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हत्या के प्रयास में दो भाइयों को सजा
Updated Mon, 27 Nov 2017 11:26 PM IST
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हत्या के प्रयास में दो भाइयों को सजा
मुजफ्फरनगर। अदालत ने हत्या के प्रयास के मामले में दो भाइयों को दस-दस वर्ष के कारावास और 13-13 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। शामली जिले के बाबरी थाना क्षेत्र के गांव बंतीखेड़ा में जमीन रंजिश के चलते युवक को गोली मारने की घटना में 25 वर्ष बाद कोर्ट का फैसला आया है।
बाबरी थाना क्षेत्र के गांव बंतीखेड़ा निवासी सतेंद्र को 8 जनवरी 1993 में कुटुंब के ही विवेकानंद और नरेश पुत्रगण धर्मपाल ने जमीन रंजिश के चलते गोली मारकर घायल कर दिया था। घायल का 38 दिनों तक दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उपचार चला था, तब वह ठीक हो सका। इस संबंध में घायल सतेंद्र के भाई यतेंद्र ने बाबरी थाने में विवेकानंद और नरेश के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कराया था, तब से लेकर यह मुकदमा अदालत में लंबित चल रहा था। 25 वर्ष बाद एडीजे-15 राजेश भारद्वाज की अदालत में इस मुकदमे की सुनवाई हुई। एडीजीसी योगेश कुमार शर्मा ने न्यायालय में छह गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए सोमवार को अदालत का निर्णय सुनाया। न्यायाधीश ने विवेकानंद और नरेश को दोषी करार देेते हुए धारा 307 में दस-दस वर्ष के कारावास और दस-दस हजार रुपया जुर्माना, धारा 504 में एक-एक वर्ष का कारावास और एक-एक हजार रुपया जुर्माना, धारा 506 में दो-दो वर्ष का कारावास और दो-दो हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनाई है। सजा सुनाने के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया।
25 हजार रुपये
पीड़ित को मिलेंगे
मुजफ्फरनगर। एडीजे-15 राजेश भारद्वाज ने अपने निर्णय में जुर्माने की धनराशि 26 हजार रुपये में से 25 हजार रुपये घायल सतेंद्र को देने के आदेश दिए हैं।
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मुजफ्फरनगर। अदालत ने हत्या के प्रयास के मामले में दो भाइयों को दस-दस वर्ष के कारावास और 13-13 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। शामली जिले के बाबरी थाना क्षेत्र के गांव बंतीखेड़ा में जमीन रंजिश के चलते युवक को गोली मारने की घटना में 25 वर्ष बाद कोर्ट का फैसला आया है।
बाबरी थाना क्षेत्र के गांव बंतीखेड़ा निवासी सतेंद्र को 8 जनवरी 1993 में कुटुंब के ही विवेकानंद और नरेश पुत्रगण धर्मपाल ने जमीन रंजिश के चलते गोली मारकर घायल कर दिया था। घायल का 38 दिनों तक दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उपचार चला था, तब वह ठीक हो सका। इस संबंध में घायल सतेंद्र के भाई यतेंद्र ने बाबरी थाने में विवेकानंद और नरेश के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कराया था, तब से लेकर यह मुकदमा अदालत में लंबित चल रहा था। 25 वर्ष बाद एडीजे-15 राजेश भारद्वाज की अदालत में इस मुकदमे की सुनवाई हुई। एडीजीसी योगेश कुमार शर्मा ने न्यायालय में छह गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए सोमवार को अदालत का निर्णय सुनाया। न्यायाधीश ने विवेकानंद और नरेश को दोषी करार देेते हुए धारा 307 में दस-दस वर्ष के कारावास और दस-दस हजार रुपया जुर्माना, धारा 504 में एक-एक वर्ष का कारावास और एक-एक हजार रुपया जुर्माना, धारा 506 में दो-दो वर्ष का कारावास और दो-दो हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनाई है। सजा सुनाने के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया।
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25 हजार रुपये
पीड़ित को मिलेंगे
मुजफ्फरनगर। एडीजे-15 राजेश भारद्वाज ने अपने निर्णय में जुर्माने की धनराशि 26 हजार रुपये में से 25 हजार रुपये घायल सतेंद्र को देने के आदेश दिए हैं।