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Muzaffarnagar News: साफ होने लगा बाणगंगा का पानी, ऑक्सीजन का स्तर भी बढ़ा
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क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने बुधवार को भी सैंपल लिए
रुड़की प्रशासन को भी पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया गया
केंद्रीय राज्यमंत्री ने भी कार्रवाई के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को भेजा पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना (मुजफ्फरनगर)। बाणगंगा में बह रहे प्रदूषित पानी में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ने लगा है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने पानी के सैंपल लिए हैं। रुड़की प्रशासन को भी पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया गया। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालिया ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को पत्र लिखकर इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि उत्तराखंड के अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। पानी की स्थिति में सुधार है। ऑक्सीजन का स्तर भी बढ़ने लगा है। बुधवार को विभागीय टीम ने बाणगंगा और सोलानी में पानी के सैंपल लिए। जांच रिपोर्ट के बृहस्पतिवार तक आने की संभावना है, जिसके बाद ऑक्सीजन की गुणवत्ता के विषय में जानकारी हो सकेगी। शुकतीर्थ में बुुधवार को पानी कुछ साफ दिखाई दिया है, हालांकि अभी श्रद्धालुओं ने स्नान शुरू नहीं किया।
ये था मामला
उत्तराखंड के लक्सर स्थित फैक्ट्रियों से इदरीशपुर नाले के माध्यम से आठ मार्च को केमिकल युक्त काला पानी छोड़ा गया था। पानी के कारण शुकतीर्थ गंगा घाट पर श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान करना बंद कर दिया था। जलीय जीव भी मृत मिले थे। बाणगंगा में ऑक्सीजन का स्तर बेहर निम्न स्तर तक पहुंच गया था। दोनों राज्यों की टीम ने जांच अभियान चलाया था।
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देरी से जांच कर फैक्टरी संचालकों को दिया मौका
मोरना। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि दोनों राज्यों की टीम ने देरी से जांच की, जिससे फैक्टरी संचालकों को बचने का मौका मिल जाता है। ग्रामीण निवासी धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि शुरुआत में जो काला पानी बाणगंगा में बहकर आया था, वह निकल चुका है। अब सिर्फ दिखावे की जांच हो रही है। चौधरी सुरेंद्र सिंह ने कहा कि देरी से जांच करना लापरवाही है। मोनू चौधरी और मोरना ब्लॉक ग्राम प्रधान संगठन अध्यक्ष रविंदर छोटा ने कहा कि निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। महामंडलेश्वर गोपाल दास महाराज ने कहा कि जांच के नाम पर भारतीय संस्कृति से खिलवाड़ कर रहे हैं। मां गंगा की आस्था पर चोट सरकार को हिला कर रख देगी। गंगा सेवा समिति सचिव महकार सिंह, मैनेजर देवेंद्र शर्मा, प्रेम शंकर मिश्रा, सोनू, पूर्व सैनिक मांगेराम, सुधीश फौजी ने जांच कर कार्रवाई की मांग उठाई।
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रुड़की प्रशासन को भी पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया गया
केंद्रीय राज्यमंत्री ने भी कार्रवाई के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को भेजा पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना (मुजफ्फरनगर)। बाणगंगा में बह रहे प्रदूषित पानी में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ने लगा है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने पानी के सैंपल लिए हैं। रुड़की प्रशासन को भी पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया गया। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालिया ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी को पत्र लिखकर इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि उत्तराखंड के अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। पानी की स्थिति में सुधार है। ऑक्सीजन का स्तर भी बढ़ने लगा है। बुधवार को विभागीय टीम ने बाणगंगा और सोलानी में पानी के सैंपल लिए। जांच रिपोर्ट के बृहस्पतिवार तक आने की संभावना है, जिसके बाद ऑक्सीजन की गुणवत्ता के विषय में जानकारी हो सकेगी। शुकतीर्थ में बुुधवार को पानी कुछ साफ दिखाई दिया है, हालांकि अभी श्रद्धालुओं ने स्नान शुरू नहीं किया।
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ये था मामला
उत्तराखंड के लक्सर स्थित फैक्ट्रियों से इदरीशपुर नाले के माध्यम से आठ मार्च को केमिकल युक्त काला पानी छोड़ा गया था। पानी के कारण शुकतीर्थ गंगा घाट पर श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान करना बंद कर दिया था। जलीय जीव भी मृत मिले थे। बाणगंगा में ऑक्सीजन का स्तर बेहर निम्न स्तर तक पहुंच गया था। दोनों राज्यों की टीम ने जांच अभियान चलाया था।
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देरी से जांच कर फैक्टरी संचालकों को दिया मौका
मोरना। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि दोनों राज्यों की टीम ने देरी से जांच की, जिससे फैक्टरी संचालकों को बचने का मौका मिल जाता है। ग्रामीण निवासी धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि शुरुआत में जो काला पानी बाणगंगा में बहकर आया था, वह निकल चुका है। अब सिर्फ दिखावे की जांच हो रही है। चौधरी सुरेंद्र सिंह ने कहा कि देरी से जांच करना लापरवाही है। मोनू चौधरी और मोरना ब्लॉक ग्राम प्रधान संगठन अध्यक्ष रविंदर छोटा ने कहा कि निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। महामंडलेश्वर गोपाल दास महाराज ने कहा कि जांच के नाम पर भारतीय संस्कृति से खिलवाड़ कर रहे हैं। मां गंगा की आस्था पर चोट सरकार को हिला कर रख देगी। गंगा सेवा समिति सचिव महकार सिंह, मैनेजर देवेंद्र शर्मा, प्रेम शंकर मिश्रा, सोनू, पूर्व सैनिक मांगेराम, सुधीश फौजी ने जांच कर कार्रवाई की मांग उठाई।