{"_id":"5ed7d2eb8ebc3e904e1ccd14","slug":"could-not-get-a-stamp-due-to-lack-of-stamp-muzaffarnagar-news-mrt4846902130","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्टांप न होने से नही हो सके बैनामे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्टांप न होने से नही हो सके बैनामे
विज्ञापन
स्टांप न होने से नही हो सके बैनामे
मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। तहसील बुढ़ाना में स्टांप न होने से बैनामे व इकरारनामे आदि नहीं हो पा रहे हैं। स्टांप विक्रेताओं का आरोप है कि जिला मुख्यालय से उन्हें पर्याप्त मात्रा में स्टांप नहीं मिलता है। स्टांप की किल्लत से ग्रामीण परेशान हैं। सरकार को भी राजस्व की हानि हो रही है। स्टांप विक्रेताओं ने समस्या के समाधान की मांग की है।
तहसील मुख्यालय पर स्टांप बेचने के लिए जिला मुख्यालय द्वारा सात स्टांप विक्रेताओं को लाइसेंस दिया गया है। स्टांप विक्रेताओं का कहना है कि बुढ़ाना तहसील से ट्रेजरी खत्म होने के बाद स्टांप की समस्या पैदा हो गई है। तहसील मुख्यालय में बैठने वाले सभी स्टांप विक्रेताओं को जिला मुख्यालय से स्टांप लाना पड़ता है। स्टांप विक्रेताओं का कहना है कि उन्हें सप्ताह में केवल दो बार स्टांप दिया जाता है। वह भी पर्याप्त मात्रा में नहीं दिया जाता है। बुुधवार को विक्रेताओं के पास स्टांप न होने से बैनामा अथवा इकरारनामा नहीं हो सका। स्टांप की किल्लत के कारण ग्रामीण परेशान रहे। स्टांप विक्रेताओं ने बताया कि उन्हें मांग के अनुसार स्टांप नहीं मिलता। आरोप है कि जिला मुख्यालय सह-खजांची उनके साथ दुर्व्यवहार भी करता है। स्टांप विक्रेता योगेश कुमार, प्रमोद कुमार, सुनील, उषा गोयल व अरविंद कुमार आदि ने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर समस्या के समाधान की मांग की है।
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर, बुढ़ाना। तहसील बुढ़ाना में स्टांप न होने से बैनामे व इकरारनामे आदि नहीं हो पा रहे हैं। स्टांप विक्रेताओं का आरोप है कि जिला मुख्यालय से उन्हें पर्याप्त मात्रा में स्टांप नहीं मिलता है। स्टांप की किल्लत से ग्रामीण परेशान हैं। सरकार को भी राजस्व की हानि हो रही है। स्टांप विक्रेताओं ने समस्या के समाधान की मांग की है।
तहसील मुख्यालय पर स्टांप बेचने के लिए जिला मुख्यालय द्वारा सात स्टांप विक्रेताओं को लाइसेंस दिया गया है। स्टांप विक्रेताओं का कहना है कि बुढ़ाना तहसील से ट्रेजरी खत्म होने के बाद स्टांप की समस्या पैदा हो गई है। तहसील मुख्यालय में बैठने वाले सभी स्टांप विक्रेताओं को जिला मुख्यालय से स्टांप लाना पड़ता है। स्टांप विक्रेताओं का कहना है कि उन्हें सप्ताह में केवल दो बार स्टांप दिया जाता है। वह भी पर्याप्त मात्रा में नहीं दिया जाता है। बुुधवार को विक्रेताओं के पास स्टांप न होने से बैनामा अथवा इकरारनामा नहीं हो सका। स्टांप की किल्लत के कारण ग्रामीण परेशान रहे। स्टांप विक्रेताओं ने बताया कि उन्हें मांग के अनुसार स्टांप नहीं मिलता। आरोप है कि जिला मुख्यालय सह-खजांची उनके साथ दुर्व्यवहार भी करता है। स्टांप विक्रेता योगेश कुमार, प्रमोद कुमार, सुनील, उषा गोयल व अरविंद कुमार आदि ने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर समस्या के समाधान की मांग की है।
विज्ञापन