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श्मशान घाटों में एक दिन में 52 लोगों का अंतिम संस्कार
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श्मशान घाटों में एक दिन में 52 लोगों का अंतिम संस्कार
मुजफ्फरनगर। शहर में सोमवार को कोरोना से मरने वाले 20 लोगों का अंतिम संस्कार हुआ। जिले के गांवों, कस्बों की संख्या इससे अलग है। कब्रिस्तानों का डाटा भी इसमें शामिल नहीं है। केवल श्मशान घाटों में एक ही दिन में 52 लोगों की अंतिम क्रिया हुई।
नई मंडी श्मशान घाट समिति के अध्यक्ष संजय मित्तल ने बताया कि उन्होंने जीवन में कभी ऐसी महामारी नहीं देखी। सोमवार को नई मंडी में 21 लोगों का अंतिम संस्कार हुआ। जगह नहीं होने के कारण 11 के शव नीचे ही लगाने पड़े। तीन शव वापस करने पड़े। 21 शवों में नौ शव कोरोना बीमारी से मरने वालों के रहे।
नदी घाट श्मशान की देखरेख करने वाले परोपकारी समिति के अध्यक्ष अजय अग्रवाल ने बताया कि उनके यहां एक दिन में 20 शवों का अंतिम संस्कार हुआ, इनमें नौ कोरोना से मरने वालों के हैं। श्मशान घाट में अब नीचे भी जगह नहीं बची है। शहर के जनकपुरी स्थित श्मशान घाट की समिति के अध्यक्ष बिजेंद्र पाल ने बताया कि उनके यहां सोमवार को 11 शवों का अंतिम संस्कार हुआ, जिनमें दो कोरोना से मृतक है। शहर में एक दिन में कभी भी 52 शवों का अंतिम संस्कार एक साथ नहीं हुआ। इनमें 20 लोगों की मौत तो कोरोना से हुई। इस संख्या में कस्बों और गांवों में कोरोना से मरने वाले शामिल नहीं हैं। कब्रिस्तानों में जो शव सुपुर्दे खाक हुए, वह भी शामिल नहीं हैं। अचानक मौतों का आंकड़ा बढ़ जाने से सभी श्मशान घाटों पर लकड़ियों को स्टॉक खत्म हो गया है। लकड़ी की व्यवस्था के उपाय शुरू कर दिए गए हैं।
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मुजफ्फरनगर। शहर में सोमवार को कोरोना से मरने वाले 20 लोगों का अंतिम संस्कार हुआ। जिले के गांवों, कस्बों की संख्या इससे अलग है। कब्रिस्तानों का डाटा भी इसमें शामिल नहीं है। केवल श्मशान घाटों में एक ही दिन में 52 लोगों की अंतिम क्रिया हुई।
नई मंडी श्मशान घाट समिति के अध्यक्ष संजय मित्तल ने बताया कि उन्होंने जीवन में कभी ऐसी महामारी नहीं देखी। सोमवार को नई मंडी में 21 लोगों का अंतिम संस्कार हुआ। जगह नहीं होने के कारण 11 के शव नीचे ही लगाने पड़े। तीन शव वापस करने पड़े। 21 शवों में नौ शव कोरोना बीमारी से मरने वालों के रहे।
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नदी घाट श्मशान की देखरेख करने वाले परोपकारी समिति के अध्यक्ष अजय अग्रवाल ने बताया कि उनके यहां एक दिन में 20 शवों का अंतिम संस्कार हुआ, इनमें नौ कोरोना से मरने वालों के हैं। श्मशान घाट में अब नीचे भी जगह नहीं बची है। शहर के जनकपुरी स्थित श्मशान घाट की समिति के अध्यक्ष बिजेंद्र पाल ने बताया कि उनके यहां सोमवार को 11 शवों का अंतिम संस्कार हुआ, जिनमें दो कोरोना से मृतक है। शहर में एक दिन में कभी भी 52 शवों का अंतिम संस्कार एक साथ नहीं हुआ। इनमें 20 लोगों की मौत तो कोरोना से हुई। इस संख्या में कस्बों और गांवों में कोरोना से मरने वाले शामिल नहीं हैं। कब्रिस्तानों में जो शव सुपुर्दे खाक हुए, वह भी शामिल नहीं हैं। अचानक मौतों का आंकड़ा बढ़ जाने से सभी श्मशान घाटों पर लकड़ियों को स्टॉक खत्म हो गया है। लकड़ी की व्यवस्था के उपाय शुरू कर दिए गए हैं।
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