फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Ayushman scheme has gone away from the needy

जरूरतमंदों से ही दूर हो गई आयुष्मान योजना

Mon, 23 Sep 2019 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 23 Sep 2019 12:18 AM IST
विज्ञापन
Ayushman scheme has gone away from the needy
प्रमोद कुमार। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
जरूरतमंदों से ही दूर हो गई आयुष्मान योजना
विज्ञापन

मुजफ्फरनगर। जनपद में 69292 लोगों के नाम आयुष्मान भारत योजना के पात्रों की सूची में शामिल हैं। इनमें से लगभग 80 प्रतिशत के गोल्डन कार्ड बन चुके हैं। एक साल बाद भी योजना अनेक खामियों से घिरी है। दरअसल, जिस आधार पर पात्रों का चयन किया गया, वह किसी के गले नहीं उतरा। बड़ी तादाद में गरीब तबका ऐसा है, जिसे योजना में शामिल ही नहीं किया गया, जबकि संपन्न परिवारों को इसका लाभ दे दिया गया। यह बात शासन-प्रशासन स्तर से लेकर विभिन्न सार्वजनिक मंचों पर उठती रहती है, लेकिन इसमें बदलाव नहीं किया गया।
दोबारा सर्वे से भी नहीं हुआ समाधान
वर्ष 2011 की सर्वे सूची के अतिरिक्त प्रदेश सरकार ने योजना में छूटे पात्रों को शामिल करने के लिए दोबारा सर्वे कराया था। इस सर्वे के बाद 3380 लोगों के नाम शामिल किए गए, लेकिन इसमें भी पात्र शामिल नहीं हो सके। गुपचुप तरीके से सर्वे कर लोगों को योजना का लाभ दे दिया गया।
विज्ञापन

केस 1- गांव पीनना निवासी प्रमोद कुमार मजदूरी करके रोजी-रोटी कमाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, लेकिन इन्हें आयुष्मान योजना में शामिल नहीं किया गया। प्रमोद कहते हैं कि उन्हें योजना के बारे में पता लगा तो अस्पताल में संपर्क किया लेकिन सूची में नाम ही नहीं था।
विज्ञापन
विज्ञापन

केस 2- पीनना गांव की ही बबली का नाम आयुष्मान भारत योजना में शामिल नहीं हुआ। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इसके बावजूद उनका नाम सामाजिक आर्थिक सर्वे 2011 की सूची में नहीं था। इसलिए उन्हें आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं मिला।
केस 3 : नगर निवासी रिक्शा चालक किदवई नगर के मुस्तकीम की उम्र लगभग 50 साल है। पिछले दिनों बाइक से टक्कर लगने से हाथ में फ्रैक्चर हो गया था। उसके उपचार में कई हजार रुपये खर्च हो गए। कहते हैं कि आयुष्मान योजना में उनका नाम होता तो काफी लाभ होता।
केस 4 : रुड़की रोड पर फलों का ठेला लगाने वाले श्याम सिंह का भी नाम आयुष्मान योजना की पात्रता सूची से नदारद हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिला। श्याम सिंह कहते हैं कि उनके मोहल्ले में दो व्यक्तियों की शानदार कोठी होने के बावजूद उनके आयुष्मान कार्ड बने हैं। उन्हें न तो प्रधानमंत्री का पत्र मिला और न ही आयुष्मान का कार्ड बना।

इन्होंने कहा...
- योजना में पात्रों का चयन 2011 के आधार पर हुआ है। भारत सरकार से जो सूची पोर्टल पर अपलोड की थी, उन्हीं के गोल्डन कार्ड बनाए गए हैं - डा. पीएस मिश्रा, सीएमओ।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed