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जिले में 8372 बच्चे अति कुपोषित मिले       

Tue, 02 May 2017 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Tue, 02 May 2017 11:48 PM IST
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8372 children in the district get very malnourished
Malnutrition child - फोटो : Getty Images
स्वास्थ्य विभाग की तमाम प्रयासों के बावजूद नौनिहाल कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। बाल विकास विभाग की ओर से कराए जा रहे सर्वे में 31 मार्च तक जिले में 8372 बच्चे अतिकुपोषित मिले हैं। इनके उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग को कुपोषित बच्चों की सूची भेज दी गई है।      
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बाल विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन हो रहा है, जिसमें पांच साल तक के बच्चों को पुष्टाहार दिया जाता है। साथ ही गर्भवती महिलाएं और जच्चाओं को भी अतिरिक्त पुष्टाहार दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने कुपोषण का शिकार बच्चों को चिह्नित करने की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सौंपी है।
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जिले के नौ ब्लॉकों और शहर और खतौली नगर क्षेत्र के कुल ग्यारह सेक्टर बनाए गए हैं। इनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों का ग्राफ के अनुसार वजन कर उन्हें चिह्नित करती हैं। जिले में पांच साल तक के चिह्नित किए गए कुल बच्चों 263635 में से 31 मार्च तक 250174 का वजन कराया गया, जिनमें से 8372 बच्चे अतिकुपोषित पाए और 34604 बच्चे कुपोषित मिले।
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जबकि सितंबर 2016 तक अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 7941 थी, जबकि बीते छह माह में बढ़ कर 8372 हो गई है। जिला कार्यक्रम अधिकारी माला सोनकर ने बताया कि मार्च माह तक कराए गए सर्वे में 8372 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए है। इसकी सूची सीएमओ के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग को भेज दी है। इन अतिकुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंच कर उपचार करेगी।      

पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराए जाएंगे बच्चे      
मुजफ्फरनगर। सर्वे के दौरान चिह्नित किए गए अतिकुपोषित बच्चों का उपचार स्वास्थ्य विभाग करता है। इन बच्चों में जिनकी हालत अधिक खराब है, ऐसे बच्चों को जिला चिकित्सालय में बनाए गए पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया जाता है। इस केंद्र में अधिकतम दस ही बच्चे भर्ती हो सकते है।      


गत वर्ष के सापेक्ष अभी तक संख्या है कम      
मुजफ्फरनगर। डीपीओ माला सोनकर ने बताया कि गत वर्ष के साक्षेप इस वर्ष अभी तक कुपोषित बच्चों की संख्या कम है। गत  वर्ष मार्च माह तक सर्वे के दौरान जिले में करीब 11 हजार बच्चे कुपोषण का शिकार मिले थे।      
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