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पशुगणना में चार जिलों को मिले प्रशस्ति पत्र
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मुजफ्फरनगर। देश भर में चल रही पशु गणना की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 15 मार्च कर दिया गया है। प्रदेश के अधिकांश जिलों में पशु गणना का कार्य काफी पिछड़ा हुआ है, जबकि मुजफ्फरनगर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चार जनपदों में बेहतर काम हुआ है। शासन ने इन जनपदों के मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों को प्रशस्तिपत्र जारी किया गया है।
प्रत्येक पांच वर्ष में होने वाली पशु गणना का कार्य अब तक तहसील का स्टाफ करता था। तकनीकी रूप से जानकारी नहीं होने के वह पशुओं की नस्ल का ब्यौरा नहीं दे पाते थे। इस बार भारत सरकार ने यह काम पशुपालन विभाग को ही सौंपा है। पशु गणना के लिए टैबलेट दिए गए हैं। पूरा डाटा मौके से ही ऑनलाइन फीड किया जाना है। जिले में 106 गणनाकार, 25 सुपरवाइजर तथा चार स्क्रूटनी अफसर लगे हैं। पशुओं की संख्या के साथ ही उनकी नस्ल भी दर्ज की जा रही है। इससे पता लग जाएगा कि किस क्षेत्र में किस नस्ल की गाय, भैंस, बकरियां या अन्य पशुओं का पालन किया जाता है। आंकड़े सामने आने के बाद पशुओं के नस्ल सुधार कार्यक्रम में आसानी होगी। पशु गणना का कार्य 28 फरवरी तक पूरा होना था, लेकिन प्रदेश के अधिकांश जिलों की स्थिति बेहद खराब है, जबकि मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मेरठ जनपद में अच्छा काम हुआ है। इन जिलों में 70 प्रतिशत से भी ज्यादा काम हो गया है। अब शासन ने पशु गणना की तिथि बढ़ाकर 15 मार्च कर दी है। अच्छा कार्य करने वाले जिलों को प्रशस्तिपत्र दिया गया है जबकि खराब काम वालों को चेतावनी जारी की गई है।
पशु गणना का कार्य 70 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है। यह 28 फरवरी तक पूरा होना था, लेकिन अब तिथि बढ़ाकर 15 मार्च कर दी गई है। - डा. हुकम सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
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प्रत्येक पांच वर्ष में होने वाली पशु गणना का कार्य अब तक तहसील का स्टाफ करता था। तकनीकी रूप से जानकारी नहीं होने के वह पशुओं की नस्ल का ब्यौरा नहीं दे पाते थे। इस बार भारत सरकार ने यह काम पशुपालन विभाग को ही सौंपा है। पशु गणना के लिए टैबलेट दिए गए हैं। पूरा डाटा मौके से ही ऑनलाइन फीड किया जाना है। जिले में 106 गणनाकार, 25 सुपरवाइजर तथा चार स्क्रूटनी अफसर लगे हैं। पशुओं की संख्या के साथ ही उनकी नस्ल भी दर्ज की जा रही है। इससे पता लग जाएगा कि किस क्षेत्र में किस नस्ल की गाय, भैंस, बकरियां या अन्य पशुओं का पालन किया जाता है। आंकड़े सामने आने के बाद पशुओं के नस्ल सुधार कार्यक्रम में आसानी होगी। पशु गणना का कार्य 28 फरवरी तक पूरा होना था, लेकिन प्रदेश के अधिकांश जिलों की स्थिति बेहद खराब है, जबकि मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मेरठ जनपद में अच्छा काम हुआ है। इन जिलों में 70 प्रतिशत से भी ज्यादा काम हो गया है। अब शासन ने पशु गणना की तिथि बढ़ाकर 15 मार्च कर दी है। अच्छा कार्य करने वाले जिलों को प्रशस्तिपत्र दिया गया है जबकि खराब काम वालों को चेतावनी जारी की गई है।
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पशु गणना का कार्य 70 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है। यह 28 फरवरी तक पूरा होना था, लेकिन अब तिथि बढ़ाकर 15 मार्च कर दी गई है। - डा. हुकम सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी।
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