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भाजपा नेता शोभाराम आर्य के हत्यारोपी बरी
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भाजपा नेता शोभाराम आर्य के हत्यारोपी बरी
मुजफ्फरनगर। दो वर्ष पहले मीरापुर थाना क्षेत्र के गांव नंगला खेपड़ में हुई भाजपा नेता शोभाराम आर्य की हत्या के मामले में अदालत ने महिला समेत तीन आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण बरी कर दिया। इस मामले में मृतक का पुत्र और मुकदमे का वादी एवं अन्य गवाह कोर्ट में गवाही के दौरान पक्ष द्रोही हो गए।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता शशिकांत शर्मा ने बताया कि मीरापुर थाना क्षेत्र के गांव नंगला खेपड़ में 26 जनवरी 2017 को शोभाराम आर्य की स्कूल से गणतंत्र दिवस के समारोह से लौटते हुए हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृत शोभाराम आर्य के पुत्र सत्यवीर उर्फ श्यामवीर ने योगेंद्र उसकी मां सरोज देवी निवासी नंगला खेपड़, सोनू नागर, देवेंद्र नागर उर्फ संजू पुत्रगण धर्म सिंह निवासी अलीपुर मोरना थाना हस्तिनापुर और अज्ञात के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस ने देवेंद्र नागर उर्फ संजू, योगेंद्र व सरोज को गिरफ्तार किया था। इस मुकदमे की सुनवाई प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश गौरव कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट में हुई। कोर्ट में गवाहों के पक्षद्रोही होने के कारण अभियोजन द्वारा पर्याप्त साक्ष्य अभियुक्तों के खिलाफ अभियोजन नहीं दे पाया, जिस कारण कोर्ट ने तीनों अभियुक्तों देवेंद्र नागर उर्फ संजू, योगेंद्र व सरोज को बरी कर दिया। इस मामले में कोर्ट ने अपने जजमेंट में वादी सत्यवीर उर्फ श्यामवीर द्वारा नामजद रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के बावजूद कोर्ट में उपस्थित होकर अभियोजन कथानक के प्रतिकूल कथन करने पर उसे जानबूझकर कोर्ट में मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने के मामले में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 344 में वाद दर्ज कर उसकी सुनवाई करने के आदेश भी दिए हैं। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता शशीकांत शर्मा और चंद्रवीर सिंह ने पैरवी की।
सोनू और मोनू की फाइल अलग
मुजफ्फरनगर। अधिवक्ता शशीकांत शर्मा ने बताया कि शोभाराम हत्याकांड में पुलिस ने सोनू नागर और उसके भाई मोनू नागर के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की थी। जो बाद में कोर्ट में पेश हुए, जिस कारण दोनों की फाइल अलग हो गई थी। दोनों पर मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन है। वर्तमान में सोनू नागर मेरठ जेल में और मोनू नागर आगरा सेंट्रल जेल में बंद है।
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मुजफ्फरनगर। दो वर्ष पहले मीरापुर थाना क्षेत्र के गांव नंगला खेपड़ में हुई भाजपा नेता शोभाराम आर्य की हत्या के मामले में अदालत ने महिला समेत तीन आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण बरी कर दिया। इस मामले में मृतक का पुत्र और मुकदमे का वादी एवं अन्य गवाह कोर्ट में गवाही के दौरान पक्ष द्रोही हो गए।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता शशिकांत शर्मा ने बताया कि मीरापुर थाना क्षेत्र के गांव नंगला खेपड़ में 26 जनवरी 2017 को शोभाराम आर्य की स्कूल से गणतंत्र दिवस के समारोह से लौटते हुए हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृत शोभाराम आर्य के पुत्र सत्यवीर उर्फ श्यामवीर ने योगेंद्र उसकी मां सरोज देवी निवासी नंगला खेपड़, सोनू नागर, देवेंद्र नागर उर्फ संजू पुत्रगण धर्म सिंह निवासी अलीपुर मोरना थाना हस्तिनापुर और अज्ञात के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस ने देवेंद्र नागर उर्फ संजू, योगेंद्र व सरोज को गिरफ्तार किया था। इस मुकदमे की सुनवाई प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश गौरव कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट में हुई। कोर्ट में गवाहों के पक्षद्रोही होने के कारण अभियोजन द्वारा पर्याप्त साक्ष्य अभियुक्तों के खिलाफ अभियोजन नहीं दे पाया, जिस कारण कोर्ट ने तीनों अभियुक्तों देवेंद्र नागर उर्फ संजू, योगेंद्र व सरोज को बरी कर दिया। इस मामले में कोर्ट ने अपने जजमेंट में वादी सत्यवीर उर्फ श्यामवीर द्वारा नामजद रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के बावजूद कोर्ट में उपस्थित होकर अभियोजन कथानक के प्रतिकूल कथन करने पर उसे जानबूझकर कोर्ट में मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने के मामले में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 344 में वाद दर्ज कर उसकी सुनवाई करने के आदेश भी दिए हैं। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता शशीकांत शर्मा और चंद्रवीर सिंह ने पैरवी की।
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सोनू और मोनू की फाइल अलग
मुजफ्फरनगर। अधिवक्ता शशीकांत शर्मा ने बताया कि शोभाराम हत्याकांड में पुलिस ने सोनू नागर और उसके भाई मोनू नागर के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल की थी। जो बाद में कोर्ट में पेश हुए, जिस कारण दोनों की फाइल अलग हो गई थी। दोनों पर मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन है। वर्तमान में सोनू नागर मेरठ जेल में और मोनू नागर आगरा सेंट्रल जेल में बंद है।
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