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श्रीमद् भागवत से ही पापों से मुक्ति संभव
Updated Tue, 28 Aug 2018 12:33 AM IST
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श्रीमद्भागवत से ही पापों से मुक्ति संभव
शाहपुर। कथा वाचक पंडित त्रिलोकीनाथ शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा के माध्यम से मानव जीवन में पापों की मुक्ति संभव है। उन्होंने कहा कि इस घोर कलियुग में भागवत कथा के माध्यम से ही मुक्ति मिलती है। कसबे के सिद्धपीठ मां गोकुल देवी मंदिर प्रांगण में मंदिर समिति द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हुआ। कलश यात्रा के साथ कथा का शुभारंभ हुआ।
कथावाचक पंडित त्रिलोकीनाथ शास्त्री ने कहा कि जब जब धरती पर धर्म की हानि हुई, तब-तब पाप और अत्याचार बढ़े हैं। ऐसे में वेदों एवं ग्रंथों की मधुर रचनाओं के माध्यम से पुन:धर्म की पताका फहरती है । आज मानव निजी स्वार्थ के लिए अपना ईमान खो कर पूजा पाठ व हवन सामग्री में भी घटिया सामग्री का प्रयोग करने लगा है। यह घोर पाप नहीं तो क्या है। उन्होंने कहा कि घोर कलियुग में प्रभु की प्राप्ति का एक मात्र साधन भागवत कथा का श्रवण करना है। मानव जीवन में पापों से मुक्ति पाने का एवं मोक्ष पाने का भागवत कथा एक मात्र साधन है । कथा के यजमान हरिओम पुंडीर सपत्नीक रहे। पूजन पंडित रामप्रसाद शर्मा ने कराया। संचालन मंदिर समिति के महामंत्री अनुज अग्रवाल ने किया। विजय गोयल,उमेश गोयल, सुरेंद्र जिंदल, अजय बंसल आदि का सहयोग रहा।
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शाहपुर। कथा वाचक पंडित त्रिलोकीनाथ शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा के माध्यम से मानव जीवन में पापों की मुक्ति संभव है। उन्होंने कहा कि इस घोर कलियुग में भागवत कथा के माध्यम से ही मुक्ति मिलती है। कसबे के सिद्धपीठ मां गोकुल देवी मंदिर प्रांगण में मंदिर समिति द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हुआ। कलश यात्रा के साथ कथा का शुभारंभ हुआ।
कथावाचक पंडित त्रिलोकीनाथ शास्त्री ने कहा कि जब जब धरती पर धर्म की हानि हुई, तब-तब पाप और अत्याचार बढ़े हैं। ऐसे में वेदों एवं ग्रंथों की मधुर रचनाओं के माध्यम से पुन:धर्म की पताका फहरती है । आज मानव निजी स्वार्थ के लिए अपना ईमान खो कर पूजा पाठ व हवन सामग्री में भी घटिया सामग्री का प्रयोग करने लगा है। यह घोर पाप नहीं तो क्या है। उन्होंने कहा कि घोर कलियुग में प्रभु की प्राप्ति का एक मात्र साधन भागवत कथा का श्रवण करना है। मानव जीवन में पापों से मुक्ति पाने का एवं मोक्ष पाने का भागवत कथा एक मात्र साधन है । कथा के यजमान हरिओम पुंडीर सपत्नीक रहे। पूजन पंडित रामप्रसाद शर्मा ने कराया। संचालन मंदिर समिति के महामंत्री अनुज अग्रवाल ने किया। विजय गोयल,उमेश गोयल, सुरेंद्र जिंदल, अजय बंसल आदि का सहयोग रहा।
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