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जहां अपमान हो, वहां जाने से बचना चाहिए : किरण चंद
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पुरकाजी के प्राचीन शिव मंदिर में कथा सुनाते कथा व्यास
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर, पुरकाजी। कथा वाचक किरण चंद महाराज ने कथा सुनाते हुए बताया कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे हैं, वहां आपका व आपके इष्ट या आपके गुरु का अपमान तो नहीं होगा। अगर ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर जाना नहीं चाहिए। चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों ना हो।
कस्बे के मोहल्ला कानूनगोयन के प्राचीन शिव मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन उन्होंने सती चरित्र के प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि भगवान शिव की बात को नहीं मानने पर सती को अपने पिता के घर जाने से अपमानित होने के कारण स्वयं को अग्नि में स्वाह होना पड़ा था। कथा में उत्तानपाद के वंश में ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए समझाया कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया। जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की नितांत आवश्यकता रहती है। भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा को सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए। क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है। उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है।
यजमान कालू मित्तल ने परिवार सहित पूजन किया। इस दौरान संजय धीमान, धर्मेंद्र मित्तल, सागर कौरी, अर्जुन गुप्ता, अमित गर्ग, चंद्र भूषण, विशाल धीमान, सोनू मित्तल, मोनू, अंशुल, दीपू , गोविंद, आनन्द धीमान आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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कस्बे के मोहल्ला कानूनगोयन के प्राचीन शिव मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन उन्होंने सती चरित्र के प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि भगवान शिव की बात को नहीं मानने पर सती को अपने पिता के घर जाने से अपमानित होने के कारण स्वयं को अग्नि में स्वाह होना पड़ा था। कथा में उत्तानपाद के वंश में ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए समझाया कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया। जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की नितांत आवश्यकता रहती है। भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा को सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए। क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है। उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है।
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यजमान कालू मित्तल ने परिवार सहित पूजन किया। इस दौरान संजय धीमान, धर्मेंद्र मित्तल, सागर कौरी, अर्जुन गुप्ता, अमित गर्ग, चंद्र भूषण, विशाल धीमान, सोनू मित्तल, मोनू, अंशुल, दीपू , गोविंद, आनन्द धीमान आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।

पुरकाजी के प्राचीन शिव मंदिर में कथा सुनते श्रद्धालुजन- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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