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बजट के अभाव में भर पेट चारे को तरस रहे गोवंश
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बुढ़ाना में फतेहपुर खेड़ी गांव की गोशाला में गेट पर नही लगी तिरपाल।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
बजट के अभाव में भरपेट चारे को तरस रहे गोवंश
चरथावल। गोशालाओं में बजट की कमी के चलते गोवंशों की अनदेखी की जा रही है। गोवंशों को खाने के लिए सूखा भूसा दिया जा रहा है। चरथावल सहित कई गांवों में तीन गोशालाओं की हालत दयनीय है। भरपेट चारा नहीं मिलने से पशु असमय दम तोड़ जाते हैं। क्षेत्र में 198 गोवंशों को भरपेट चारा नहीं मिल रहा।
कसौली गांव में गोशाला में सुविधाओं का अभाव है। फिलहाल 65 गोवंश हैं। ग्रामीण मुकेश कुमार कहते हैं कि गोवंश के लिए गोशाला में कोई सुविधा नहीं है। भरपेट भोजन के अभाव में पशु दम तोड़ देते हैं। किसान अशोक कुमार कहते हैं कि पशुओं को शासन से मिलने वाला बजट नाकाफी है। युवक शेखर का कहना है बारिश में पशु बाहर बंधे है। ठंड से बचाव को कुछ पशुओं को बोरी का कवर दिए गए हैं। उनके फटने के बाद बचाव की कोई व्यवस्था नहीं है। मास्टर मामचंद पुंडीर बताते हैं कि पशुओं की भूख भूसे पर टिकी है। वहीं, बधाई कलां में करोड़ों रुपये से बनी वृहद गोशाला की तस्वीर भी जुदा नहीं है। यहां 85 पशु हैं। पिंकी मलिक बताते हैं यहां कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलता। गोवंश की दुर्गति आम है। चरथावल नगर पंचायत गोशाला में 50 पशु हैं। बजट के अभाव में गोवंश पशुओं को दिक्कत है। इस संबंध में एडीओ पंचायत राजेंद्र कुमार का कहना है कि भूसे के अलावा हरे चारे का भी समय से प्रबंध कराते हैं। ठंड से बचने के लिए बोरी के कवर दिए गए हैं। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अमरदीप सिंह ने बताया यह मौसम बीमारी से बचाव का सबसे अच्छा माना जाता है। गोशालाओं में सभी का टीकाकरण करा दिया था। आहार की व्यवस्था शासन द्वारा दी जा रही राशि से विकास खंड स्तर से की जा रही है।
खेड़ी में ठंड से पशुओं को बचाने के नहीं किए गए उपाय
बुढ़ाना। फतेहपुर खेड़ी गांव की गोशाला की व्यवस्था चिंताजनक है। गोशाला में मौजूद गोवंश को ठंड से बचाने के उचित उपाय नहीं किए गए है। गोशाला में एक गाय बीमार है। बीमार गाय को ठंड से बचाने के लिए भी उचित संसाधन नहीं है। गोशाला में 20 गोवंश रखे जाने की व्यवस्था है। वर्तमान में गोशाला में नौ गोवंश हैं।
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मीरापुर में सड़कों पर घूम रहे गोवंश
मीरापुर। कस्बे में पशु चिकित्सालय के बराबर में बन रही गोशाला का निर्माण कई माह बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है। इस कारण कई गोवंश कड़ाके की सर्दी में भी बेसहारा हालत में इधर-उधर घूम रहे हैं। नगर पंचायत द्वारा पानी की टंकी के पास करीब 40 गोवंशों को ही ठिकाना मिला हुआ है। किंतु बेसहारा घूम रहे गोवंशों पर उनकी नजर नहीं पड़ रही है। चेयरमैन तंजीला कुरैशी का कहना है कि ईओ का पद खाली चलने के कारण इस कार्य में देरी हुई है।
भोपा में हरा चारा नहीं मिल रहा
भोपा। कस्बा स्थित गोशाला की अव्यवस्था गोवंश पर भारी पड़ रही है। यहां पशुओं के चारा काटने की मशीन खराब पड़ी है। साथ ही विद्युत कनेक्शन नहीं होने से विद्युत व्यवस्था भी नहीं है। पानी के लिए भी पानी का हौज हाथों से नल चलाकर भरना पड़ता है। यहां पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे भी खराब पड़े हैं। व्यवस्था में लगे कर्मचारी ने बताया कि गोवंश को भूसा खिलाया जा रहा है। इस समय 15 गोवंश गोशाला में मौजूद है।
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चरथावल। गोशालाओं में बजट की कमी के चलते गोवंशों की अनदेखी की जा रही है। गोवंशों को खाने के लिए सूखा भूसा दिया जा रहा है। चरथावल सहित कई गांवों में तीन गोशालाओं की हालत दयनीय है। भरपेट चारा नहीं मिलने से पशु असमय दम तोड़ जाते हैं। क्षेत्र में 198 गोवंशों को भरपेट चारा नहीं मिल रहा।
कसौली गांव में गोशाला में सुविधाओं का अभाव है। फिलहाल 65 गोवंश हैं। ग्रामीण मुकेश कुमार कहते हैं कि गोवंश के लिए गोशाला में कोई सुविधा नहीं है। भरपेट भोजन के अभाव में पशु दम तोड़ देते हैं। किसान अशोक कुमार कहते हैं कि पशुओं को शासन से मिलने वाला बजट नाकाफी है। युवक शेखर का कहना है बारिश में पशु बाहर बंधे है। ठंड से बचाव को कुछ पशुओं को बोरी का कवर दिए गए हैं। उनके फटने के बाद बचाव की कोई व्यवस्था नहीं है। मास्टर मामचंद पुंडीर बताते हैं कि पशुओं की भूख भूसे पर टिकी है। वहीं, बधाई कलां में करोड़ों रुपये से बनी वृहद गोशाला की तस्वीर भी जुदा नहीं है। यहां 85 पशु हैं। पिंकी मलिक बताते हैं यहां कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलता। गोवंश की दुर्गति आम है। चरथावल नगर पंचायत गोशाला में 50 पशु हैं। बजट के अभाव में गोवंश पशुओं को दिक्कत है। इस संबंध में एडीओ पंचायत राजेंद्र कुमार का कहना है कि भूसे के अलावा हरे चारे का भी समय से प्रबंध कराते हैं। ठंड से बचने के लिए बोरी के कवर दिए गए हैं। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अमरदीप सिंह ने बताया यह मौसम बीमारी से बचाव का सबसे अच्छा माना जाता है। गोशालाओं में सभी का टीकाकरण करा दिया था। आहार की व्यवस्था शासन द्वारा दी जा रही राशि से विकास खंड स्तर से की जा रही है।
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खेड़ी में ठंड से पशुओं को बचाने के नहीं किए गए उपाय
बुढ़ाना। फतेहपुर खेड़ी गांव की गोशाला की व्यवस्था चिंताजनक है। गोशाला में मौजूद गोवंश को ठंड से बचाने के उचित उपाय नहीं किए गए है। गोशाला में एक गाय बीमार है। बीमार गाय को ठंड से बचाने के लिए भी उचित संसाधन नहीं है। गोशाला में 20 गोवंश रखे जाने की व्यवस्था है। वर्तमान में गोशाला में नौ गोवंश हैं।
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मीरापुर में सड़कों पर घूम रहे गोवंश
मीरापुर। कस्बे में पशु चिकित्सालय के बराबर में बन रही गोशाला का निर्माण कई माह बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है। इस कारण कई गोवंश कड़ाके की सर्दी में भी बेसहारा हालत में इधर-उधर घूम रहे हैं। नगर पंचायत द्वारा पानी की टंकी के पास करीब 40 गोवंशों को ही ठिकाना मिला हुआ है। किंतु बेसहारा घूम रहे गोवंशों पर उनकी नजर नहीं पड़ रही है। चेयरमैन तंजीला कुरैशी का कहना है कि ईओ का पद खाली चलने के कारण इस कार्य में देरी हुई है।
भोपा में हरा चारा नहीं मिल रहा
भोपा। कस्बा स्थित गोशाला की अव्यवस्था गोवंश पर भारी पड़ रही है। यहां पशुओं के चारा काटने की मशीन खराब पड़ी है। साथ ही विद्युत कनेक्शन नहीं होने से विद्युत व्यवस्था भी नहीं है। पानी के लिए भी पानी का हौज हाथों से नल चलाकर भरना पड़ता है। यहां पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे भी खराब पड़े हैं। व्यवस्था में लगे कर्मचारी ने बताया कि गोवंश को भूसा खिलाया जा रहा है। इस समय 15 गोवंश गोशाला में मौजूद है।