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जिला अस्पताल में रोजाना आ रहे 150 से ज्यादा मरीज
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एंटी रेबीज दिवस : जिला अस्पताल में रोजाना आ रहे 150 से ज्यादा मरीज
मुजफ्फरनगर। कुत्ता, बंदर आदि जानवरों के काटने के लगभग डेढ़ सौ मरीज रोजाना अस्पताल में पहुंच रहे हैं। फिलहाल जिला अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन की उपलब्धता है। चिकित्सकों का कहना है कि कुत्ता के काटने पर 12 घंटे के अंदर एंटी रेबीज इंजेक्शन अवश्य लगवानी चाहिए।
चिकित्सकों के अनुसार रेबीज खतरनाक बीमारी है। समय पर इंजेक्शन न लेने और उपचार न कराने पर जानलेवा भी साबित हो सकता है। मोरना क्षेत्र में गांव फिरोजपुर में इसी महीने बंदर के काटने से रेबीज की बीमारी फैलने से ग्रामीण सोमपाल की पत्नी शिमला की मौत हो गई थी। जिला चिकित्सालय के नोडल अधिकारी डॉ उमंग सिंघल ने बताया कुत्ता, बंदर, नेवला, घोड़ा, बिल्ली और चूहे आदि जानवरों के काटने से मरीजों को रेबीज की जानलेवा बीमारी हो सकती है। इससे बचने के लिए इंजेक्शन लगवाने का कोर्स करना पड़ता है। पालतू कुत्ते के काटने से एक से तीन इंजेक्शन और पागल कुत्ते के काटने से चार का कोर्स करना पड़ता है। कुत्ता मर जाए तो पांच इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं।
जिला चिकित्सालय में एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगवाने के लिए रोजाना करीब 150 से अधिक मरीज आ रहे है। जिले की सभी सीएचसी पर एक महीने में चार इंजेक्शन सात दिन के अंतराल में लगते है। सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को इंजेक्शन लगते है। फार्मासिस्ट मनोज त्यागी एवं जोध सिंह ने बताया शासन से सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज का नियमित टीका लगता है। सीएचसी में एक दिन में करीब 35 से 40 पीड़ित पहुंचते है। लेकिन कोरोना काल में जिले में रेबीज की किल्लत के कारण मरीजों को एक साल परेशान होना पड़ा। गांव में पागल कुत्ता घुस जाए और वह लोगों को काटने लगे, तो 12 घंटे के भीतर एंटी रेबीज लगना जरूरी है।
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बाजार में महंगे रेट पर मिलते है एंटी रैबीज इंजेक्शन
कैमिस्ट संदीप कंसल और सुशील कुमार बताते है 290-320 रुपये के इंजेक्शन लगवाने पड़ रहे हैं। गांव और कस्बे शहरों में कुत्तों और बंदरों के प्रकोप के चलते ज्यादातर मरीज रहते हैं। चिकित्सालय में नियत दिनों के अलावा मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों से महंगी दरों पर इंजेक्शन लगवाने पड़ते है। सीएमओ डॉ एमएस फौजदार ने बताया कि जिला चिकित्सालय समेत सभी सीएचसी पर वर्तमान में पर्याप्त मात्रा में सभी जानवरों के एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध है।
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मुजफ्फरनगर। कुत्ता, बंदर आदि जानवरों के काटने के लगभग डेढ़ सौ मरीज रोजाना अस्पताल में पहुंच रहे हैं। फिलहाल जिला अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन की उपलब्धता है। चिकित्सकों का कहना है कि कुत्ता के काटने पर 12 घंटे के अंदर एंटी रेबीज इंजेक्शन अवश्य लगवानी चाहिए।
चिकित्सकों के अनुसार रेबीज खतरनाक बीमारी है। समय पर इंजेक्शन न लेने और उपचार न कराने पर जानलेवा भी साबित हो सकता है। मोरना क्षेत्र में गांव फिरोजपुर में इसी महीने बंदर के काटने से रेबीज की बीमारी फैलने से ग्रामीण सोमपाल की पत्नी शिमला की मौत हो गई थी। जिला चिकित्सालय के नोडल अधिकारी डॉ उमंग सिंघल ने बताया कुत्ता, बंदर, नेवला, घोड़ा, बिल्ली और चूहे आदि जानवरों के काटने से मरीजों को रेबीज की जानलेवा बीमारी हो सकती है। इससे बचने के लिए इंजेक्शन लगवाने का कोर्स करना पड़ता है। पालतू कुत्ते के काटने से एक से तीन इंजेक्शन और पागल कुत्ते के काटने से चार का कोर्स करना पड़ता है। कुत्ता मर जाए तो पांच इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं।
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जिला चिकित्सालय में एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगवाने के लिए रोजाना करीब 150 से अधिक मरीज आ रहे है। जिले की सभी सीएचसी पर एक महीने में चार इंजेक्शन सात दिन के अंतराल में लगते है। सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को इंजेक्शन लगते है। फार्मासिस्ट मनोज त्यागी एवं जोध सिंह ने बताया शासन से सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज का नियमित टीका लगता है। सीएचसी में एक दिन में करीब 35 से 40 पीड़ित पहुंचते है। लेकिन कोरोना काल में जिले में रेबीज की किल्लत के कारण मरीजों को एक साल परेशान होना पड़ा। गांव में पागल कुत्ता घुस जाए और वह लोगों को काटने लगे, तो 12 घंटे के भीतर एंटी रेबीज लगना जरूरी है।
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बाजार में महंगे रेट पर मिलते है एंटी रैबीज इंजेक्शन
कैमिस्ट संदीप कंसल और सुशील कुमार बताते है 290-320 रुपये के इंजेक्शन लगवाने पड़ रहे हैं। गांव और कस्बे शहरों में कुत्तों और बंदरों के प्रकोप के चलते ज्यादातर मरीज रहते हैं। चिकित्सालय में नियत दिनों के अलावा मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों से महंगी दरों पर इंजेक्शन लगवाने पड़ते है। सीएमओ डॉ एमएस फौजदार ने बताया कि जिला चिकित्सालय समेत सभी सीएचसी पर वर्तमान में पर्याप्त मात्रा में सभी जानवरों के एंटी रेबीज इंजेक्शन उपलब्ध है।