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अमर उजाला अभियान : पैदा होते ही कुपोषण का शिकार हो रहे बच्चे
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मुजफ्फरनगर। जिले में पैदा होते ही बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। सरकार के तमाम प्रयास कुपोषण को रोकने में नाकाफी सिद्ध हो रहे हैं। जिले में इस समय 7903 बच्चे कुपोषित और 3589 अति कुपोषित हैं। जिन गांवों के आंगनबाड़ी केंद्रों को अफसरों ने गोद लिया हुआ है, उनमें भी कुपोषण का खात्मा नहीं हुआ।
कुपोषण की समस्या को रोकने के लिए सरकार ने आंगनबाड़ी के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार वितरण करने और शिशुओं का संतुलित आहार देने के लिए योजना चलाई हुई है। जिले में शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों की संख्या दो लाख 29 हजार 672 हैं। कुपोषित बच्चों की संख्या 7903 हैं, इनमें अति कुपोषित बच्चे 3589 हैं। अति कुपोषित बच्चों की संख्या 1191 और कुपोषित बच्चों की संख्या 2756 हैं। अति कुपोषित बच्चाें को 14 दिन अस्पताल में रखने की आवश्यकता होती है।
48 आंगनबाड़ी केंद्र लिए है गोद
जिले में 2274 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। जनता में जागरूकता को लेकर 24 आंगनबाड़ी केंद्रों को जिला स्तरीय अधिकारियों और 24 केंद्रों को जिले के जनप्रतिनिधियों ने गोद लिया हुआ है। इसके बावजूद कुपोषण का खात्मा नहीं हुआ।
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सितंबर माह में जागरूकता अभियान चलेगा
जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश गोंड ने बताया कि कुपोषण को लेकर समाज में जागरूकता की आवश्यकता है। विभाग एक से लेकर 30 सितंबर तक जागरूकता अभियान चला रहा है। राष्ट्रीय पोषण माह में प्रत्येक गांव में पोषण पंचायत का गठन होगा। 10 से 15 महिलाएं इसमें शामिल रहेगी। गांव स्तर पर स्वस्थ बालक-बालिका प्रतियोगिताएं होंगी। वजन सप्ताह का आयोजन होगा। अन्य विभागों के माध्यम से जन जागरूकता कार्यक्रम होंगे।
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कुपोषण की समस्या को रोकने के लिए सरकार ने आंगनबाड़ी के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार वितरण करने और शिशुओं का संतुलित आहार देने के लिए योजना चलाई हुई है। जिले में शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों की संख्या दो लाख 29 हजार 672 हैं। कुपोषित बच्चों की संख्या 7903 हैं, इनमें अति कुपोषित बच्चे 3589 हैं। अति कुपोषित बच्चों की संख्या 1191 और कुपोषित बच्चों की संख्या 2756 हैं। अति कुपोषित बच्चाें को 14 दिन अस्पताल में रखने की आवश्यकता होती है।
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48 आंगनबाड़ी केंद्र लिए है गोद
जिले में 2274 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। जनता में जागरूकता को लेकर 24 आंगनबाड़ी केंद्रों को जिला स्तरीय अधिकारियों और 24 केंद्रों को जिले के जनप्रतिनिधियों ने गोद लिया हुआ है। इसके बावजूद कुपोषण का खात्मा नहीं हुआ।
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सितंबर माह में जागरूकता अभियान चलेगा
जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश गोंड ने बताया कि कुपोषण को लेकर समाज में जागरूकता की आवश्यकता है। विभाग एक से लेकर 30 सितंबर तक जागरूकता अभियान चला रहा है। राष्ट्रीय पोषण माह में प्रत्येक गांव में पोषण पंचायत का गठन होगा। 10 से 15 महिलाएं इसमें शामिल रहेगी। गांव स्तर पर स्वस्थ बालक-बालिका प्रतियोगिताएं होंगी। वजन सप्ताह का आयोजन होगा। अन्य विभागों के माध्यम से जन जागरूकता कार्यक्रम होंगे।