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भागवत ज्ञान गंगा और भागीरथी गंगा का संगम स्थल है शुकतीर्थ-ओमानंद
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भगवत कथा का शुभारंभ पर बोलते स्वामी ओमानन्द महाराज।
- फोटो : KHATAULI
भागवत भारतीय जीवन और संस्कृति का दर्पण : स्वामी ओमानंद
मुजफ्फरनगर, मोरना। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम के डोंगरे भागवत भवन में मध्य प्रदेश के गुना से पधारे मदनमोहन पालीवाल ने आयोजित भागवत कथा में भागवत पोथी का पूजन किया और पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद ने उद्घाटन किया। स्वामी ओमानंद ने कहा कि भागवत भारतीय जीवन और संस्कृति का दर्पण है। भागवत भक्ति का सागर है।
स्वामी ओमानंद ने कहा कि शुकतीर्थ की अनेकों विशेषताएं हैं। यह भागवत की जन्मस्थली है, जिस वट वृक्ष के नीचे शुकदेव जी ने सर्वप्रथम भागवत कथा सुनाई थी। वह हमें आज भी साक्षात इस दिव्य स्थल पर दर्शन दे रहा है। शुकतीर्थ भागवत ज्ञान गंगा और भागीरथी गंगा का संगम स्थल है। यह तीर्थ लाखों ऋषि मुनियों की चरण धूलि से पवित्र है। इस स्थान पर देवता साक्षात अमृत का कलश लेकर आए। यह तीर्थ भागवत कथा अमृत और स्वर्ग के अमृत संगम स्थल है। स्वामी जी ने कहा कि शुकतीर्थ शुकदेव जी की पाठशाला है। भागवत भगवान कृष्ण का शब्द अवतार है। भगवान कृष्ण परिपूर्णता के अवतार हैं। भागवत संपूर्ण मानवता के लिए एक संजीवनी है, एक निधि है, एक धरोहर है। भागवत एक संस्कृति है, सभ्यता हैं, इतिहास है। भागवत मनुष्य में सकारात्मक और रचनात्मक दृष्टिकोण पैदा करती है। भागवत भारतीय जीवन और संस्कृति का दर्पण है। भागवत भक्ति का सागर है। परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण ही भक्ति है। कथावाचिका जय प्रिया सात दिन तक भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम में भागवत कथा सुनाएंगी।
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मुजफ्फरनगर, मोरना। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम के डोंगरे भागवत भवन में मध्य प्रदेश के गुना से पधारे मदनमोहन पालीवाल ने आयोजित भागवत कथा में भागवत पोथी का पूजन किया और पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद ने उद्घाटन किया। स्वामी ओमानंद ने कहा कि भागवत भारतीय जीवन और संस्कृति का दर्पण है। भागवत भक्ति का सागर है।
स्वामी ओमानंद ने कहा कि शुकतीर्थ की अनेकों विशेषताएं हैं। यह भागवत की जन्मस्थली है, जिस वट वृक्ष के नीचे शुकदेव जी ने सर्वप्रथम भागवत कथा सुनाई थी। वह हमें आज भी साक्षात इस दिव्य स्थल पर दर्शन दे रहा है। शुकतीर्थ भागवत ज्ञान गंगा और भागीरथी गंगा का संगम स्थल है। यह तीर्थ लाखों ऋषि मुनियों की चरण धूलि से पवित्र है। इस स्थान पर देवता साक्षात अमृत का कलश लेकर आए। यह तीर्थ भागवत कथा अमृत और स्वर्ग के अमृत संगम स्थल है। स्वामी जी ने कहा कि शुकतीर्थ शुकदेव जी की पाठशाला है। भागवत भगवान कृष्ण का शब्द अवतार है। भगवान कृष्ण परिपूर्णता के अवतार हैं। भागवत संपूर्ण मानवता के लिए एक संजीवनी है, एक निधि है, एक धरोहर है। भागवत एक संस्कृति है, सभ्यता हैं, इतिहास है। भागवत मनुष्य में सकारात्मक और रचनात्मक दृष्टिकोण पैदा करती है। भागवत भारतीय जीवन और संस्कृति का दर्पण है। भागवत भक्ति का सागर है। परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण ही भक्ति है। कथावाचिका जय प्रिया सात दिन तक भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम में भागवत कथा सुनाएंगी।
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