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भूख से डर लगता है साहब : कोरोना कर्फ्यू में काम की तलाश में पुल पर सो रहे मजदूर, सुबह के लिए रात को बचा लेते हैं रोटी
Thu, 13 May 2021 09:14 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Published by: Dimple Sirohi
Updated Thu, 13 May 2021 09:14 PM IST
सार
कोरोना कर्फ्यू के बीच काम की तलाश में जिले के भोपा पुल की पटरियों पर बैठे रहते हैं मजदूर, रात को ही रोटी बचाकर सुबह के लिए रख लेते हैं
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रात में भोपा पुल की पटरियों पर लेटे मजदूर
- फोटो : amar ujala
विस्तार
कोरोना महामारी के खिलाफ एक तरफ जंग लड़ी जा रही है, दूसरी तरफ मजदूर पेट की भूख के लिए लड़ रहा है। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में शाम ढलते ही भोपा पुल की पटरियों पर सैकड़ों मजदूर लेटे दिखाई देते हैं। इन मजदूरों का कहना है कि हमें कोरोना से नहीं, भूख से डर लगता है।
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रामराज के जोनी (50) कहते हैं कि जब से कोरोना कर्फ्यू लगा है, मजदूरी कम मिल रही है। हमें कोरोना का इतना डर नहीं है, जितना भूख का है। कर्फ्यू में मजदूरी के दौरान दोपहर की रोटी का संकट है। झारखंड से यहां मजदूरी के लिए आए राजू कहते हैं कि हर तरह की मजदूरी पर तैयार रहते हैं। हमें कोरोना का डर नहीं है। डर तब लगता है जब रोजगार नहीं मिलता।
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नावला गांव के मूल निवासी राकेश कहते हैं कि मजदूरी नहीं करेंगे, तो खाएंगे क्या। खतौली के बबलू का कहना है कि प्रतिदिन शाम के समय मजदूरों को सिख समाज के लोग भोजन बांट रहे हैं। ये भोजन न देते तो कर्फ्यू में हम लोग ही भूखे मर जाते। वहीं, शाम को आठ बजे के बाद भोपा पुल की पटरी पर दिनभर के थके हारे श्रमिकों के बिस्तर बिछने लगते हैं।
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सुबह के लिए रात को बचा लेते हैं रोटी
भोपा पुल पर रात में ठहरने वाले मजदूर राकेश, जाॅनी, जतन, कालू, पप्पू ने बताया कि सुबह को तो कोई भोजन देने आता नहीं है, इसलिए हम आग्रह करके रात में ज्यादा भोजन ले लेते हैं। रात के भोजन को सुबह के लिए बचा लेते हैं। गर्मी में भोजन को खराब होने से पहले सुबह-सुबह खा लेते हैं। इससे दिन में आराम से मजदूरी कर लेते हैं।