबाजी के टक्कर में कोई वाहन उसे कुचल कर चला गया। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। असलम की धोखाबाजी की कहानी पर परिजन व रिश्तेदार भी हैरान रह गए हैं।
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पिता से भी छह लाख रुपये ठगे
पुलिस को परिजनों और रिश्तेदारों से पूछताछ करने पर पता चला कि असलम ने अपने पिता नसीम से भी सरकारी टीचर की नौकरी लगवाने नाम पर लाखों रुपये ठगे। इसके अलावा उसने परिजनों को छह माह पूर्व बताया था कि उसकी टीचर की नौकरी लग गई। छह महीने की तनख्वाह आने पर उधार लौटाने की बात कहकर वह पिता से रुपये ठगता रहा। इस तरह असलम ने पिता से करीब छह लाख रुपये ठग लिए।
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बीएड बताकर निकाह भी करवा लिया
पुलिस ने ससुराल वालों से जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि असलम ने बताया था कि उसने बीएड किया है। असलम ने अपने परिजनों को भी यही बता रखा था कि उसने बीएड कर ली है। असलम ने परिजनों तक भी यह अहसास नहीं होने दिया कि वह बीएड डिग्री धारक नहीं है। 2017 में असलम का निकाह हो गया था। पत्नी तक को भी धोखा देता रहा। असलम छह माह से सुबह स्कूल के टाइम पर निकलता था, ताकि परिजनों को लगे कि वह पढ़ाने जा रहा है। स्कूल की छुट्टी के समय ही वह घर लौट आता था। परिजनों और पत्नी को यह लगता था कि असलम स्कूल में बच्चों को शिक्षा देकर आ रहा है।
शिक्षा विभाग के कर्मचारी भी चौंक उठे
परिजनों और ससुराल वालों को पुलिस से पता चला कि असलम टीचर नहीं था तो उनको यकीन नहीं हुआ। वे गाजियाबाद में डीआईओएस कार्यालय पहुंचे। जिला गाजियाबाद के सभी स्कूलों में तैनात अध्यापकों के नामों की सूची का रिकार्ड निकलवाया गया। रिकार्ड में असलम नाम का कोई भी टीचर नहीं निकला। इसे लेकर शिक्षा विभाग के कर्मचारी भी चौंक उठे। इसके बाद परिजनों और रिश्तेदारों को पक्का यकीन हुआ कि असलम टीचर नहीं था।
एजेंसी वाले को दो लाख रुपये का चेक दिया था
पुलिस के मुताबिक अप्रैल में ही असलम ने पिता को किसान मोटर्स एजेंसी से लोन पर ट्रैक्टर खरीदवाया था। 91 हजार रुपये पिता ने कैश जमा कराए थे जबकि दो लाख रुपये का चेक दिया गया था। पुलिस ने एजेंसी पर जांच पड़ताल की तो वहां से पता चला कि असलम ने किसी दूसरे के नाम का दो लाख रुपये का चेक दिया था, जो बाउंस हो गया था। फिर असलम ने एजेंसी वालों से कहा कि वह अपने खोते से दो लाख रुपये निकाल कर दे देगा। पता चला कि उसके बैंक खाते में मात्र आठ रुपये ही है। खाते में काफी दिनों से पैसों का लेनदेन नहीं होने से वह भी बंद हो गया। पुलिस का मानना है कि इन्हीं दो लाख रुपये के कर्ज को गोलमाल करने के लिए ही असलम लूटपाट का नाटक रचना चाहता था।
पुलिस की जांच में पता चला कि असलम सरकारी टीचर नहीं था। उसके पास कोई रुपये भी नहीं थे, वह तो एजेंसी वालों और अपने परिजनों को धोखा देने और पुलिस को गुमराह करने को लूटपाट का नाटक रचना चाहता था। इसी चक्कर में कोई वाहन उसे कुचलकर निकल गया, जिससे उसकी मौत हुई है। - हरसरन शर्मा, इंस्पेक्टर, खतौली।