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कहीं ये लापरवाही जिंदगी पर न पड़ जाए भारी

Tue, 25 May 2021 12:04 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 25 May 2021 12:04 AM IST
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Corona curfew is not being followed in the city
कहीं ये लापरवाही जिंदगी पर न पड़ जाए भारी
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मुजफ्फरनगर। कोरोना संक्रमण का पीक भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन मरीज सामने आने के साथ ही कोरोना से होने वाली मौतों का सिलसिला अभी भी जारी है। नेता व पुलिसकर्मियों से लेकर रसूखदार व मंत्री तक कोरोना का शिकार हो रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके लोग हैं कि हद दर्जे की लापरवाही करते हुए खुद के साथ ही अपने परिवार और अन्य लोगों की जान को खतरे में डालने से बाज नहीं आ रहे हैं।
प्रशासन द्वारा रोजाना आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी के लिए सुबह 11 बजे तक दुकानें खोलने की अनुमति मिली हुई है, लेकिन लोग इस समय में घरों से ऐसे निकल रहे हैं कि इसके बाद कहीं फिर सामान ही न मिले। सुबह सात बजे से 11 बजे तक का नजारा तो सड़कों पर भी आम दिनों की ही भांति होता है, जहां कोविड गाइडलाइन का कतई पालन नहीं किया जाता। लोगों की इस लापरवाही को देखते हुए बस यही शब्द शेष रह जाते हैं, संभल जाओ, कहीं ये लापरवाही जिंदगी पर भारी न पड़ जाए।
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शहर में कूकड़ा मंडी के साथ ही शामली रोड और नदी रोड स्थित बैंक्वेट हॉल में सब्जी की थोक मंडियां लगती हैं। इन मंडियों में न तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाता है और न ही अधिकांश लोगों के चेहरों पर मास्क ही नजर आता है। हां, पुलिसकर्मी दिख जाए तो तत्काल मास्क लगा लिया जाता है, लेकिन उनके आगे जाते ही फिर से यही हालात।
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शहर के भगतसिंह रोड स्थित सब्जी की फुटकर मंडी और चंद कदमों की दूरी पर किराना की थोक दाल मंडी में भी कमोबेश यही नजारा सुबह 11 बजे तक रहता है। यहां सामान खरीदने के लिए लोग सोशल डिस्टेंसिंग की भी परवाह नहीं करते। कहने को यह कंटेंनमेंट जोन है, लेकिन प्रशासन द्वारा यहां लगाई गईं बांस-बल्लियां केवल सांकेतिक हैं, जिन्हें हटाकर बखूबी पैदल के साथ ही वाहन भी निकाले जाते हैं।
शहर की प्रतिष्ठित एसडी कॉलेज मार्केट के साथ ही कपड़े की कई छोटी-बड़ी मार्केट और दुकानों पर चोरी-छिपे दिनभर कपड़ों की खरीदारी की जाती है। एक व्यक्ति दुकान के बाहर खड़ा होकर ग्राहक तलाश करता है, जिसे थोड़ा सा शटर उठाकर अंदर ले लिया जाता है। सामान लेने के बाद फिर से शटर उठाकर पहले वाले को बाहर कर दूसरे ग्राहक को अंदर भेज दिया जाता है और शटर फिर से बंद। दिनभर पुलिस-प्रशासन से लुकाछिपी खेलने वाले ये दुकानदार थोड़े से मुनाफे के लिए अपनी व परिजनों की जान के लिए कब कोरोना का तोहफा ले बैठेंगे, ये खुद भी नहीं जानते।

सड़कों पर होता है वाहनों का रेला
मुजफ्फरनगर। कोरोना कर्फ्यू में निर्धारित समय में सुबह छह बजे से 11 बजे तक तो सड़कों पर रोजाना की भांति ही ट्रैफिक रहता है। धड़ल्ले से दुपहिया व बड़े वाहनों के साथ ही ई-रिक्शाएं भी सड़कों पर दौड़ती रहती हैं। जरूरी सामान की कौन सी आवाजाही ये वाहन करते हैं, इसकी इन्हें भी जानकारी नहीं होती। लापरवाही यह कि निर्धारित समय के बाद भी दिनभर ये वाहन इसी प्रकार सड़कों पर दौड़ते रहते हैं, लेकिन पुलिस है कि कुछ देर के लिए चौराहों पर बेरिकेडिंग लगाकर वाहनों की चेकिंग कर कर्तव्य की इतिश्री कर लेती है।
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