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आस्था का केंद्र है सिद्घपीठ प्राचीन डल्लू देवता मंदिर
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सिद्ध प्राचीन डल्लू देवता का मंदिर।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
आस्था का केंद्र है सिद्धपीठ प्राचीन डल्लू देवता मंदिर
मुजफ्फरनगर। शहर का सिद्ध पीठ प्राचीन डल्लू देवता मंदिर श्रद्धा भक्ति और आस्था का केंद्र है। लोगों ने अपने पूर्वजों की याद में मंदिर परिसर में सैकड़ों की संख्या में देव स्थान बनाए हैं। प्रत्येक रविवार को यहां दूध का भोग लगाया जाता है। हर उत्सव पर नागरिक यहां पूजा अर्चना को आते हैं।
शहर के पश्चिमी छोर पर शामली रोड पर खांजापुर में यह सिद्ध पीठ मंदिर स्थापित है। मंदिर के महंत अमृतदास के अनुसार फैजाबाद के स्वामी अंगद स्वरूप यहां मिट्टी के टीले पर आकर बसे थे। वर्ष 1935 में डल्लू नाग देवता यहां प्रकट हुए और स्वामी से कुछ कह कर यहां पर समाधि ले ली। स्वामी ने यहां पर उनका देव स्थान बनाया। वर्ष 1943 में डल्लू देवता मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। श्रद्धालुओं के सहयोग ये अब यहां भव्य मंदिर है। सिद्ध पीठ में शिव परिवार, राधा कृष्ण, संतोषी मां, हनुमान जी के भी मंदिर है। यहां पर श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की याद में सैकड़ों देव स्थान बनाए है। हर रविवार को यहां डल्लू देवता पर दूध का भोग लगाया था। हर शादी विवाह, होली, दीपावली आदि पर्व पर आसपास के लोग अपने देव स्थानों का पूजन करने आते है। नवदंपती भी देवता के दर्शन करने आते है। यह सिद्धपीठ श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना है।
77 साल से लगता आता है मेला
मुजफ्फरनगर। नाग पंचमी पर डल्लू देवता मंदिर में बीते 77 साल से मेला लगता आ रहा है। तीन दिवसीय मेले में दूरदराज से सैकड़ों श्रद्धालु आते हैं। मगर इस बार कोरोना के चलते मेला नहीं लगेगा। महंत ने बताया कि शनिवार यानि आज नाग पंचमी का पर्व है। इस बार कोरोना के चलते मेला नहीं लगेगा। बड़ा आयोजन भी नहीं होगा। सूक्ष्म रुप से नाग पंचमी पर्व मनाया जाएगा। सुबह यज्ञ हवन के बाद डल्लू देवता को दूध का भोग लगाया जाएगा।
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मुजफ्फरनगर। शहर का सिद्ध पीठ प्राचीन डल्लू देवता मंदिर श्रद्धा भक्ति और आस्था का केंद्र है। लोगों ने अपने पूर्वजों की याद में मंदिर परिसर में सैकड़ों की संख्या में देव स्थान बनाए हैं। प्रत्येक रविवार को यहां दूध का भोग लगाया जाता है। हर उत्सव पर नागरिक यहां पूजा अर्चना को आते हैं।
शहर के पश्चिमी छोर पर शामली रोड पर खांजापुर में यह सिद्ध पीठ मंदिर स्थापित है। मंदिर के महंत अमृतदास के अनुसार फैजाबाद के स्वामी अंगद स्वरूप यहां मिट्टी के टीले पर आकर बसे थे। वर्ष 1935 में डल्लू नाग देवता यहां प्रकट हुए और स्वामी से कुछ कह कर यहां पर समाधि ले ली। स्वामी ने यहां पर उनका देव स्थान बनाया। वर्ष 1943 में डल्लू देवता मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। श्रद्धालुओं के सहयोग ये अब यहां भव्य मंदिर है। सिद्ध पीठ में शिव परिवार, राधा कृष्ण, संतोषी मां, हनुमान जी के भी मंदिर है। यहां पर श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों की याद में सैकड़ों देव स्थान बनाए है। हर रविवार को यहां डल्लू देवता पर दूध का भोग लगाया था। हर शादी विवाह, होली, दीपावली आदि पर्व पर आसपास के लोग अपने देव स्थानों का पूजन करने आते है। नवदंपती भी देवता के दर्शन करने आते है। यह सिद्धपीठ श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना है।
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77 साल से लगता आता है मेला
मुजफ्फरनगर। नाग पंचमी पर डल्लू देवता मंदिर में बीते 77 साल से मेला लगता आ रहा है। तीन दिवसीय मेले में दूरदराज से सैकड़ों श्रद्धालु आते हैं। मगर इस बार कोरोना के चलते मेला नहीं लगेगा। महंत ने बताया कि शनिवार यानि आज नाग पंचमी का पर्व है। इस बार कोरोना के चलते मेला नहीं लगेगा। बड़ा आयोजन भी नहीं होगा। सूक्ष्म रुप से नाग पंचमी पर्व मनाया जाएगा। सुबह यज्ञ हवन के बाद डल्लू देवता को दूध का भोग लगाया जाएगा।
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