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कोरोना का छात्रों की हैंड राइटिंग पर पड़ा असर

Tue, 03 May 2022 11:18 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 03 May 2022 11:18 PM IST
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Corona had an effect on the handwriting of students
मुजफ्फरनगर। यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं पर भी कोरोना महामारी का असर पड़ा है। घर पर लिखने का नियमित अभ्यास नहीं होने के कारण इम्तहान में छात्रों को लिखने में परेशानी आई है। गणित और साइंस में जहां बच्चे उलझे हैं, वहीं भाषा को निरंतर गति से लिखने का संकट सामने आया है।
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कोरोना महामारी में इंटर कॉलेजों में पढ़ाई प्रभावित रही है। यूपी बोर्ड के कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्रा गरीब और मध्यम परिवारों से आते हैं। सीबीएसई बोर्ड के बच्चों की तरह उनके पास मोबाइल की सुविधा भी नहीं थी। परिजनों के मोबाइल से ही पढ़ाई में सहयोग लिया। गांवों में इंटरनेट की समस्या भी बड़ा कारण रही। गणित की कैलकुलेशन समझने में बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। साइंस में भी यही स्थिति रही। हिंदी और अंग्रेजी भाषा के लिखने में जो स्पष्टता होनी चाहिए थी, वह उत्तर पुस्तिकाओं में देखने को नहीं मिली।
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उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने वाले डीएवी इंटर के गणित के शिक्षक प्रवीण शर्मा का कहना है कि गणित ऐसा विषय है जब तक समझ नहीं आए तक प्रश्नों का हल नहीं हो सकता। कोरोना की विषम परिस्थितियों में शिक्षा प्रभावित तो हुई ही है। इसका असर उत्तर पुस्तिकाओं में भी देखने को मिला। हालांकि कुछ बच्चों ने बहुत अच्छी मेहनत की है।
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एसडी इंटर कॉलेज के कला प्रवक्ता राजबल सैनी का कहना है कि ड्राइंग में कोरोना का सबसे कम असर है। घर पर रहकर बच्चों ने ड्राइंग पर ध्यान दिया है। यह जल्दी समझ आ जाता है।
ग्रेन चैंबर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य विजय शर्मा का कहना है कि कोरोना का असर पूरी शिक्षा व्यवस्था पर पड़ा है। यूपी बोर्ड के छात्र-छात्रा सीबीएसई के मुकाबले अधिक प्रभावित हुए हैं। पूरी व्यवस्था को पटरी पर आने में थोड़ा समय लगेगा। हम अब प्रतिदिन बच्चों से एक नकल लिखवाने की प्रेक्टिस अपने कॉलेज में करा रहे है, जिससे उनके लिखने का क्रम बना रहे।

हैंड राइटिंग पर थोडा असर
जिला विद्यालय निरीक्षक गजेंद्र कुमार का कहना है कि दो साल तक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित रही है। इसका असर परीक्षा की कॉपियों पर आना स्वाभाविक है। हैंड राइटिंग में थोड़ी दिक्कत रही है। इसके बावजूद बच्चों ने काफी मेहनत की है। कुछ छात्र-छात्राओं ने कोरोना के मिथक को भी तोड़ा है।
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