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शुरू में झिझके, अब खुशी-खुशी पहुंच रहे स्कूल

Sun, 03 Apr 2022 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 03 Apr 2022 11:54 PM IST
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Amar Ujala Campaign: Initially hesitant, now happily reaching schools
परिषदीय विद्यरलय में पढाई करते छात्र। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर। दो साल तक घरों में रहकर ही पढ़ाई करने वाले बच्चों में स्कूलों को लेकर उत्साह है। शुरू में झिझक के बाद अब बच्चे अच्छी संख्या में स्कूल पहुंच रहे हैं। स्कूलों में बच्चों को लेकर उत्साह का माहौल बनाया जा रहा है।
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कोरोना महामारी ने बच्चों का स्कूल का माहौल ही छीन लिया था। दो साल बाद अब स्कूलों में बच्चों ने फिर से आना शुरू किया है। लंबे समय बाद स्कूल खुलने पर कुछ दिन तो बच्चों में झिझक सी बनी रही। उनका प्रतिदिन स्कूल पहुंचने का तारतम्य ही टूट गया। अब धीरे-धीरे स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बनना शुरू हो रहा है। स्कूलों में सुंदर वातावरण तैयार किया गया है। परिषदीय स्कूलों में जहां दीवारों पर मन भावन पेंटिंग हुई हैं, वहीं टाईल्स से स्कूल सजे हैं। स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए नई बेंच आ गई है।
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सीबीएसई और मान्यता प्राप्त स्कूल भी बच्चों को लेकर अपने आपको अपडेट करने में लगे हैं। ऐसा वातावरण बनाया जा रहा है कि बच्चों को स्कूल आकर अच्छा लगे। घर पर सही तरीके से पढ़ाई नहीं हो पाने के कारण विद्यार्थियों में उत्साह भी देखने को मिल रहा है। दो साल बाद स्कूल खुलने पर बच्चों को लिखने में दिक्कत आ रही है। बीएसए मायाराम का कहना है कि परिषदीय स्कूलों में तेजी से बच्चों की संख्या बढ़ रही है। बच्चों को स्कूल में लिखने का अभ्यास कराया जा रहा है।
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धीरे-धीरे पटरी पर आ रहे बच्चे
पूर्वी प्राथमिक पाठशाला की शिक्षिका निखत का कहना है कि दो साल बाद स्कूलों में पढ़ाई शुरू हुई, तो बच्चों में काफी झिझक रही। शुरू में बहुत कम आए, अब संख्या बढ़ गई है। धीरे-धीरे बच्चों का पढ़ाई का माहौल वापिस लौट रहा है। स्कूलों में भी बच्चों का उत्साहवर्धन कर रहे हैं।

लिखने का करा रहे अभ्यास
शिक्षिका शहनाज का कहना है कि दो साल में बच्चों का ध्यान पढ़ाई से हटा है। उनकी लिखने की प्रेक्टिस छूट गई है। बच्चा थोड़ी देर लिखता है तो उसका हाथ दुखने लगता है। हम अब स्कूल में लगातार प्रेक्टिस करा रहे है। कुछ दिन में पहले जैसी स्थिति में आ जाएंगे।
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