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Muzaffarnagar News: अधिवक्ता बोले, व्यावहारिक नहीं सांयकालीन न्यायालयों की अवधारणा

Sun, 06 Apr 2025 02:01 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 06 Apr 2025 02:01 AM IST
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Advocate said, the concept of evening courts is not practical
-जिला बार एवं सिविल बार एसोसिएशन ने विधि मंत्रालय को विरोध में भेजा सुझाव
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। जिला बार एवं सिविल बार एसोसिएशन ने विधि मंत्रालय, उच्च न्यायालय के सायंकालीन न्यायालयों की अवधारणा पर एतराज जताया है। इस प्रस्ताव को अव्यावहारिक बताते हुए बार संघों ने जनपद न्यायाधीश डॉ. अजय कुमार के माध्यम से संबंधित मंत्रालय एवं महानिबंधक को पत्र भेजा है।
जिला बार अध्यक्ष ठाकुर कंवरपाल सिंह, महासचिव चंद्रवीर निर्वाल, सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, महासचिव ने अधिवक्ताओें से विचार विर्मश के बाद सांयकालीन न्यायालय शुरू करने की अवधारणा को व्यावहारिक नहीं मानते हुए महानिबंधक उच्च न्यायलय एवं केंद्रीय विधि, न्याय मंत्रालय को पत्रों का जवाब दे दिया।
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अधिवक्ताओं का कहना है कि मुकदमों का बोझ कम करने के लिए विधि मंत्रालय की पहल स्वागत योग्य है, मगर जिला न्यायालयों में इसे लागू किया जाना सही नहीं है। मुजफ्फरनगर करीब 50 किलोमीटर की परिधि में फैला विस्तृत क्षेत्र है। बड़ी संख्या में टाइपिस्ट, स्टांप वैंडर्स, वादकारी और अधिवक्ता सुदूर गांवों से यहां आते हैं। आजीविका कमाकर शाम को घर लौटते हैं।
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माकूल नहीं गांवों की परिवहन व्यवस्था
सभी को वापस गांवों को लौटने के लिए सूर्यास्त से पहले सार्वजनिक परिवहन यातायात व्यवस्था ठीक है, लेकिन रात्रि के समय घर लौटने का कोई जरिया नहीं है। रात्रि के समय आवागमन सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील एवं असुरक्षित है। दरअसल, खेतों और जंगलों में वन्य जीव स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं। सांध्यकालीन न्यायालय के लिए न्यायिक स्टाफ एवं सेवानिवृत्त के बाद नियक्ति किए जाने का प्रावधान है, लेकिन न्यायालयों में कार्य करने वाले अधिवक्ताओं और उनके स्टाफ के लिए 12 घंटे काम करना व्यायहारिक नहीं है।

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कचहरी प्रांगण में दिनदहाड़े हो चुकी गोलीबारी
बार संघ ने यह तथ्य रखा कि मुजफ्फरनगर कचहरी में आपराधिक घटनाएं होना आम है। न्यायालय परिसर में कई बड़ी घटना हो चुकी हैं। अपराधियों के बीच गोलीबारी की घटनाएं चर्चाओं में रही हैं। यहां तो न्यायिक कार्रवाई के दौरान कटघरे में खड़े अभियुक्त विक्की त्यागी की गोली मारकर हत्या हो चुकी है। इन कारणों से सांध्यकालीन न्यायालयों का संचालन कानून व्यवस्था के लिए भयावह हालत हो सकता है।
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