{"_id":"49-45859","slug":"Muzaffar-nagar-45859-49","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘कसाब को था गुनाह का पछतावा’ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘कसाब को था गुनाह का पछतावा’
Muzaffar nagar
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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मुजफ्फरनगर। मुंबई में 26 नवंबर 2008 का भयावह मंजर। सैकड़ों बेगुनाहों की मौत। अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में छाया पाक आतंकियों का नापाक इरादा, आज भी आम जनमानस को झकझोर जाता है। इस हमले में जिंदा पकड़े गए आतंकी कसाब को फांसी देकर भारत ने आतंकी संगठनों को कड़ा जवाब दिया है। मुंबई हमले के बाद एटीएस के चीफ बनाए गए मुजफ्फरनगर के केपी रघुवंशी ने ‘अमर उजाला’ के साथ मुंबई से फोन पर हुई बातचीत में कहा कि कसाब से उनका कई बार सामना हुआ, हर बार उन्हें लगा कि कसाब को अपने किए पर पछतावा है। वर्तमान में ठाणे के पुलिस कमिश्नर रघुवंशी कहते हैं कि फांसी शहीदों के लिए श्रद्धांजलि है।
सवाल: कसाब की फांसी पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
जवाब : अहम यह है कि मुंबई अटैक इंटरनेशनल सुर्खियों में था। आतंकी गतिविधियों पर भारत के नजरिए को लेकर जो सवाल खड़े किए जाते हैं, कसाब की फांसी उनका जवाब है। भारत आतंक के विरुद्ध सख्त है, यह संदेश पूरी दुनिया के लिए है।
सवाल : फांसी में देरी की वजह क्या मानते हैं ?
जवाब : कानूनी प्रक्रिया लंबी है, वैसे भी आतंकी पड़ोसी मुल्क से दाखिल हुए। अंतरराष्ट्रीय कानूनों का दायरा भी था। ट्रायल के बाद आतंकी कसाब को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। फिर सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति के पास दया याचिका। मुंबई पुलिस ने सही समय पर सही कदम उठाए। फांसी में देरी नहीं कही जा सकती।
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सवाल: फांसी की प्रक्रिया इतनी गोपनीय क्यों रखी गई?
जवाब: यह देश की सुरक्षा से जुड़ा बेहद अहम मुद्दा है। गोपनीय कार्रवाई के संदर्भ में कुछ कहना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
सवाल: कसाब से कितनी बार मिलना हुआ?
जवाब: एटीएस चीफ हेमंत करकरे की शहादत के बाद मुझे एटीएस का चार्ज दिया गया था। पूरे ऑपरेशन के खुलासे और पाक में बैठे आतंकियों के मंसूबों को जानने के लिए कसाब से कई दफा पूछताछ की। मुझे लगा कि कसाब के पास पछताने के अलावा कुछ नहीं बचा था। उसकी मनोदशा से जाहिर हुआ कि खुद उसे आतंक के जाल में फंसने का अहसास देर से हुआ, लेकिन कसाब का गुनाह माफ करने लायक नहीं था।
सवाल: फांसी से आतंक पर कितना अंकुश लगने की संभावनाएं हैं?
जवाब: कसाब का जिंदा पकड़ा जाना मुंबई पुलिस की शहादत और बहादुरी से संभव हो पाया था। निश्चित तौर पर कसाब की फांसी से आतंकी गतिविधियों में लिप्त लोगों के हौसले पस्त होंगे।
ऐसे हैं कृषि पाल रघुवंशी
मुजफ्फरनगर। शाहपुर क्षेत्र के गांव कुटबी के किसान ताराचंद की गुदड़ी के लाल हैं कृषि पाल रघुवंशी, लेकिन मुंबई ने उन्हें केपी रघुवंशी की पहचान दी है। वह वर्ष 1980 में आईपीएस के लिए चयनित हुए। हालांकि 1979 में उनका आईएफएस के लिए चयन हो गया था। धुन के पक्के किसान पुत्र ने बड़ौत के जनता वैदिक डिग्री कॉलेज में एक वर्ष तक बतौर शिक्षक भी कार्य किया। उनके बड़े भाई रामपाल सिंह बताते हैं कि गांव की प्राइमरी पाठशाला में पढ़ने के बाद केपी ने मैनपुरी और बड़ौत में पढ़ाई की। चौधरी छोटूराम डिग्री कॉलेज मुजफ्फरनगर से बीएससी के बाद उन्होंने एमएससी और एमफिल भी उत्तीर्ण किया।
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सवाल: कसाब की फांसी पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
जवाब : अहम यह है कि मुंबई अटैक इंटरनेशनल सुर्खियों में था। आतंकी गतिविधियों पर भारत के नजरिए को लेकर जो सवाल खड़े किए जाते हैं, कसाब की फांसी उनका जवाब है। भारत आतंक के विरुद्ध सख्त है, यह संदेश पूरी दुनिया के लिए है।
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सवाल : फांसी में देरी की वजह क्या मानते हैं ?
जवाब : कानूनी प्रक्रिया लंबी है, वैसे भी आतंकी पड़ोसी मुल्क से दाखिल हुए। अंतरराष्ट्रीय कानूनों का दायरा भी था। ट्रायल के बाद आतंकी कसाब को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। फिर सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति के पास दया याचिका। मुंबई पुलिस ने सही समय पर सही कदम उठाए। फांसी में देरी नहीं कही जा सकती।
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सवाल: फांसी की प्रक्रिया इतनी गोपनीय क्यों रखी गई?
जवाब: यह देश की सुरक्षा से जुड़ा बेहद अहम मुद्दा है। गोपनीय कार्रवाई के संदर्भ में कुछ कहना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
सवाल: कसाब से कितनी बार मिलना हुआ?
जवाब: एटीएस चीफ हेमंत करकरे की शहादत के बाद मुझे एटीएस का चार्ज दिया गया था। पूरे ऑपरेशन के खुलासे और पाक में बैठे आतंकियों के मंसूबों को जानने के लिए कसाब से कई दफा पूछताछ की। मुझे लगा कि कसाब के पास पछताने के अलावा कुछ नहीं बचा था। उसकी मनोदशा से जाहिर हुआ कि खुद उसे आतंक के जाल में फंसने का अहसास देर से हुआ, लेकिन कसाब का गुनाह माफ करने लायक नहीं था।
सवाल: फांसी से आतंक पर कितना अंकुश लगने की संभावनाएं हैं?
जवाब: कसाब का जिंदा पकड़ा जाना मुंबई पुलिस की शहादत और बहादुरी से संभव हो पाया था। निश्चित तौर पर कसाब की फांसी से आतंकी गतिविधियों में लिप्त लोगों के हौसले पस्त होंगे।
ऐसे हैं कृषि पाल रघुवंशी
मुजफ्फरनगर। शाहपुर क्षेत्र के गांव कुटबी के किसान ताराचंद की गुदड़ी के लाल हैं कृषि पाल रघुवंशी, लेकिन मुंबई ने उन्हें केपी रघुवंशी की पहचान दी है। वह वर्ष 1980 में आईपीएस के लिए चयनित हुए। हालांकि 1979 में उनका आईएफएस के लिए चयन हो गया था। धुन के पक्के किसान पुत्र ने बड़ौत के जनता वैदिक डिग्री कॉलेज में एक वर्ष तक बतौर शिक्षक भी कार्य किया। उनके बड़े भाई रामपाल सिंह बताते हैं कि गांव की प्राइमरी पाठशाला में पढ़ने के बाद केपी ने मैनपुरी और बड़ौत में पढ़ाई की। चौधरी छोटूराम डिग्री कॉलेज मुजफ्फरनगर से बीएससी के बाद उन्होंने एमएससी और एमफिल भी उत्तीर्ण किया।