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अपराजिता : छात्राओं एवं शिक्षिकाओं ने नारी सम्मान को अक्षुण्ण रखने की ली शपथ

Wed, 24 Apr 2019 12:39 AM IST
Deepak Kausik अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Published by: Deepak Kausik Updated Wed, 24 Apr 2019 12:39 AM IST
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Aparajita: essay competition in Swami Kalyan Dev Girl Inter College
अपराजिता अभियान के दौरान बनाए गए पोस्टर दिखाती छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला
भोपा में अमर उजाला के अनूठे अभियान अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स के तहत भोपा के स्वामी कल्याण देव बालिका इंटर कॉलेज में बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ तथा नारी सम्मान विषय पर निबंध व स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। छात्राओं ने स्लोगन के माध्यम से नारी गरिमा का बखान किया। साथ ही समाज में महिलाओं के प्रति हो रहे भेदभाव को निबंध के माध्यम से उकेरा। छात्राओं एवं शिक्षिकाओं ने महिला सम्मान को अक्षुण्ण रखने की शपथ ली।
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मंगलवार को कॉलेज परिसर में आयोजित प्रतियोगिता में 200 से अधिक छात्राओं ने प्रतिभाग किया। छात्राओं व कॉलेज की शिक्षिकाओं ने शपथपत्र भर नारी उत्थान के लिए आगे बढ़कर कार्य करने का संकल्प लिया। छात्राओं ने विभिन्न स्लोगन लिखकर बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का संदेश दिया। निबंध प्रतियोगिता में श्वेता, त्रिषा, राहिला ने और स्लोगन में सुगंध, पलक तथा साक्षी ने क्रमश: प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया।
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प्रधानाचार्या राजेश शिवाच ने कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, लेकिन अभी भी समाज का बहुत बड़ा तबका ऐसा है, जहां उनके साथ भेदभाव होता है। इस भेदभाव को जागरूकता से ही समाप्त किया जा सकता है। शिक्षिकाओं ने कल्पना चावला, इंदिरा गांधी, मदर टेरेसा, पीटी ऊषा, मेरीकॉम आदि के उदाहरण देते हुए बताया कि महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उन्होंने छात्राओं से अच्छी शिक्षा हासिल कर जीवन में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
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बेटी के शिक्षित व महिला के जागरूक होने पर समाज में व्याप्त बाल विवाह, दहेज, कन्या भ्रूण हत्या जैसी समस्याओं का समाधान संभव है। महिला इन बुराइयों का डटकर मुकाबला कर सकती हैं। इस कार्य के लिए महिलाओं को आगे आने की आवश्यकता है - राजेश शिवा, प्रधानाचार्या ।

बेटी की पढ़ाई में राष्ट्र व परिवार की तरक्की छिपी होती है। शिक्षा की ज्योति से जीवन के अंधेरे से छुटकारा मिलता है। इसलिए बेटियों को शिक्षित करें और आगे बढ़ाएं। अपराजिता अभियान से बेटियों में आत्म विश्वास बढ़ा है - प्रियंका राठी, शिक्षिका।

आज भी देश में बड़े-बड़े पोस्टर लगाकर बताना पड़ता है कि बेटी है तो कल है। बेटी नहीं तो कल भी नहीं है। जिस दिन समाज जागरूक हो जाएगा इस तरह के स्लोगनों की आवश्यकता नहीं होगी। महिलाओं के सम्मान के लिए ओछी मानसिकता से ऊपर उठने की आवश्यकता है - जीशू वर्मा, शिक्षिका।

शिक्षा व बेटी आज के समय में सबसे बड़ी आवश्यकता है। दोनों के बिना विकास संभव नही हैं। बेटी जिस घर में जन्म लेती है उसी परिवार का नहीं, बल्कि दो कुलों का उद्धार करती हैं। अमर उजाला की पहल बेटियों, महिलाओं को नई राह दिखा रही है - सुरेखा राठी, शिक्षिका।


महिलाएं अपनी ताकत को पहचान कर अपने भीतर जज्बा पैदा करें।  वे  किसी भी क्षेत्र में इतिहास रच सकती हैं। हमें शिक्षा और नारी सम्मान के लिए आगे आना होगा, यही समय की पुकार है - अनिता जैन, शिक्षिका।
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