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सत्ता और विपक्ष में शह मात का खेल शुरू

Wed, 23 Jun 2021 11:46 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 23 Jun 2021 11:46 PM IST
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Check-out game started between power and opposition
सत्ता और विपक्ष के बीच शह मात का खेल शुरू
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मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत चुनाव को लेकर सत्ताधारी भाजपा और संयुक्त विपक्ष के बीच शह मात का खेल शुरू हो चुका है। जरीन के जाति प्रमाणपत्र को लेकर दोनों आमने-सामने आ गए हैं। तहसील ने जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने की संस्तुति की है। जिले की सत्यापन समिति को इस पर निर्णय लेना है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए 26 जून को नामांकन की तैयारी भाजपा और विपक्ष दोनों ने कर ली है। भाजपा से वीरपाल निर्वाल और विपक्ष से सतेंद्र बालियान मैदान में होंगे। दोनों तरफ से शह मात का खेल शुरू हो गया है। कोई भी मौके को चूकना नहीं चाहता है। वार्ड 41 की जिला पंचायत सदस्य जरीन का प्रकरण इसी बीच तूल पकड़ता जा रहा है। इनके खिलाफ नई मंडी थाने में मखियाली के एक व्यक्ति ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र लगाए जाने का मुकदमा दर्ज कराया है। शिकायत के बाद तहसील की ओर से प्रशासन को जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने की संस्तुति की गई है। आरोप है कि वह मोमीन अंसारी जाति की नहीं है और उन्होंने पिछड़ी जाति का इसी का प्रमाण पत्र बनवाया है। इस मामले को विपक्ष ने भी तूल दे दिया है। तहसील की रिपोर्ट के आधार पर एडीएम प्रशासन की अध्यक्षता में सत्यापन समिति की बैठक होगी। पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी की ओर से दोनो पक्षों को नोटिस जारी कर पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। तमाम प्रक्रिया के बीच सदस्यता समाप्त होना इतना आसान नहीं है। इसके लिए भी एक पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया है। भाजपा जहां जाति प्रमाण पत्र निरस्त कराने के लिए दबाव बना रही है, वहीं विपक्ष ने इसे मुद्दा बना लिया है और प्रशासन पर उत्पीडऩ का आरोप लगा रहा है। अब देखना यह है कि दोनो में से कौन सफल होता है।
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तहसील ने रिपोर्ट भेज दी है: एसडीएम
मुजफ्फरनगर। एसडीएम सदर दीपक कुमार का कहना है कि जांच के बाद तहसील की ओर से एसडीएम प्रशासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। रिपोर्ट में पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र निरस्त करने की संस्तुति की गई है।
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दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर सुना जाएगा
मुजफ्फरनगर। एडीएम प्रशासन अमित सिंह का कहना है कि जाति प्रमाण पत्र निरस्त करने की एक प्रक्रिया है। तहसीलदार की रिपोर्ट के बाद पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी सत्यापन समिति की बैठक बुलाएगा। दोनों पक्षों को नोटिस जारी किया जाएगा और दोनों का पक्ष सुना जाएगा। उसके बाद कार्रवाई होगी। सदस्यता समाप्त करने की भी एक पूरी प्रक्रिया है, जो इतनी जल्दी नहीं होती है।
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