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अमर उजाला अभियान स्वाथ्य : कोरोना ने बदल दी बच्चों की दिनचर्या, आए ये बड़े बदलाव

Fri, 01 Apr 2022 11:42 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Fri, 01 Apr 2022 11:42 AM IST
सार

कोरोना के दो साल में बच्चों की पूरी दिनचर्या बदल गई। नियमित पढ़ना-लिखना छूट गया है। स्कूल खुलने के बाद भी स्कूलों में बच्चों की पूरी संख्या नहीं है। दोबारा शिक्षा का माहौल बनाना शिक्षण संस्थानों के लिए चुनौती बन गया है।

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Amar Ujala Campaign: Corona changed the routine of children
अमर उजाला अभियान स्वास्थ्य - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना के दो साल में बच्चों की पूरी दिनचर्या बदल गई। नियमित पढ़ना-लिखना छूट गया है। स्कूल खुलने के बाद भी स्कूलों में बच्चों की पूरी संख्या नहीं है। दोबारा शिक्षा का माहौल बनाना शिक्षण संस्थानों के लिए चुनौती बन गया है।
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दो साल तक कोरोना महामारी के चलते छात्र-छात्रा स्कूलों से दूर क्या रहे, उनकी पूरी दिनचर्या बदल गई है। सुबह उठकर स्कूल जाने की आदत छूट गई है। थोड़ी-थोडी देर में खाना मांगते हैं। कुर्सी, मेज पर बैठने का अभ्यास छूट गया है। यही कारण है कि स्कूल खुलने के बाद भी बच्चों की संख्या कम ही है।
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दो साल में आए गैप को पूरा करना शिक्षण संस्थानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ऑन लाईन ने बच्चो को आलसी बना दिया है। लड़के और लड़कियों दोनो की उपस्थिति घटी है। स्कूल ड्राप आउट करने वाले बच्चों की संख्या बढी है। प्रत्येक स्कूल में दस से 15 प्रतिशत बच्चों ने स्कूल छोड़ा है। आर्थिक परेशानी के चलते कुछ लोगों ने महंगी फीस के चलते पब्लिक स्कूलों से नाम कटवाकर सरकारी में दर्ज करा दिया। सुनकर सीखने की आदत छूट गई है।
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बच्चों को पटरी पर लाने की कवायद
शारदेन स्कूल के संचालक विश्वरतन का कहना है कि कोरोना के बाद ऑफ लाइन क्लास शुरू होने पर बच्चों की मनोदशा एकदम अलग नजर आई। न तो बच्चे मेज और कुर्सी पर नियमित बैठ पा रहे हैं और न ही पढ़ाई पर ध्यान केंद्रीत कर पा रहे हैं। हमने शुरू में बच्चों की खेल प्रतियोगिता कराकर उन्हें जोड़ने का काम किया। बच्चों में कंसर्टेशन की कमी आई है, इसे दूर किया जा रहा है। पटरी पर आने में कुछ समय लगेगा।


नर्सरी, एलकेजी के बच्चे नहीं आए
किड्जी स्कूल नई मंडी की संचालक चारू भारद्वाज का कहना है कि कोरोना ने बच्चों का पूरा जीवन चक्र बदल दिया है। कोरोना के दौरान छोटे बच्चे स्कूलों में नहीं आए। बच्चों के सुबह उठने से लेकर सोने तक की दिनचर्या बदल गई। स्कूलों में अब दोबारा से माहौल बन रहा है। बच्चे पढ़ना, लिखना भूल गए है, अब इन्हें निरंतर अभ्यास कराना होगा।
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