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Muzaffarnagar News: लापता पुलिसकर्मी विक्रम सिंह को नहीं ढूंढ पा रही सीबीआई
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पीठासीन अधिकारी ने नाराजगी जताई, एसपी सीबीआई और तहसीलदार हापुड़ को लिखा पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड को हुए 29 साल से ज्यादा का समय बीत गया है। सीबीआई बनाम विक्रम सिंह का मुकदमा अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर सात शक्ति सिंह की अदालत में विचाराधीन है। सीआरपीसी की धारा 82 और 83 की कार्रवाई होने के बावजूद सीबीआई उसे नहीं ढूंढ पा रही है। आरोपी की फरारी के संबंध में पीठासीन अधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए एसपी सीबीआई और तहसीलदार हापुड़ को पत्र लिखा है।
अक्तूबर वर्ष 1994 को उत्तराखंड के पीड़ितों के साथ लूटपाट, हमला और महिलाओं से गैंगरेप और छेड़छ़ाड़ समेत कई गंभीर धाराओं में अफसरों और पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए थे। एक मामले में आरोपी पुलिसकर्मी विक्रम सिंह दशकों से अदालत में हाजिर नहीं हो रहा है। वर्ष 2004 से यह मामला सेशन कोर्ट में लंबित है। वर्तमान में एडीजे सात की अदालत में सेशन ट्रायल के मुकदमे स्थानांतरित होने के बाद सुनवाई में तेजी आई है।
उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता रजनीश चौहान और अनुराग वर्मा ने बताया पुलिसकर्मी विक्रम सिंह लापता चल रहा है। 20 साल से उसका पता नहीं है। उसकी फाइल अलग कर चल रही है। शुक्रवार को अदालत ने अनुपस्थित चल रहे विक्रम सिंह के पुनः गैर जमानती वारंट और 83 की कार्रवाई के लिए आदेशित किया है।
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फरार पुलिसकर्मी के संबंध स्थिति स्पष्ट करें सीबीआई
विक्रम सिंह के विगत कई वर्षों से गैर जमानती वारंट चल रहे है। जून वर्ष 2022 को दिल्ली सीबीआई के उप निरीक्षक ने धारा 83 के अंतर्गत तहसीलदार हापुड़ से फरार आरोपी की संपत्ति के विवरण उपलब्ध कराने की बात कहते हुए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। मगर, सीबीआई द्वारा रिपोर्ट दाखिल करने के नौ महीने बाद भी स्थिति यथावत बनी है। यदि आरोपी की मृत्यु हो गई है तो ऐसी स्थिति में सीबीआई ने कोई निश्चयतात्मक रिपोर्ट दाखिल नहीं की और यदि जीवित है तो संपत्ति कुर्की के संबंध में कोई आख्या प्रस्तुत नहीं की जा रही है। कोर्ट ने सीबीआई के इस आचरण अत्यंत आपत्तिजनक माना है। अगली तिथि पर अदालत ने फरार आरोपी के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की हिदायत दी है।
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अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड को हुए 29 साल से ज्यादा का समय बीत गया है। सीबीआई बनाम विक्रम सिंह का मुकदमा अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर सात शक्ति सिंह की अदालत में विचाराधीन है। सीआरपीसी की धारा 82 और 83 की कार्रवाई होने के बावजूद सीबीआई उसे नहीं ढूंढ पा रही है। आरोपी की फरारी के संबंध में पीठासीन अधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए एसपी सीबीआई और तहसीलदार हापुड़ को पत्र लिखा है।
अक्तूबर वर्ष 1994 को उत्तराखंड के पीड़ितों के साथ लूटपाट, हमला और महिलाओं से गैंगरेप और छेड़छ़ाड़ समेत कई गंभीर धाराओं में अफसरों और पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए थे। एक मामले में आरोपी पुलिसकर्मी विक्रम सिंह दशकों से अदालत में हाजिर नहीं हो रहा है। वर्ष 2004 से यह मामला सेशन कोर्ट में लंबित है। वर्तमान में एडीजे सात की अदालत में सेशन ट्रायल के मुकदमे स्थानांतरित होने के बाद सुनवाई में तेजी आई है।
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उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता रजनीश चौहान और अनुराग वर्मा ने बताया पुलिसकर्मी विक्रम सिंह लापता चल रहा है। 20 साल से उसका पता नहीं है। उसकी फाइल अलग कर चल रही है। शुक्रवार को अदालत ने अनुपस्थित चल रहे विक्रम सिंह के पुनः गैर जमानती वारंट और 83 की कार्रवाई के लिए आदेशित किया है।
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फरार पुलिसकर्मी के संबंध स्थिति स्पष्ट करें सीबीआई
विक्रम सिंह के विगत कई वर्षों से गैर जमानती वारंट चल रहे है। जून वर्ष 2022 को दिल्ली सीबीआई के उप निरीक्षक ने धारा 83 के अंतर्गत तहसीलदार हापुड़ से फरार आरोपी की संपत्ति के विवरण उपलब्ध कराने की बात कहते हुए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। मगर, सीबीआई द्वारा रिपोर्ट दाखिल करने के नौ महीने बाद भी स्थिति यथावत बनी है। यदि आरोपी की मृत्यु हो गई है तो ऐसी स्थिति में सीबीआई ने कोई निश्चयतात्मक रिपोर्ट दाखिल नहीं की और यदि जीवित है तो संपत्ति कुर्की के संबंध में कोई आख्या प्रस्तुत नहीं की जा रही है। कोर्ट ने सीबीआई के इस आचरण अत्यंत आपत्तिजनक माना है। अगली तिथि पर अदालत ने फरार आरोपी के संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की हिदायत दी है।