मुजफ्फरनगर, मोरना। शुकतीर्थ में भागवत पीठ शुकदेव आश्रम के परिसर में भागवत पोथी का पूजन किया गया। स्वामी ओमानंद महाराज ने औरंगाबाद से पधारे कथा व्यास रविंद्र महाराज का सम्मान किया। स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि भागवत भक्ति का भंडार है। भागवत से भक्ति का वरदान मिलता है। भारतीय संस्कृति में भक्ति को उपासना का प्राण कहा गया है।
कथा व्यास रविंद्र महाराज ने कहा कि भक्ति वह शक्ति है, जो भक्त के कल्याण का द्वार खोल देती है। सच्ची भक्ति की अवस्था वह है, जिसमें मनुष्य का प्रत्येक कर्म भगवान की पूजा बन जाता है। भक्ति ही भक्त का स्वधर्म है। सच्ची भक्ति मनुष्य को परमात्मा के शरणागत कर देती है। मनुष्य का जीवन अच्छे बुरे संस्कारों से भरा होता है। परंतु भक्ति से अच्छे संस्कार बनते है। परमात्मा को भक्ति द्वारा ही जाना पहचाना और प्राप्त किया जा सकत है। भक्ति से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है, जिसकी प्राप्ति से मनुष्य भव बंधन से मुक्त हो जाता है। निष्काम भक्ति से प्रभु प्राप्ति होती है। परमात्मा के प्रति सर्वस्व समर्पण ही भक्ति है। इसके अलावा भी विभिन्न स्थानों पर चल रही भागवत कथाओं में गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के भक्त धर्म लाभ उठा रहे है।