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गुड़ के मॉडल कोल्हू लगाने की योजना ढेर

Thu, 10 Oct 2019 11:06 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 10 Oct 2019 11:06 PM IST
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Banks are giving shock to pollution free crusher initiative
Banks are giving shock to pollution free crusher initiative
प्रदूषण मुक्त कोल्हू की पहल को झटका दे रहे बैंक
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रणवीर सैनी
मुजफ्फरनगर। एक जनपद-एक उत्पाद में प्रदेश सरकार ने जिले में गुड़ को शामिल किया है। यहां के गुड़ की मिठास पूरे देश में महकती है और एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंडी यहीं पर है। गुड़ उत्पादन को लेकर सरकार की मॉडल कोल्हू लगाने की योजना यहां बैंकों की धींगामस्ती के कारण परवान नहीं चढ़ पा रही है। दो साल में 130 लोगों ने मॉडल कोल्हू के लिए आवेदन किया, जिसमें से 101 आवेदन साक्षात्कार के बाद बैंकों को जा चुके हैं। बैंकों ने केवल सात आवेदन ही स्वीकार किए हैं। दो साल में केवल एक कोल्हू में ही गुड़ बनना शुरू हो पाया है।
प्रदेश सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना में जिले के प्रसिद्ध उत्पाद को गति देने के लिए विभिन्न योजनाएं बनाई है। मुजफ्फरनगर जिले में गुड़ को इसमें शामिल किया गया है। यहां का गुड़ देश के सभी राज्यों में जाता है। प्रदेश सरकार ने गुड़ को लेकर सबसे पहले मॉडल कोल्हू पर काम करना शुरू किया। इसका उद्देश्य प्रदूषण मुक्त कोल्हुओं की स्थापना करना और रस की रिकवरी को बढ़ाना है। मॉडल कोल्हू में एक दिन में 20 से 25 टन गन्ने की पेराई होती है, यह सामान्य कोल्हू से कई गुना है। जिला उद्योग केंद्र ने मॉडल कोल्हू लगाने के लिए जनता से आवेदन मांगे थे। वर्ष-2018-19 में 60 लोगों ने इसके लिए आवेदन किया। साक्षात्कार के बाद इन सभी के आवेदन बैंकों को भेजे गए। बैंकों ने केवल छह पर ही ऋण स्वीकृत किया. जिनके मॉडल कोल्हू स्वीकृत हुए इनमें नंगला बुजुर्ग का वकील और हिफजुर्रहमान, रतनपुरी का दीपक कुमार और अंकित कुमार, सदरूदीननगर का अजय कुमार और जानसठ का जय कुमार शामिल है। इनमें से केवल रतनपुरी के अमित ने ही कोल्हू में पेराई शुरू की गई। इसके बाद 2019-20 में 30 जून तक 49 आवेदन विभाग को आए। साक्षात्कार के बाद 41 के आवेदन बैंकों को भेज दिए गए। इनमें से केवल एक आवेदक का ही ऋण स्वीकृत हुआ है। विभाग के पास 16 आवेदन और हैं। इनका इसी माह साक्षात्कार होगा। इसके बाद बैकों को लोन के लिए भेज दिए जाएंगे। आश्चर्य की बात यह है कि योजना का जिस तरह प्रचार किया गया, जिले के 130 लोगों ने आवेदन भी किए। दो साल में केवल सात कोल्हू पर ऋण स्वीकृत होने और एक ही कोल्हू में गुड़ बनाने की प्रक्रिया शुरू हो पाने से समस्त व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। उपायुक्त उद्योग परमहंस मौर्य का कहना है कि योजना में समय से बैंकों से ऋण नहीं मिलने से समस्या खड़ी हो रही है। दूसरी तरफ, लीड बैंक मैनेजर अमित बुंदेला का कहना है कि ऐसे बहुत से आवेदक हैं, जिन्होंने आवेदन किया है, उन्हें पत्र भी भेजे गए, लेकिन वह कागजों की पूर्ति नहीं कर रहे हैं। ऋण लेने से ही मना कर दिया।
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मॉडल कोल्हू पर 25 प्रतिशत की छूट
मुजफ्फरनगर। उपायुक्त उद्योग परमहंस मौर्य का कहना है कि मॉडल कोल्हू पर 25 प्रतिशत की छूट है। मॉडल कोल्हू लगाने के लिए 23 लाख रुपये स्वीकृत हो रहा है। इसमें पांच लाख 75 हजार की सरकार छूट दे रही है। यह पैसा ऋण स्वीकृति के दो साल बाद कोल्हू संचालक के खाते में आ जाता है। इस योजना में जिले में एक कोल्हू में गुड़ बन रहा है, छह कोल्हू गुड़ बनाने की तैयारी में है।
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बिना सीजन के गुड़ महोत्सव
मुजफ्फरनगर। जिले में अब तक दो बार गुड़ महोत्सव का आयोजन किया गया। गुड़ उत्पादन के हिसाब से दोनों कार्यक्रम समय के अनुकूल नहीं रहे। श्रीराम कॉलेज में गुड़ महोत्सव का आयोजन उस समय हुआ, जब जिले के सभी कोल्हू बंद हो चुके थे। दूसरा आयोजन बीते माह गुड़ मंडी में तब हुआ जब कोल्हुओं में गुड़ बनना शुरू नहीं हो पाया था। दोनों आयोजन व्यावहारिक दृष्टि से गुड़ उत्पादों के हक में नहीं रहे।
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