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Muzaffarnagar News: मूल पत्रावलियों की फोटोकॉपी से ही गवाही कराएगी सीबीआई
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रामपुर तिराहा कांड
- अपर जिला जज एवं सत्र न्यायालय संख्या सात ने फैसला सुनाया
- मामले में अगली सुनवाई 16 अगस्त को होगी
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड की गायब मूल पत्रावलियों की फोटोकॉपी के आधार पर गवाही होगी। सीबीआई के प्रार्थनापत्र को अदालत ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। बचाव पक्ष की आपत्ति खारिज कर दी गई। अपर जिला जज एवं सत्र न्यायालय संख्या सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने फैसला सुनाया। अगली सुनवाई 16 अगस्त को होगी।
शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजीव शर्मा, सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परवेंद्र सिंह, उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता अनुराग वर्मा और रजनीश चौहान ने बताया कि सरकार बनाम मिलाप सिंह और राधा मोहन की पत्रावलियों के मूल दस्तावेज गायब है। सीबीआई ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर मूल पत्रावलियों की फोटोकॉपी के आधार पर साक्ष्य कराने की अनुमति मांगी थी।
बचाव पक्ष ने इस पर अपनी आपत्ति दाखिल की। अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई की। शुक्रवार को अदालत ने प्रार्थना पत्र का निस्तारण कर दिया है। सीबीआई को फोटोकॉपी के आधार पर गवाहों को अदालत लाने के आदेश दिए गए हैं। अगली सुनवाई 16 अगस्त को होगी।
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ये था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे।
एक पीडि़ता की हो चुकी गवाही
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या सात में प्रकरण की सुनवाई में तेजी आई है। अदालत की सख्ती के बाद आरोपी अदालत में हाजिर हुए थे। अब तक एक पीडि़ता की गवाही हो चुकी है।
कहां गुम हो गई पत्रावलियां
प्रदेश के चर्चित मामले की मूल पत्रावलियां गायब होने का मामला अब तक नहीं सुलझ सका है। सवाल है कि आखिर सीबीआई के पास से पत्रावलियां कैसे और कब गायब हो गई।
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- अपर जिला जज एवं सत्र न्यायालय संख्या सात ने फैसला सुनाया
- मामले में अगली सुनवाई 16 अगस्त को होगी
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड की गायब मूल पत्रावलियों की फोटोकॉपी के आधार पर गवाही होगी। सीबीआई के प्रार्थनापत्र को अदालत ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। बचाव पक्ष की आपत्ति खारिज कर दी गई। अपर जिला जज एवं सत्र न्यायालय संख्या सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने फैसला सुनाया। अगली सुनवाई 16 अगस्त को होगी।
शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजीव शर्मा, सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परवेंद्र सिंह, उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता अनुराग वर्मा और रजनीश चौहान ने बताया कि सरकार बनाम मिलाप सिंह और राधा मोहन की पत्रावलियों के मूल दस्तावेज गायब है। सीबीआई ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर मूल पत्रावलियों की फोटोकॉपी के आधार पर साक्ष्य कराने की अनुमति मांगी थी।
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बचाव पक्ष ने इस पर अपनी आपत्ति दाखिल की। अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई की। शुक्रवार को अदालत ने प्रार्थना पत्र का निस्तारण कर दिया है। सीबीआई को फोटोकॉपी के आधार पर गवाहों को अदालत लाने के आदेश दिए गए हैं। अगली सुनवाई 16 अगस्त को होगी।
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ये था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे।
एक पीडि़ता की हो चुकी गवाही
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या सात में प्रकरण की सुनवाई में तेजी आई है। अदालत की सख्ती के बाद आरोपी अदालत में हाजिर हुए थे। अब तक एक पीडि़ता की गवाही हो चुकी है।
कहां गुम हो गई पत्रावलियां
प्रदेश के चर्चित मामले की मूल पत्रावलियां गायब होने का मामला अब तक नहीं सुलझ सका है। सवाल है कि आखिर सीबीआई के पास से पत्रावलियां कैसे और कब गायब हो गई।