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बर्फीली हवाओं से जिले में ठिठुरे लोग
Tue, 25 Dec 2018 12:03 AM IST
Deepak Sharma
मुजफ्फरनगर/अमर उजाला/ब्यूरो
मुजफ्फरनगर/अमर उजाला/ब्यूरो
Published by: Deepak Sharma
Updated Tue, 25 Dec 2018 12:03 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरनगर। जिले में ठंड और शीतलहर के चलते पारा 0.1 डिग्री सेल्सियस पर रहा। सुबह के समय खेतों में बर्फ की चादर सी बिछ गई। घरों के टैंक का पानी बर्फ की स्थिति में पहुंच गया है और पीना मुश्किल हो गया है। अत्यधिक ठंड में लोग दिन में भी कंपकंपाते नजर आए। हाड़ कंपा देेने वाली ठंड के चलते आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। बाजार से लेकर यातायात पर सीधे प्रभाव पड़ा है।
जिले में बीते पांच दिन से न्यूनतम तापमान जमाव बिंदू के आसपास ही चल रहा है। सोमवार को न्यूनतम तापमान 0.1 डिग्री सेल्सियस रहा। इतना अधिक पारा गिर जाने का असर सीधे खेती किसानी पर भी पड़ रहा है। सुबह के समय खेतों में पाले की चादर सी बिछ रही है। सुबह के समय खेतों के सभी काम प्रभावित हो गए हैं। सुबह के समय गन्ने की छिलाई पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। किसान सुबह नौ बजे से पहले गन्ने की छिलाई नहीं कर पा रहे हैं। शहरी क्षेत्र में पेड़ों और घास पर सुबह के समय बर्फ की चादर साफ देखी जा रही है।
हालत यह है कि सुबह के समय कंपनी बाग सहित विभिन्न स्थानों पर घूमने जाने वालों की संख्या नगण्य हो गई है। ठंड का आलम यह है कि आम घरों में रखे पानी के टैंकों का पाल बर्फ सी स्थिति में पहुंच गया है। पानी को हाथ लगाते ही शरीर सिहर उठता है। टैंक का पानी बिना गर्म किए पीने की स्थिति में नहीं है।
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सुबह के समय बिजली नहीं आने से लोगों के घरों में ताजा पानी नहीं जा पाया, इस कारण सोमवार को लोगों को पानी को लेकर अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। ठंड का आलम यह है कि दोपहर के समय भी लोग शीतलहर के चलते कंपकंपाते नजर आए। सुबह और शाम में जहां सड़के सुनसान हो रही है, वहीं रात्रि में कोई मजबूरी में ही घर से बाहर निकल रहा है। शीतलहर के चलते बाजारों में ग्राहक 20 प्रतिशत भी नहीं रहे है। दुकानें जहां देर से खुल रही हैं, वह जल्दी बंद हो रही हैं।
कड़ाके की सर्दी और शीतलहर का असर परिवहन निगम पर भी पड़ रहा है। रोडवेज के एआरएम बीपी अग्रवाल ने बताया कि ठंड से यात्री कम मिलने के कारण रात्रि सेवाएं घटा दी गई हैं। रात्रि सेवाओं को दिन में चलाया जा रहा है। गन्ना शोध केंद्र के मौसम वैज्ञानिक पान सिंह का कहना है कि दिसंबर में लगातार इतनी ठंड वह पहली बार देख रहे हैं। उनका कहना है कि पहाड़ो पर हो रही बर्फबारी और शीतलहर के साथ ही जिले में भूगर्भ जलस्तर ऊंचा होने के कारण ही यहां सर्दी का प्रकोप सबसे अधिक हो रहा है।
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जिले में बीते पांच दिन से न्यूनतम तापमान जमाव बिंदू के आसपास ही चल रहा है। सोमवार को न्यूनतम तापमान 0.1 डिग्री सेल्सियस रहा। इतना अधिक पारा गिर जाने का असर सीधे खेती किसानी पर भी पड़ रहा है। सुबह के समय खेतों में पाले की चादर सी बिछ रही है। सुबह के समय खेतों के सभी काम प्रभावित हो गए हैं। सुबह के समय गन्ने की छिलाई पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। किसान सुबह नौ बजे से पहले गन्ने की छिलाई नहीं कर पा रहे हैं। शहरी क्षेत्र में पेड़ों और घास पर सुबह के समय बर्फ की चादर साफ देखी जा रही है।
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हालत यह है कि सुबह के समय कंपनी बाग सहित विभिन्न स्थानों पर घूमने जाने वालों की संख्या नगण्य हो गई है। ठंड का आलम यह है कि आम घरों में रखे पानी के टैंकों का पाल बर्फ सी स्थिति में पहुंच गया है। पानी को हाथ लगाते ही शरीर सिहर उठता है। टैंक का पानी बिना गर्म किए पीने की स्थिति में नहीं है।
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सुबह के समय बिजली नहीं आने से लोगों के घरों में ताजा पानी नहीं जा पाया, इस कारण सोमवार को लोगों को पानी को लेकर अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। ठंड का आलम यह है कि दोपहर के समय भी लोग शीतलहर के चलते कंपकंपाते नजर आए। सुबह और शाम में जहां सड़के सुनसान हो रही है, वहीं रात्रि में कोई मजबूरी में ही घर से बाहर निकल रहा है। शीतलहर के चलते बाजारों में ग्राहक 20 प्रतिशत भी नहीं रहे है। दुकानें जहां देर से खुल रही हैं, वह जल्दी बंद हो रही हैं।
कड़ाके की सर्दी और शीतलहर का असर परिवहन निगम पर भी पड़ रहा है। रोडवेज के एआरएम बीपी अग्रवाल ने बताया कि ठंड से यात्री कम मिलने के कारण रात्रि सेवाएं घटा दी गई हैं। रात्रि सेवाओं को दिन में चलाया जा रहा है। गन्ना शोध केंद्र के मौसम वैज्ञानिक पान सिंह का कहना है कि दिसंबर में लगातार इतनी ठंड वह पहली बार देख रहे हैं। उनका कहना है कि पहाड़ो पर हो रही बर्फबारी और शीतलहर के साथ ही जिले में भूगर्भ जलस्तर ऊंचा होने के कारण ही यहां सर्दी का प्रकोप सबसे अधिक हो रहा है।