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12 साल बाद 100 करोड़ के घोटाले का रिकार्ड खंगाल रही एसआईटी

Fri, 10 Sep 2021 11:56 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 10 Sep 2021 11:56 PM IST
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After 12 years, SIT is investigating the record of 100 crore scam
मुजफ्फरनगर। समाज कल्याण विभाग में 12 साल पहले उजागर हुए 100 करोड़ से अधिक के घोटाले की जांच एसआईटी ने शुरू कर दी है। विभाग से पूरा रिकार्ड गायब मिला है। बैंकों और ट्रेजरी के रिकार्ड से घोटालेबाजों तक पहुंचने की कवायद टीम कर रही है। एसआईटी के एसपी सहित छह सदस्य टीम रिकार्ड एकत्र करने में जुटे हैं।
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तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी रिंकू सिंह राही ने 2009 में विभाग में प्रतिपूर्ति शुल्क, छात्रवृत्ति, पेंशन आदि में 100 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले को उजागर किया था। घोटाला उजागर करने पर रिंकू सिंह राही पर 26 मार्च 2009 को उस समय जानलेवा हमला हुआ था, जब वह आफिसर्स कालोनी मेें बैडमिंटन खेल रहे थे। गोली लगने से उनकी एक आंख हमेशा के लिए चली गई, किसी तरह उनकी जान ही बच पाई। उनके भाई दिनेश राही ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में न्यायालय ने फरवरी 2021 को अशोक कश्यप सहायक लेखाकार समाज कल्याण विभाग, प्रहलाद, अमित छोकर, बाबी उर्फ पंकज को जानलेवा हमले का दोषी करार देते हुए दस-दस वर्ष का सश्रम कारावास और 20-20 हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनाई थी।
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फैसला आने पर रिंकू राही ने कहा था कि छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा करने पर उनपर हमला किया गया था, उसकी जांच गंभीरता से नहीं की गई। जांच कमेटियों ने उन्हें बयान देने के लिए भी नहीं बुलाया। सही से घोटाले की जांच होती तो यह 100 करोड़ रुपये भी अधिक का घोटाला निकलता। इसके बाद शासन ने इसकी जांच के लिए एसआईटी का गठन किया, जो नये सिरे से जांच कर रही है।
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शुक्रवार को पहुंची एसआईटी
एसआईटी में एसपी देवरंजन वर्मा एक इंस्पेक्टर, दो सब इंस्पेक्टर और तीन सिपाही के साथ जांच करने के लिए लखनऊ से मुजफ्फरनगर पहुंचे। उन्होंने जिला समाज कल्याण विभाग कार्यालय में जाकर समाज कल्याण अधिकारी जीआर प्रजापति से मुलाकात की और जांच पड़ताल शुरू कर दी। विभाग से मांगा गया समस्त रिकार्ड गायब मिला है। समाज कल्याण अधिकारी जीआर प्रजापति ने बताया कि एसआईटी 2004 से लेकर 2009 तक समस्त योजनाओं में जो पैसा आया उसकी जांच कर रही है। इसमें प्रतिपूर्ति शुल्क, छात्रवृत्ति, पेंशन, शादी विवाह योजना, मृत आश्रित योजना में आया पैसा मुख्य है। टीम ने ट्रेजरी से पूरा रिकार्ड मांग लिया है, जिसमें कुछ रिकार्ड मिल भी गया है, बाकी एक दो दिन में मिल जाएगा। इसी के साथ जिन बैंकों को पैसा जारी हुआ उनसे भी रिकार्ड लिया जा रहा है। जल्द ही घोटाले का पूरा सच सामने होगा।
17 फर्जी खातों की होगी जांच
समाज कल्याण अधिकारी के नाम से 17 फर्जी खाते खोलकर उनमें सरकारी पैसा डाला गया था। इन खातों के जरिये ही घोटाला किया जाता रहा है। तत्कालीन डीएम अमृत अभिजान ने इन खातों में मिले 22 करोड़ रुपये शासन को वापिस भी कराए थे। इन्हीं खातों में 100 करोड़ का लेन देन हुआ है। इन सभी खातों की भी जांच होगी।

जांच की होती रही खानापूर्ति
घोटाले की जांच को शासन स्तर से पहले भी दो बार जांच कमेटी गठित करते हुए जांच कराई गई। पहली कमेटी मेरठ की संयुक्त निदेशक समाज कल्याण अलका टंडन की अध्यक्षता में बनाई गई, इस समिति ने 20 करोड़ रुपये का घोटाला होने की रिपोर्ट शासन को दी थी। उनकी रिपोर्ट से शासन संतुष्ट नहीं हुआ और इसके बाद मेरठ मंडल के तत्कालीन मंडलायुक्त मृत्युंजय नारायण की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई। इस कमेटी ने दो वर्षों तक जांच की और अपनी रिपोर्ट में 50 करोड़ रुपये का घोटाला मानते हुए शासन को रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। अब इस घोटाले के लिए तीसरी बार जांच की जा रही है।
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