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कोरोना ने तोड़ी कपड़ा व्यापार की कमर

Thu, 10 Jun 2021 12:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 10 Jun 2021 12:06 AM IST
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Corona broke the back of textile traders
कोरोना ने तोड़ी कपड़ा कारोबारियों की कमर
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मुजफ्फरनगर। जनपद में अप्रैल माह से लगे कोरोना कर्फ्यू ने कपड़ा कारोबारियों की कमर तोड़कर रख दी है। कर्फ्यू के दौरान बड़ी तादाद में माल चूहे कुतर गए तो डिजाइन पुराने होने से बहुत सारा माल आउट डेटेड भी हो गया। कर्फ्यू खुलने के बाद भी व्यापारियों की परेशानियां जस की तस है। कारण, कर्फ्यू के दौरान के बिजली बिल व कर्फ्यू खुलने के बाद लेबर खर्च सिर पर खड़ा है, जबकि ग्राहकों द्वारा फिलहाल खरीदारी से दूरियां बनाने के चलते खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऊपर से उधार लिए गए माल की देनदारी का भी तकादा शुरू हो गया है। ऐसे में कपड़ा व्यापारियों के आर्थिक हालात बिगड़ने लगे हैं, जिन्होंने शासन से आर्थिक पैकेज उपलब्ध कराए जाने की भी मांग की है।
जिला कपड़ा व्यापार संघ के चेयरमैन राकेश कंसल का कहना है कि कोरोना कर्फ्यू में आर्थिक रूप से काफी दिक्कतें आईं हैं। हर साल शादी सीजन से बड़ी उम्मीदें होती हैं, लेकिन इस बार कोरोना कर्फ्यू में ही शादी सीजन निकल गया, जिससे माल की बिक्री नहीं हो पाई। व्यापारियों की बैंक की किस्तें व बिजली के बिल जस के तस हैं, ऊपर से लेबर का खर्च भी जुड़ गया है। शासन को चाहिए कि व्यापारियों को भी किसानों को दी जाने वाली राहत की तर्ज पर पैकेज प्रदान किया जाए।
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एसडी मार्केट के कपड़ा व्यापारी रवि कुमार का कहना है कि व्यापारियों के सामने इस कोरोना काल में बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कर्फ्यू खुलने के बावजूद व्यापार पूरी तरह ठप है, जिससे आमदनी शून्य है। तमाम खर्च सिर पर खड़े हैं, जिनमें बच्चों की फीस, उधार लिए गए माल की देनदारी और लेबर खर्च शामिल हैं। बिगड़ रहे आर्थिक हालात में सरकार से मदद की उम्मीदें बेमानी लग रही हैं।
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एसडी कॉलेज मार्केट के कपड़ा व्यापारी पंकज गर्ग का कहना है कि कोरोना काल में व्यापार पूरी तरह से चौपट हो चुका है। लेबर की तनख्वाह के साथ ही बिजली के बिल व अन्य सभी खर्च ज्यों के त्यों हैं, लेकिन आमदनी शून्य हो चुकी है। दुकानों में रखा लाखों कीमत का माल भी आउट डेटेड होने के कगार पर है।

- सदर बाजार के कपड़ा व्यापारी सचिन गर्ग का कहना है कि करीब डेढ़ माह तक लगातार दुकानें बंद होने के कारण मोटा नुकसान हुआ है। चूहों ने दुकान में माल की पैकिंग के लिए रखा सामान कुतर दिया है। बड़ी तादाद में कीमती कपड़े भी चूहे कुतर चुके हैं। वहीं, कोरोना से पूर्व खरीदा गया माल भी अब सेलआउट नहीं हो रहा है। सरकार से यही उम्मीद है कि शायद वह किसानों की तरह व्यापारी जगत का भी ख्याल रखते हुए उनके बारे में भी सोचे।
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