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अदालत करेगी गोयला गांव के इतिहास का इंसाफ

Sat, 02 Jul 2022 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jul 2022 12:15 AM IST
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Court will do justice to the history of Goyla village
पुस्तक भारतीय क्षत्रिय जाट इतिहास का कवर पेज - फोटो : MUZAFFARNAGAR
अदालत करेगी गोयला गांव के इतिहास का इंसाफ
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- पुस्तक ‘भारतीय क्षत्रिय जाट इतिहास’ पर दर्ज परिवाद में छह जुलाई की तिथि तय
- सिविल जज जूनियर डिवीजन कोर्ट संख्या पांच में प्रकरण विचाराधीन
- गठवाला खाप के इतिहास को गलत दर्शाए जाने का मामला
मदन बालियान
मुजफ्फरनगर। गठवाला और बालियान खाप की मिली जुली आबादी के गांव गोयला के इतिहास का फैसला अब अदालत करेगी। भारतीय क्षत्रिय जाट इतिहास पुस्तक में गठवाला खाप के गोयला गांव से जुड़े इतिहास पर दायर परिवाद पर सिविल जज जूनियर डिवीजन कोर्ट संख्या पांच में सुनवाई के लिए छह जुलाई की तिथि नियत है।
गोयला गांव के महेश मलिक ने 19 नवंबर 2019 को आईपीसी की धारा 500 के अंतर्गत परिवाद दायर कराया था। वादी का कहना था कि काकड़ा गांव के वीरेंद्र बालियान ने ‘भारतीय क्षत्रिय जाट इतिहास’ पुस्तक में गोयला गांव का इतिहास गलत तरीके से लिखा है। इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को हानि पहुंची है। किताब में लिखा गया है कि 1477 ईसवी में बाबा गोयलनाथ के नाम पर गांव बसाकर नाम गोयला रखा गया। परिवादी ने दावा किया है कि उनके पूर्वज गठवाला खाप के लल गौत्र के नरपाल ने 985 ईसवी में गोयला गांव बसाया था। सिविल जज जूनियर डिवीजन कोर्ट संख्या पांच में छह जुलाई की तिथि नियत है।
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किताब में यह किया गया है दावा
काकड़ा गांव के वीरेंद्र बालियान की पुस्तक ‘भारतीय क्षत्रिय जाट इतिहास’ 15 फरवरी 2013 को प्रकाशित हुई थी। पेज संख्या 340 पर गोयला गांव की स्थापना में लिखा है कि इस गांव को बालियान खाप के सोरम गांव के पांच रघुवंशी जाट चौधरियों, दो ब्राह्मणों और अन्य जातियों आदि के 228 लोगों ने सोरम गांव से जाकर और नाथ संप्रदाय के संत बाबा गोयलनाथ से मिलकर 1477 ईसवी में बसाया है। इस गांव का नामकरण बाबा गोयलनाथ के नाम पर गोयला रखा था।
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परिवादी ने कहा, इस तरह हुई मानहानि
परिवादी ने अदालत में कहा कि पुस्तक में लिखा इतिहास असत्य है। परिवादी और उनके पूर्वज पहले से ही गोयला गांव के रहने वाले हैं। परिवादी के पूर्वज नरपाल ने 985 ईस्वी में गांव बसाया था। विपक्षी इससे भली-भांति परिचित है, लेकिन कुटुंब को अपमानित करने के लिए नरपाल के स्थान पर चंद्रपाल बताया है। विपक्षी ने जान बूझकर परिवादी के पूर्वजों के नाम, जाति और गोत्र में बदलाव किया है। इससे परिवादी अपमानित हुआ है। विपक्षी ने पुस्तक में यह सिद्ध करने की कोशिश की है कि परिवादी जाट व मलिक गौत्र के नहीं है।
इस दावे पर परिवादी ने जताई आपत्ति
पुस्तक में लिखा है कि चंद्रपाल नाम का कोई व्यक्ति मोमन फरीदपुर के सुमाल राजपूतों में रहता था, जिसके गांव का कोई अता-पता नहीं था। इसका सोरम गांव के लोगों का झगड़ा हो गया था। चंद्रपाल ने मोमन फरीदपुर को छोड़कर अपने साथियों के साथ रहने के लिए एक रठान बना ली और वहीं पर रहने लगा। सोरम गांव के नौजवानों ने हमला कर दिया, तब गोयला गांव के लोगों ने मदद की और अपने गांव में पूरब दिशा में आबाद कर दिया। इन्होंने गांव वालों से यह भी कहा कि हम भी जाट है और सोमवाल राजपूत कहलाते हैं। इस तर्क पर परिवादी ने मानहानि का दावा किया है।
44 साल पहले इतिहास पर हुआ था विवाद
मुजफ्फरनगर। गोयला गांव के इतिहास पर 44 साल पहले विवाद हुआ था। सर्वखाप पंचायत बालियान गोत्र भाग एक नाम की पुस्तक के पृष्ठ संख्या 158 पर गोयला गांव का यही इतिहास लिखा गया था। तब गोयला गांव के नरसिंह देव मलिक ने सर्वखाप मंत्री कबूल सिंह पर परिवाद दर्ज कराया था। तब भी अदालत का फैसला नरसिंह देव मलिक के पक्ष में आया था।

पुस्तक के लेखक का हो चुका निधन
मुजफ्फरनगर। भारतीय क्षत्रिय जाट इतिहास के लेखक काकड़ा गांव के वीरेंद्र बालियान का आठ फरवरी 2022 को निधन हो गया था। वर्तमान में उनका परिवार मंगलापुरी गली नंबर पांच में रहता है।
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