{"_id":"5e386d058ebc3e57e4317fc1","slug":"amit-rathi-defeated-cancer-with-liveliness-muzaffarnagar-news-mrt4670978160","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीवटता से अमित राठी ने हराया कैंसर को","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीवटता से अमित राठी ने हराया कैंसर को
विज्ञापन
शहर के साउथ सिविल लाईन्स निवासी अधिवक्ता अमित कुमार राठी। जो पहले कैंसर से पीड़ित थे।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
जीवटता से अमित राठी ने हराया कैंसर को
जगेंद्र उज्ज्वल
मुजफ्फरनगर। कैंसर का नाम सुनते ही जीवन खत्म होता नजर आने लगता है मगर ऐसे भी लोग हैं, जिन्होंने अपनी जीवटता से कैंसर को हरा दिया। ऐसे ही शख्स हैं अमित कुमार राठी एडवोकेट, जिन्होंने जीवन के प्रति सकारात्मक रुख अपनाते हुए कैंसर पर विजय पाई। जीभ का ऑपरेशन कराने के बाद वह दस साल से स्वस्थ्य हैं।
साउथ सिविल लाइंस निवासी एडवोकेट अमित कुमार राठी कैंसर पीड़ितों से मिल कर उन्हें जीने की कला बताते हैं, उनका उत्साहवर्धन करते है। अपने कैंसर के बारे में बता कर लोगों को इस रोग से लड़ऩे की प्रेरणा देते हैं। वह दस साल से कैंसर पीड़ितों को पॉजिटिव एटीट्यूड से कैंसर को मात देने को प्रेरित कर रहे हैं। अमित बताते है कि वर्ष 2009 में खाना खाते हुए दांतों के नीचे जीभ आ गई थी। कुछ समय बाद जीभ पर दाना सा बन गया। डॉक्टर को दिखाया तो जांच में पता चला कि जीभ में कैंसर है, जो प्रथम स्टेट पर है। बकौल अमित, उन्हें जब कैंसर का पता चला, तो जीवन में अंधेरा हो गया। लगा तक कि इस सुंदर दुनिया से विदा होने का समय आ गया। हिम्मत नहीं हारी, हौसला जुटाया, इलाज शुरू किया। दिल्ली एम्स, राजीव गांधी हॉस्टिपल आदि में इलाज हुआ। इलाज के दौरान अपनों का साथ, सकारात्मक सोच, जीने की इच्छा शक्ति, योग और प्राणायाम का ऐसा असर हुआ कि कैंसर को मात मिली और जीवटता की जीत हुई। वर्ष 2010 में मेरठ के आनंद अस्पताल में डॉ उमंग मित्तल ने ऑपरेशन कर जीभ को निकाल दिया। कीमोथैरेपी, रेडियाथैरेपी हुई। जीभ बिना रोटी, फल आदि नहीं खा सकते। लिक्विड ही लेते है। ऐसे में पत्नी पूनम, बेटी आंचल और बेटे आशीष राठी आदि अपनों का साथ मिला। अब दस साल हो गए। एक दशक से वह बिल्कुल ठीक है। योग, प्राणायाम रोजाना करते है। समय पर जांच भी करा रहे हैं। वह कैंसर से पूरी तरह से मुक्त हैं। अब वह कैंसर पीड़ितों को इस रोग से लड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
-----
अच्छे अधिवक्ताओं में है गिनती
मुजफ्फरनगर। अमित कुमार राठी की गिनती अच्छे अधिवक्ताओं में होती है। वह वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान कुमार के साथ वकालत करते है। ज्ञान कुमार बताते हैं कि जीभ नहीं होने के कारण उन्हें बोलने में परेशानी होती थी, मगर अमित राठी ने जीभ बिना बोलने का लगातार अभ्यास किया, आज वह कोर्ट में मुकदमों की अच्छी पैरवी कर लेते हैं।
विज्ञापन
---
विज्ञापन
जगेंद्र उज्ज्वल
मुजफ्फरनगर। कैंसर का नाम सुनते ही जीवन खत्म होता नजर आने लगता है मगर ऐसे भी लोग हैं, जिन्होंने अपनी जीवटता से कैंसर को हरा दिया। ऐसे ही शख्स हैं अमित कुमार राठी एडवोकेट, जिन्होंने जीवन के प्रति सकारात्मक रुख अपनाते हुए कैंसर पर विजय पाई। जीभ का ऑपरेशन कराने के बाद वह दस साल से स्वस्थ्य हैं।
साउथ सिविल लाइंस निवासी एडवोकेट अमित कुमार राठी कैंसर पीड़ितों से मिल कर उन्हें जीने की कला बताते हैं, उनका उत्साहवर्धन करते है। अपने कैंसर के बारे में बता कर लोगों को इस रोग से लड़ऩे की प्रेरणा देते हैं। वह दस साल से कैंसर पीड़ितों को पॉजिटिव एटीट्यूड से कैंसर को मात देने को प्रेरित कर रहे हैं। अमित बताते है कि वर्ष 2009 में खाना खाते हुए दांतों के नीचे जीभ आ गई थी। कुछ समय बाद जीभ पर दाना सा बन गया। डॉक्टर को दिखाया तो जांच में पता चला कि जीभ में कैंसर है, जो प्रथम स्टेट पर है। बकौल अमित, उन्हें जब कैंसर का पता चला, तो जीवन में अंधेरा हो गया। लगा तक कि इस सुंदर दुनिया से विदा होने का समय आ गया। हिम्मत नहीं हारी, हौसला जुटाया, इलाज शुरू किया। दिल्ली एम्स, राजीव गांधी हॉस्टिपल आदि में इलाज हुआ। इलाज के दौरान अपनों का साथ, सकारात्मक सोच, जीने की इच्छा शक्ति, योग और प्राणायाम का ऐसा असर हुआ कि कैंसर को मात मिली और जीवटता की जीत हुई। वर्ष 2010 में मेरठ के आनंद अस्पताल में डॉ उमंग मित्तल ने ऑपरेशन कर जीभ को निकाल दिया। कीमोथैरेपी, रेडियाथैरेपी हुई। जीभ बिना रोटी, फल आदि नहीं खा सकते। लिक्विड ही लेते है। ऐसे में पत्नी पूनम, बेटी आंचल और बेटे आशीष राठी आदि अपनों का साथ मिला। अब दस साल हो गए। एक दशक से वह बिल्कुल ठीक है। योग, प्राणायाम रोजाना करते है। समय पर जांच भी करा रहे हैं। वह कैंसर से पूरी तरह से मुक्त हैं। अब वह कैंसर पीड़ितों को इस रोग से लड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
विज्ञापन
-----
अच्छे अधिवक्ताओं में है गिनती
मुजफ्फरनगर। अमित कुमार राठी की गिनती अच्छे अधिवक्ताओं में होती है। वह वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान कुमार के साथ वकालत करते है। ज्ञान कुमार बताते हैं कि जीभ नहीं होने के कारण उन्हें बोलने में परेशानी होती थी, मगर अमित राठी ने जीभ बिना बोलने का लगातार अभ्यास किया, आज वह कोर्ट में मुकदमों की अच्छी पैरवी कर लेते हैं।
विज्ञापन
---