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मुजफ्फरनगर जिले में हर महीने मिल रहे एड्स के 35 नए मरीज, स्वास्थ्य विभाग हैरान
Mon, 27 May 2019 12:15 AM IST
Deepak Kausik
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Published by: Deepak Kausik
Updated Mon, 27 May 2019 12:15 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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जनपद के युवा तेजी से एड्स जैसी भयावह बीमारी का शिकार हो रहे हैं। नए रोगी मिलने की रफ्तार चिंता का विषय है। प्रतिमाह औसतन 35 नए मरीजों को एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हो रही है। गंभीर बात यह है कि इनमें 90 प्रतिशत संख्या 20 से 30 वर्ष तक की आयु वर्ग की है। करीब 30 लाख की आबादी वाला मुजफ्फरनगर जनपद एड्स को लेकर लो-एंडमिक (कम प्रभावित) क्षेत्र माना जाता है। इसके बावजूद यहां 1590 एड्स रोगियों का उपचार चल रहा है।
यह तो वह संख्या है जिनमें बीमारी का पता लग गया, इससे भी बड़ा आंकड़ा ऐसे लोगों का होगा जो एड्स से संक्रमित तो हैं, लेकिन उन्होंने कभी जांच नहीं कराई। स्वामी कल्याणदेव जिला अस्पताल के फेसीलिटी इंटीग्रेटेड एंटी रिट्रोवायरल ट्रीटमेंट सेंटर (एफआईएआरटी) में एड्स के मरीजों की बढ़ती संख्या भयावह तस्वीर दिखाती है।
अप्रैल माह में 35 नए एड्स के रोगी चिह्नित किए गए, जबकि मई में अब तक 36 नए रोगियों का उपचार शुरू हो चुका है। इस माह के आखिर तक मरीजों की संख्या 40 तक पहुंचने का अंदेशा है। अहम बात यह है कि नए रोगियों में 20 से 30 वर्ष की आयु के युवा शामिल हैं। बढ़ती बीमारी पर स्वास्थ्य विभाग से लेकर समाजशास्त्री चिंता जता रहे हैं।
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असुरक्षित यौन संबंध प्रमुख वजह
एचआईवी की प्रमुख वजह असुरक्षित यौन संबंध हैं। एफआईएआरटी सेंटर के प्रभारी डॉक्टर वीके जौहरी बताते हैं कि 88 प्रतिशत मामलों में संक्रमण इसी कारण फैलता है। दूसरा बड़ा कारण नशे के इंजेक्शन लगाना है। इससे साफ हो जाता है कि एचआईवी का संक्रमण फैलने की सबसे बड़ी वजह नैतिक पतन ही है।
घर से दूर रहने वाले फैला रहे संक्रमण
एचआईवी पॉजिटिव मिले लोगों में ज्यादातर ट्रक चालक या वे लोग शामिल हैं जो अपने घरों से दूर रहते हैं। ये लोग अपने साथ एचआईवी का संक्रमण लेकर आते हैं और फिर यहां भी आकर फैलाते हैं।
मुफ्त मिलती है हजारों की दवा और जांच
एड्स कंट्रोल पर सरकार बड़ा बजट खर्च कर रही है। एचआईवी पॉजिटिव रोगियों को जिला अस्पताल से दवा और जांच मुफ्त है। बाजार से एक माह की दवा का खर्च करीब 4500 रुपये है। जबकि सीडी-4 जांच 1400 रुपये और वायरल लोड 6500 रुपये में होता है।
इन्होंने कहा...
नए एड्स रोगियों में 90 प्रतिशत 20 से 30 वर्ष की आयु के युवा हैं। प्रतिमाह औसतन 35 नए मरीज पंजीकृत हो रहे हैं। - डॉ. वीके जौहरी, प्रभारी, एफआईएआरटी सेंटर।
सांस्कृतिक मूल्यों का पालन ही एकमात्र बचाव
डीएवी डिग्री कॉलेज के समाजशास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. कलम सिंह युवाओं में बढ़ते एचआईवी संक्रमण पर चिंता जाहिर करते हैं। कहते हैं कि इससे बचने का एकमात्र तरीका सांस्कृतिक मूल्यों का पालन है। युवाओं में वैवाहिक जीवन और यौन संबंधों को अलग मानने की सोच तेजी से बढ़ी है। लिव इन जैसे मामले बढ़ रहे हैं। विभिन्न यूनिवर्सिटी के सर्वे में युवाओं ने विवाह पूर्व यौन संबंधों को स्वीकार है। यह चिंता का विषय है। युवाओं को इस दिशा में मार्गदर्शन देने की आवश्यकता है।
एचआईवी पॉजिटिव होने के कुछ प्रमुख लक्षण
- लगातार वजन का घटना एवं दस्त होना
- लगातार बुखार होना
- टीबी की बीमारी होना
- शरीर पर खाज, खुजली, त्वचा में संक्रमण होना
- यौन संचारित रोग (एसटीडी) या हर्पीज की बीमारी होना
- मुंह में छाले, जीभ पर फफूंदी आना
- गले में गांठ बनना
- गुर्दों तथा हृदय का संक्रमण
- दिमाग का संक्रमण
- श्वांस की बीमारी एवं निमोनिया
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यह तो वह संख्या है जिनमें बीमारी का पता लग गया, इससे भी बड़ा आंकड़ा ऐसे लोगों का होगा जो एड्स से संक्रमित तो हैं, लेकिन उन्होंने कभी जांच नहीं कराई। स्वामी कल्याणदेव जिला अस्पताल के फेसीलिटी इंटीग्रेटेड एंटी रिट्रोवायरल ट्रीटमेंट सेंटर (एफआईएआरटी) में एड्स के मरीजों की बढ़ती संख्या भयावह तस्वीर दिखाती है।
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अप्रैल माह में 35 नए एड्स के रोगी चिह्नित किए गए, जबकि मई में अब तक 36 नए रोगियों का उपचार शुरू हो चुका है। इस माह के आखिर तक मरीजों की संख्या 40 तक पहुंचने का अंदेशा है। अहम बात यह है कि नए रोगियों में 20 से 30 वर्ष की आयु के युवा शामिल हैं। बढ़ती बीमारी पर स्वास्थ्य विभाग से लेकर समाजशास्त्री चिंता जता रहे हैं।
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असुरक्षित यौन संबंध प्रमुख वजह
एचआईवी की प्रमुख वजह असुरक्षित यौन संबंध हैं। एफआईएआरटी सेंटर के प्रभारी डॉक्टर वीके जौहरी बताते हैं कि 88 प्रतिशत मामलों में संक्रमण इसी कारण फैलता है। दूसरा बड़ा कारण नशे के इंजेक्शन लगाना है। इससे साफ हो जाता है कि एचआईवी का संक्रमण फैलने की सबसे बड़ी वजह नैतिक पतन ही है।
घर से दूर रहने वाले फैला रहे संक्रमण
एचआईवी पॉजिटिव मिले लोगों में ज्यादातर ट्रक चालक या वे लोग शामिल हैं जो अपने घरों से दूर रहते हैं। ये लोग अपने साथ एचआईवी का संक्रमण लेकर आते हैं और फिर यहां भी आकर फैलाते हैं।
मुफ्त मिलती है हजारों की दवा और जांच
एड्स कंट्रोल पर सरकार बड़ा बजट खर्च कर रही है। एचआईवी पॉजिटिव रोगियों को जिला अस्पताल से दवा और जांच मुफ्त है। बाजार से एक माह की दवा का खर्च करीब 4500 रुपये है। जबकि सीडी-4 जांच 1400 रुपये और वायरल लोड 6500 रुपये में होता है।
इन्होंने कहा...
नए एड्स रोगियों में 90 प्रतिशत 20 से 30 वर्ष की आयु के युवा हैं। प्रतिमाह औसतन 35 नए मरीज पंजीकृत हो रहे हैं। - डॉ. वीके जौहरी, प्रभारी, एफआईएआरटी सेंटर।
सांस्कृतिक मूल्यों का पालन ही एकमात्र बचाव
डीएवी डिग्री कॉलेज के समाजशास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. कलम सिंह युवाओं में बढ़ते एचआईवी संक्रमण पर चिंता जाहिर करते हैं। कहते हैं कि इससे बचने का एकमात्र तरीका सांस्कृतिक मूल्यों का पालन है। युवाओं में वैवाहिक जीवन और यौन संबंधों को अलग मानने की सोच तेजी से बढ़ी है। लिव इन जैसे मामले बढ़ रहे हैं। विभिन्न यूनिवर्सिटी के सर्वे में युवाओं ने विवाह पूर्व यौन संबंधों को स्वीकार है। यह चिंता का विषय है। युवाओं को इस दिशा में मार्गदर्शन देने की आवश्यकता है।
एचआईवी पॉजिटिव होने के कुछ प्रमुख लक्षण
- लगातार वजन का घटना एवं दस्त होना
- लगातार बुखार होना
- टीबी की बीमारी होना
- शरीर पर खाज, खुजली, त्वचा में संक्रमण होना
- यौन संचारित रोग (एसटीडी) या हर्पीज की बीमारी होना
- मुंह में छाले, जीभ पर फफूंदी आना
- गले में गांठ बनना
- गुर्दों तथा हृदय का संक्रमण
- दिमाग का संक्रमण
- श्वांस की बीमारी एवं निमोनिया