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मेले हमारी संस्कृति की पहचान: महाराज
Updated Thu, 02 Nov 2017 01:26 AM IST
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मेले हमारी संस्कृति की पहचान
मोरना (मुजफ्फरनगर)। शुक्रताल गुरुकुल संस्कृत महाविद्यालय के वार्षिकोत्सव में मुख्य अतिथि स्वामी आनंद वेश ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि मेले हमारी संस्कृति की पहचान हैं। यह भारतीय संस्कृति की पहचान है, जिन्हें संजोकर रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। विश्व ने भी भारतीय संस्कृति से अभिभूत होकर अपनाना शुरू कर दिया है। इस मौके पर विश्व में शांति स्थापना के लिए आयोजित यज्ञ में आहुति देकर प्रार्थना की गई।
गुरुकुल आश्रम स्थित यज्ञशाला में गंगा कार्तिक मेले को लेकर आयोजित वार्षिकोत्सव पर श्यामवेद पारायण महायज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य यज्ञवीर सिंह ने विद्यार्थियों के साथ उच्च स्वर में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच आहुति दिलाई और विश्व में शांति स्थापना को लेकर विशेष प्रार्थना की। मुख्य यज्ञमान श्रीकृष्ण आर्य, चौधरी हरवीर सिंह और डॉ सहदेव मलिक ने मुख्य भूमिका निभाई। वहीं, इस मौके पर स्वामी सत्यवेश, पूर्व प्राचार्य इंद्रपाल राणा और प्राचार्य प्रेमशंकर मिश्रा ने अपने विचार प्रकट कर विद्यार्थियों को देशहित की भावना के लिए प्रेरित किया। इस दौरान ब्रह्मचारियों ने देशभक्ति के गीतों को सुनाया।
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मोरना (मुजफ्फरनगर)। शुक्रताल गुरुकुल संस्कृत महाविद्यालय के वार्षिकोत्सव में मुख्य अतिथि स्वामी आनंद वेश ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि मेले हमारी संस्कृति की पहचान हैं। यह भारतीय संस्कृति की पहचान है, जिन्हें संजोकर रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। विश्व ने भी भारतीय संस्कृति से अभिभूत होकर अपनाना शुरू कर दिया है। इस मौके पर विश्व में शांति स्थापना के लिए आयोजित यज्ञ में आहुति देकर प्रार्थना की गई।
गुरुकुल आश्रम स्थित यज्ञशाला में गंगा कार्तिक मेले को लेकर आयोजित वार्षिकोत्सव पर श्यामवेद पारायण महायज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य यज्ञवीर सिंह ने विद्यार्थियों के साथ उच्च स्वर में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच आहुति दिलाई और विश्व में शांति स्थापना को लेकर विशेष प्रार्थना की। मुख्य यज्ञमान श्रीकृष्ण आर्य, चौधरी हरवीर सिंह और डॉ सहदेव मलिक ने मुख्य भूमिका निभाई। वहीं, इस मौके पर स्वामी सत्यवेश, पूर्व प्राचार्य इंद्रपाल राणा और प्राचार्य प्रेमशंकर मिश्रा ने अपने विचार प्रकट कर विद्यार्थियों को देशहित की भावना के लिए प्रेरित किया। इस दौरान ब्रह्मचारियों ने देशभक्ति के गीतों को सुनाया।
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