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ग्रामीणों की रिहाई के बाद ही हुआ अमरेश का अंतिम संस्कार
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 04 Apr 2018 12:11 AM IST
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अमरेश के अंतिम संस्कार में शामिल लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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हिरासत में लिए गए 15 ग्रामीणों को छोड़ने की मांग को लेकर हिंसा में मारे गए अमरेश के अंतिम संस्कार के दौरान जमकर हंगामा हो गया। करीब पांच घंटे की जद्दोजहद के बाद प्रशासन ने ग्रामीणों को छोड़ने के लिए हामी भरी। इसके बाद, गमगीन माहौल में अमरेश की अंत्येष्टि की गई। सुरक्षा के मद्देनजर कई थानों की फोर्स गांव में पैनी नजर बनाए रखी। बाहरी भीड़ को रोकने के लिए गादला के रास्तों की नाकेबंदी की गई थी।
सोमवार को दलितों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुए बवाल में भोपा क्षेत्र के गांव गादला निवासी अमरेश पुत्र सुरेश की मौत हो गई थी। इस घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण जिला चिकित्सालय पहुंच गए थे। इस दौरान उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई में जुटी पुलिस ने गादला के 15 ग्रामीणों को हिरासत में ले लिया था।
पोस्टमार्टम के बाद सुबह छह बजे अमरेश का शव गांव में पहुंचते ही कोहराम मच गया। आसपास के कई गांव के लोग भी गादला पहुंच गए थे। भीड़ को देख कई थानों की फोर्स और पीएसी गांव में लगा दी गई। एडीएम प्रशासन हरीशचंद्र ने हालात को देखते हुए गादला के संपर्क मार्गों की नाकेबंदी करा दी। ग्रामीणों की मांग थी कि हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने के बाद ही अमरेश का अंतिम संस्कार हो गया।
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इस दौरान भीड़ ने पुलिस प्रशासन के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। सभी प्रदर्शनकारी ग्रामीणों की रिहाई की मांग को लेकर अड़ गए। एडीएम और एसडीएम जानसठ गजल भारद्वाज ने डीएम राजीव शर्मा को स्थिति से अवगत कराया। आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। हिरासत में लिए गए सभी ग्रामीणों को छोड़ने के बाद ही अमरेश की अंत्येष्टि हो सकी।
पुलिस सुरक्षा के बीच शव यात्रा गांव के बाहर पहुंची, जहां दलित संगठनों के कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में दाह संस्कार हुआ। इस दौरान एसपी देहात अजय सहदेव, सीओ खतौली डॉ राजीव कुमार, सीओ भोपा मोहम्मद रिजवान सहित कई थाना प्रभारी मौजूद रहे।
उधर, नाकेबंदी की वजह से जब मृतक अमरेश के रिश्तेदार गांव में नहीं पहुंचे, तो ग्रामीणों ने आक्रोश जताया। इसके बाद पुलिस ने रिश्तेदारों को गांव तक पहुंचने दिया। ग्रामीणों ने एडीएम प्रशासन हरीश चंद्र से मृतक के परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा दिलवाने, मृतका आश्रित के परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिलाने, उपद्रव में निर्दोषों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने आदि की मांग रखी।
कई संगठनों ने जताया दुख
भोपा। अमरेश की अंतिम यात्रा में विभिन्न संगठनों के लोग शामिल हुए। रविदास आश्रम के सत्यानंद महाराज, प्रधान अशोक, जगपाल सिंह, दारा सिंह, विनोद कुमार, अनिल, घनश्याम त्यागी, राजीव कुमार, अब्दुल रहमान, आनन्द, पाल्लू, सतीश, नेत्रपाल, ओमवीर आदि मौजूद रहे।
पुलिस की गोली से मरा मेरा बेटा
भोपा। मृतक के पिता सुरेश ने बताया कि उसका बेटा अमरेश सोमवार को शहर में मजदूरी करने गया था। विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा चलाई गई गोली से उसके बेटे की मौत हुई है। अमरेश की मौत से उसका परिवार टूट गया है। परिवार के सदस्यों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा है। अमरेश के मित्र भी उसकी मौत पर दुख जताया है। उसके मित्रों का कहना है कि वह क्रिकेट का अच्छा खिलाड़ी होने के साथ टीम का कप्तान भी था। उसके नेतृत्व में गादला ने कई ट्रॉफी जीती थी।
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सोमवार को दलितों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुए बवाल में भोपा क्षेत्र के गांव गादला निवासी अमरेश पुत्र सुरेश की मौत हो गई थी। इस घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण जिला चिकित्सालय पहुंच गए थे। इस दौरान उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई में जुटी पुलिस ने गादला के 15 ग्रामीणों को हिरासत में ले लिया था।
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पोस्टमार्टम के बाद सुबह छह बजे अमरेश का शव गांव में पहुंचते ही कोहराम मच गया। आसपास के कई गांव के लोग भी गादला पहुंच गए थे। भीड़ को देख कई थानों की फोर्स और पीएसी गांव में लगा दी गई। एडीएम प्रशासन हरीशचंद्र ने हालात को देखते हुए गादला के संपर्क मार्गों की नाकेबंदी करा दी। ग्रामीणों की मांग थी कि हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने के बाद ही अमरेश का अंतिम संस्कार हो गया।
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इस दौरान भीड़ ने पुलिस प्रशासन के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। सभी प्रदर्शनकारी ग्रामीणों की रिहाई की मांग को लेकर अड़ गए। एडीएम और एसडीएम जानसठ गजल भारद्वाज ने डीएम राजीव शर्मा को स्थिति से अवगत कराया। आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। हिरासत में लिए गए सभी ग्रामीणों को छोड़ने के बाद ही अमरेश की अंत्येष्टि हो सकी।
पुलिस सुरक्षा के बीच शव यात्रा गांव के बाहर पहुंची, जहां दलित संगठनों के कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में दाह संस्कार हुआ। इस दौरान एसपी देहात अजय सहदेव, सीओ खतौली डॉ राजीव कुमार, सीओ भोपा मोहम्मद रिजवान सहित कई थाना प्रभारी मौजूद रहे।
उधर, नाकेबंदी की वजह से जब मृतक अमरेश के रिश्तेदार गांव में नहीं पहुंचे, तो ग्रामीणों ने आक्रोश जताया। इसके बाद पुलिस ने रिश्तेदारों को गांव तक पहुंचने दिया। ग्रामीणों ने एडीएम प्रशासन हरीश चंद्र से मृतक के परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा दिलवाने, मृतका आश्रित के परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिलाने, उपद्रव में निर्दोषों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने आदि की मांग रखी।
कई संगठनों ने जताया दुख
भोपा। अमरेश की अंतिम यात्रा में विभिन्न संगठनों के लोग शामिल हुए। रविदास आश्रम के सत्यानंद महाराज, प्रधान अशोक, जगपाल सिंह, दारा सिंह, विनोद कुमार, अनिल, घनश्याम त्यागी, राजीव कुमार, अब्दुल रहमान, आनन्द, पाल्लू, सतीश, नेत्रपाल, ओमवीर आदि मौजूद रहे।
पुलिस की गोली से मरा मेरा बेटा
भोपा। मृतक के पिता सुरेश ने बताया कि उसका बेटा अमरेश सोमवार को शहर में मजदूरी करने गया था। विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा चलाई गई गोली से उसके बेटे की मौत हुई है। अमरेश की मौत से उसका परिवार टूट गया है। परिवार के सदस्यों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा है। अमरेश के मित्र भी उसकी मौत पर दुख जताया है। उसके मित्रों का कहना है कि वह क्रिकेट का अच्छा खिलाड़ी होने के साथ टीम का कप्तान भी था। उसके नेतृत्व में गादला ने कई ट्रॉफी जीती थी।