{"_id":"5acfab9d4f1c1b4b3e8b4dac","slug":"91523559325-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"%पदक जीत कर देश का मान बढ़ाऐगी बेटी%","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
%पदक जीत कर देश का मान बढ़ाऐगी बेटी%
Updated Fri, 13 Apr 2018 12:25 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पदक जीत कर देश का मान बढ़ाएगी बेटी
पुरबालियान (मुजफ्फरनगर)।
आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट पर पुरबालियान गांव की निगाहें टिकी है। 21 वें राष्ट्रमंडल खेलों में शुक्रवार (आज) कुश्ती स्पर्धा में दिव्या काकरान अपनी किस्मत आजमाएगी। बेटी की कामयाबी के लिए माता-पिता र्ने ईश्वर से प्रार्थना की। ग्रामीणों ने कहा कि दिव्या पदक जीत कर देश का मान बढ़ाएगी। खास बात यह है कि कॉमनवेल्थ गेम्स में दिव्या उत्तर प्रदेश की अकेली महिला पहलवान है।
मंसूरपुर क्षेत्र के गांव पुरबालियान की हर गली और आंगन में गोल्ड कोस्ट की चर्चा है। पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग ले रही दिव्या काकरान से हर कोई पदक की उम्मीद लगाए हुए हैं। वह 68 किलोग्राम भार वर्ग की फ्री स्टाइल स्पर्धा में शुक्रवार को अपने मुकाबले में खेलेगी। गांव के अखाड़े में दिव्या ने अपने दादा राजेंद्र और पिता सूरज से पहलवानी के गुर सीखे हैं। बेटी के पदक के लिए घर में पूजा हो रही है। छोटे से घर के आंगन में ग्रामीण मौजूद हैं, जो उसकी सफलता के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं। मां संयोगिता कहती है कि हाल ही में हरियाणा में बेटी ने भारत केसरी दंगल जीता है। ऐसे ही प्रदर्शन की उससे आशा है। देवी-देवताओं की पूजा करने दिल्ली से गांव आए हैं। दिव्या ने कॉमनवेल्थ के लिए खूब मेहनत की है। वह पूरी ताकत और समर्पण से देश के लिए खेलेगी। सूरज पहलवान ने बताया कि उसकी बेटी नाइजीरिया, कनाडा, आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड की पहलवानों से टक्कर होगी। बेटी आक्रामक तकनीक से अपने मुकाबले खेलेगी। प्रतिद्वंद्वी महिला पहलवानों के कुश्ती लड़ने के तरीके की उसने बारीकी से वीडियो देखी है। बुजुर्ग विक्रम सिंह और अजब सिंह कहते हैं कि दिव्या गांव के नाम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकाएगी। ग्रामीण महेंद्र सिंह, जयद्रथ, प्रहलाद सिंह ने कहा कि कम संसाधनों में बेटी ने कुश्ती में बेमिसाल प्रदर्शन किया है। पूरे गांव को उससे सुनहरी उम्मीदें है। मोहनवीर, कलीराम सैन, रुढे सिंह, राकेश, धर्मवीर, मांगेराम, राजवीर का कहना है कि दिव्या गोल्ड कोस्ट में पदक जीती तो गांव में दीपावली मनेगी। कुश्ती में उसकी कामयाबी ने खेलों में बेटियों का रुझान बढ़ा दिया है।
हनुमान चालीसा लेकर आस्ट्रेलिया गई बेटी
मुजफ्फरनगर। पहलवान दिव्या के आराध्य देव वीर हनुमान है। उसकी मां संयोगिता बतातीं है कि बेटी कॉमनवेल्थ गेम्स में हनुमान चालीसा लेकर गई है। कुश्ती से पहले वह बजरंग बली का पाठ करती है। फिल्मों में उसकी रुचि नहीं। सचिन तेंदुलकर पसंदीदा खिलाड़ी रहे हैं। कुश्ती में अलका तोमर, गीता फोगाट चहेती महिला पहलवान है। बेटी को राजमा, कढ़ी, छोले-चावल पसंद है। प्रतिमाह उसकी डाइट पर करीब 20 हजार रुपये का खर्च आता है। दिव्या के प्रशिक्षण के कारण दिल्ली के गोकलपुर में किराए पर रहते हैं। हालांकि लोनी के बैंथला फाटक के पास 50 गज का घर है। उन्हें अपनी बेटी पर नाज है।
विज्ञापन
दूध के लिए नहीं थे पैसे, ग्लूकोज पीकर लड़ी कुश्ती
मुजफ्फरनगर। रेसलिंग में दिव्या के सपनों को उड़ान देने के लिए उनके परिवार ने मुश्किलों और आर्थिक तंगी को झेला है। पिता सूरज पहलवान बताते है कि कोई खेती-बाड़ी नहीं है। बेटी को दूध और घी तक मुहैया कराना पहाड़ जैसा था। उसकी मां घर पर कुश्ती के कपड़े सिलती थी और मैं अखाड़ों के बाहर बेचता था। जब कभी दूध नहीं मिलता था तो दिव्या ग्लूकोज पीकर अखाड़े में उतरती थी। दिव्या को कॉमनवेल्थ में पदक मिला, तो उसमें ओलंपिक तक पहुंचने का जोश जागेगा। कुश्ती में भारतीय पहलवानों में बबीता फोगाट, किरण, सुशील कुमार, राहुल अवारे के पदकों से उनकी उम्मीदें बढ़ गई है।
विज्ञापन
पुरबालियान (मुजफ्फरनगर)।
आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट पर पुरबालियान गांव की निगाहें टिकी है। 21 वें राष्ट्रमंडल खेलों में शुक्रवार (आज) कुश्ती स्पर्धा में दिव्या काकरान अपनी किस्मत आजमाएगी। बेटी की कामयाबी के लिए माता-पिता र्ने ईश्वर से प्रार्थना की। ग्रामीणों ने कहा कि दिव्या पदक जीत कर देश का मान बढ़ाएगी। खास बात यह है कि कॉमनवेल्थ गेम्स में दिव्या उत्तर प्रदेश की अकेली महिला पहलवान है।
मंसूरपुर क्षेत्र के गांव पुरबालियान की हर गली और आंगन में गोल्ड कोस्ट की चर्चा है। पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग ले रही दिव्या काकरान से हर कोई पदक की उम्मीद लगाए हुए हैं। वह 68 किलोग्राम भार वर्ग की फ्री स्टाइल स्पर्धा में शुक्रवार को अपने मुकाबले में खेलेगी। गांव के अखाड़े में दिव्या ने अपने दादा राजेंद्र और पिता सूरज से पहलवानी के गुर सीखे हैं। बेटी के पदक के लिए घर में पूजा हो रही है। छोटे से घर के आंगन में ग्रामीण मौजूद हैं, जो उसकी सफलता के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं। मां संयोगिता कहती है कि हाल ही में हरियाणा में बेटी ने भारत केसरी दंगल जीता है। ऐसे ही प्रदर्शन की उससे आशा है। देवी-देवताओं की पूजा करने दिल्ली से गांव आए हैं। दिव्या ने कॉमनवेल्थ के लिए खूब मेहनत की है। वह पूरी ताकत और समर्पण से देश के लिए खेलेगी। सूरज पहलवान ने बताया कि उसकी बेटी नाइजीरिया, कनाडा, आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड की पहलवानों से टक्कर होगी। बेटी आक्रामक तकनीक से अपने मुकाबले खेलेगी। प्रतिद्वंद्वी महिला पहलवानों के कुश्ती लड़ने के तरीके की उसने बारीकी से वीडियो देखी है। बुजुर्ग विक्रम सिंह और अजब सिंह कहते हैं कि दिव्या गांव के नाम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकाएगी। ग्रामीण महेंद्र सिंह, जयद्रथ, प्रहलाद सिंह ने कहा कि कम संसाधनों में बेटी ने कुश्ती में बेमिसाल प्रदर्शन किया है। पूरे गांव को उससे सुनहरी उम्मीदें है। मोहनवीर, कलीराम सैन, रुढे सिंह, राकेश, धर्मवीर, मांगेराम, राजवीर का कहना है कि दिव्या गोल्ड कोस्ट में पदक जीती तो गांव में दीपावली मनेगी। कुश्ती में उसकी कामयाबी ने खेलों में बेटियों का रुझान बढ़ा दिया है।
विज्ञापन
हनुमान चालीसा लेकर आस्ट्रेलिया गई बेटी
मुजफ्फरनगर। पहलवान दिव्या के आराध्य देव वीर हनुमान है। उसकी मां संयोगिता बतातीं है कि बेटी कॉमनवेल्थ गेम्स में हनुमान चालीसा लेकर गई है। कुश्ती से पहले वह बजरंग बली का पाठ करती है। फिल्मों में उसकी रुचि नहीं। सचिन तेंदुलकर पसंदीदा खिलाड़ी रहे हैं। कुश्ती में अलका तोमर, गीता फोगाट चहेती महिला पहलवान है। बेटी को राजमा, कढ़ी, छोले-चावल पसंद है। प्रतिमाह उसकी डाइट पर करीब 20 हजार रुपये का खर्च आता है। दिव्या के प्रशिक्षण के कारण दिल्ली के गोकलपुर में किराए पर रहते हैं। हालांकि लोनी के बैंथला फाटक के पास 50 गज का घर है। उन्हें अपनी बेटी पर नाज है।
विज्ञापन
दूध के लिए नहीं थे पैसे, ग्लूकोज पीकर लड़ी कुश्ती
मुजफ्फरनगर। रेसलिंग में दिव्या के सपनों को उड़ान देने के लिए उनके परिवार ने मुश्किलों और आर्थिक तंगी को झेला है। पिता सूरज पहलवान बताते है कि कोई खेती-बाड़ी नहीं है। बेटी को दूध और घी तक मुहैया कराना पहाड़ जैसा था। उसकी मां घर पर कुश्ती के कपड़े सिलती थी और मैं अखाड़ों के बाहर बेचता था। जब कभी दूध नहीं मिलता था तो दिव्या ग्लूकोज पीकर अखाड़े में उतरती थी। दिव्या को कॉमनवेल्थ में पदक मिला, तो उसमें ओलंपिक तक पहुंचने का जोश जागेगा। कुश्ती में भारतीय पहलवानों में बबीता फोगाट, किरण, सुशील कुमार, राहुल अवारे के पदकों से उनकी उम्मीदें बढ़ गई है।