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बर्ड फ्लू की दहशत में फंसे मुर्गा कारोबारी
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बर्ड फ्लू की दहशत में फंसे मुर्गा कारोबारी
मुजफ्फरनगर। जनपद के कुतुबपुर गांव में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद पोल्ट्री फार्म संचालकों के करोड़ों रुपये डूबने के कगार पर पहुंच गए हैं। फार्म संचालक अनहोनी की आशंका में पोल्ट्री फार्म खाली करने में जुटे हैं। चार दिन में मुर्गे के दाम करीब 40 फीसदी तक गिर गए हैं, वहीं हैचरी कारोबारियों को एडवांस दिए गए लाखों रुपये भी फंस गए हैं।
जनपद में वर्तमान में 84 पंजीकृत और सैकड़ों अपंजीकृत पोल्ट्री फार्म चल रहे हैं, जिनमें हर माह करोड़ों रुपयों का कारोबार होता है। बीते चार दिन से पाोल्ट्री फार्म संचालक बर्ड फ्लू की दहशत से भयभीत हैं। दरअसल, मीरापुर के गांव कुतुबपुर में 13 जनवरी को मृत कौवे मिलने और 15 जनवरी को इनमें बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद मुर्गा कारोबार धड़ाम हो गया है। मीरापुर में चिकन व अंडों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद पूरे जिले के पोल्ट्री फॉर्म संचालक आशंकित हो उठे हैं। आनन-फानन में पोल्ट्री फॉर्म खाली करने में जुट गए हैं। वहीं, जिन पोल्ट्री फार्म संचालकों द्वारा हैचरी कारोबारियों को नए चूजे खरीदने के लिए एडवांस में लाखों की रकम दी गई है, वे अब नए चूजे लाने से कतरा रहे हैं। वहीं, हैचरी संचालक इन कारोबारियों पर माल (चूजे) उठाने का दबाव डाल रहे हैं। इसके चलते माल न उठाने की स्थिति में उनकी एडवांस रकम फंसने का खतरा भी मंडराने लगा है।
40 फीसदी तक गिरे मुर्गे के दाम
मुजफ्फरनगर। बर्ड फ्लू की दहशत के चलते जनपद में जीवित मुर्गे के दाम चार दिन के भीतर ही करीब 40 फीसदी तक गिर गए हैं। 15 जनवरी को एक सौ रुपये प्रति किलो बिकने वाले मुर्गे के दाम सोमवार को घटकर महज 65 रुपये प्रतिकिलो रह गए हैं। वहीं, करीब दो सौ रुपये प्रति किलो बिक रहा चिकन भी अब घटकर महज 140 रुपये प्रति किलो रह गया है।
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इन्होंने कहा ......
शालीमार पोल्ट्री फॉर्म संचालक मोहम्मद शोएब उर्फ भूरा का कहना है कि अभी तक मुर्गे में बर्ड फ्लू का कोई मामला नहीं मिला है। हालांकि दाम में थोड़ी गिरावट आई है। इसके बावजूद पोल्ट्री फार्म संचालक इस समय नए चूजे डालने में संकोच कर रहे हैं, जिसके चलते उनके लाखों रुपये हैचरी में फंस गए हैं।
पोल्ट्री फार्म संचालक व चिकन कारोबारी जावेद कासमी का कहना है कि बर्ड फ्लू से कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। एक ओर जहां मुर्गे के दाम गिर गए हैं। वहीं, हैचरी में भी फॉर्म संचालकों के करोड़ों रुपये फंस गए हैं।
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मुजफ्फरनगर। जनपद के कुतुबपुर गांव में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद पोल्ट्री फार्म संचालकों के करोड़ों रुपये डूबने के कगार पर पहुंच गए हैं। फार्म संचालक अनहोनी की आशंका में पोल्ट्री फार्म खाली करने में जुटे हैं। चार दिन में मुर्गे के दाम करीब 40 फीसदी तक गिर गए हैं, वहीं हैचरी कारोबारियों को एडवांस दिए गए लाखों रुपये भी फंस गए हैं।
जनपद में वर्तमान में 84 पंजीकृत और सैकड़ों अपंजीकृत पोल्ट्री फार्म चल रहे हैं, जिनमें हर माह करोड़ों रुपयों का कारोबार होता है। बीते चार दिन से पाोल्ट्री फार्म संचालक बर्ड फ्लू की दहशत से भयभीत हैं। दरअसल, मीरापुर के गांव कुतुबपुर में 13 जनवरी को मृत कौवे मिलने और 15 जनवरी को इनमें बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद मुर्गा कारोबार धड़ाम हो गया है। मीरापुर में चिकन व अंडों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद पूरे जिले के पोल्ट्री फॉर्म संचालक आशंकित हो उठे हैं। आनन-फानन में पोल्ट्री फॉर्म खाली करने में जुट गए हैं। वहीं, जिन पोल्ट्री फार्म संचालकों द्वारा हैचरी कारोबारियों को नए चूजे खरीदने के लिए एडवांस में लाखों की रकम दी गई है, वे अब नए चूजे लाने से कतरा रहे हैं। वहीं, हैचरी संचालक इन कारोबारियों पर माल (चूजे) उठाने का दबाव डाल रहे हैं। इसके चलते माल न उठाने की स्थिति में उनकी एडवांस रकम फंसने का खतरा भी मंडराने लगा है।
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40 फीसदी तक गिरे मुर्गे के दाम
मुजफ्फरनगर। बर्ड फ्लू की दहशत के चलते जनपद में जीवित मुर्गे के दाम चार दिन के भीतर ही करीब 40 फीसदी तक गिर गए हैं। 15 जनवरी को एक सौ रुपये प्रति किलो बिकने वाले मुर्गे के दाम सोमवार को घटकर महज 65 रुपये प्रतिकिलो रह गए हैं। वहीं, करीब दो सौ रुपये प्रति किलो बिक रहा चिकन भी अब घटकर महज 140 रुपये प्रति किलो रह गया है।
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इन्होंने कहा ......
शालीमार पोल्ट्री फॉर्म संचालक मोहम्मद शोएब उर्फ भूरा का कहना है कि अभी तक मुर्गे में बर्ड फ्लू का कोई मामला नहीं मिला है। हालांकि दाम में थोड़ी गिरावट आई है। इसके बावजूद पोल्ट्री फार्म संचालक इस समय नए चूजे डालने में संकोच कर रहे हैं, जिसके चलते उनके लाखों रुपये हैचरी में फंस गए हैं।
पोल्ट्री फार्म संचालक व चिकन कारोबारी जावेद कासमी का कहना है कि बर्ड फ्लू से कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। एक ओर जहां मुर्गे के दाम गिर गए हैं। वहीं, हैचरी में भी फॉर्म संचालकों के करोड़ों रुपये फंस गए हैं।