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दूध में मिला रहे पानी, मावा में फैट कम मिला
Updated Thu, 15 Mar 2018 12:09 AM IST
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मुजफ्फरनगर।
जिले में दूध का कारोबार करने वाले पानी मिलाकर बेच रहे हैं, जबकि मावा भी सेहत के हिसाब से ठीक नहीं है। दूध और मावा के नमूनों की जो रिपोर्ट आई है। वह काफी चौंकाने वाली है। दूध में पानी की मात्रा अधिक पाई गई है और मावा सॉलिड फैट कम निकला है। 40 से अधिक लोगों के खिलाफ एडीएम प्रशासन की कोर्ट में वाद दायर किए गए हैं।
खाद्य पदार्थों में मिलावट कर जनता की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। कुछ रुपयों के लालच में व्यापारी, कारोबारी मनमाने तरीके से खाद्य पदार्थ बेच रहे हैं। एफएसडीए ने शहर और देहात क्षेत्र में कार्रवाई कर 121 दूध के नमूने लेकर जांच के लिए भिजवाए। जांच होने के बाद लैब से रिपोर्ट विभाग पहुंची है। 121 में 101 नमूनों की रिपोर्ट आई है। इनमें दूध के 47 सैंपल फेल मिले हैं। लैब में जांच की गई तो दूध में पानी की मात्रा अधिक पाई गई। इससे दूध की क्वालिटी और उसके फैट (चिकनाई) पर प्रभाव मिला है। इसके अलावा खोया-मावा के करीब 54 नमूने भेजे गए, इनमें से लैब ने 40 की रिपोर्ट भेजी है। 40 में से 27 खोया-मावा के सैंपल फेल मिले हैं। मावा में सॉलिड फैट नहीं पाया गया है। इसके चलते मावेे को पौष्टिक नहीं माना गया।
दूध के 29 और मावे के 18 वाद डाले गए
मिलावट कर खाद्य एक्ट से धोखाधड़ी के आरोप में स्थानीय अधिकारियों ने दूध और मावा विक्रेताओं के विरुद्ध वाद डाले हैं। दूध के करीब 29 मामलों को कोर्ट में रखा गया है, जबकि खोया-मावा के करीब 18 मामलों में विभाग ने कार्रवाई कर एडीएम प्रशासन की कोर्ट में केस दायर किए हैं। एडीएम प्रशासन ने खाद्य पदार्थों में मिलावट करने को गंभीर माना है। इसके चलते दूध के 12 मामलों में सुनवाई कर एक लाख 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही मावे के तीन केस में 30 हजार रुपये बतौर जुर्माने के वसूले गए हैं।
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यह होती है दूध-मावे की जांच
लैब में दूध और मावे के नमूनों की जांच के लिए कई प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं। इनमें फैट, मिल्क सॉलिड, यूरिया, कार्बोनेट, शुगर, स्ट्राय, ग्लूकोज, डिर्टजेंट, एसटीओ-2 और बीआर आदि दूध में तथा मावे में उक्त टेस्ट के साथ केसिन टेस्ट भी होता है।
मिलावट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। दूध और मावे के नमूने फेल आए हैं, इनमें कुछ के विरुद्ध एडीएम प्रशासन कोर्ट में मुकदमे दायर किए गए हैं। आगे भी मिलावटखोरों पर कार्रवाई होगी। - विनीत कुमार, अभिहित अधिकारी, एफएसडीए।
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जिले में दूध का कारोबार करने वाले पानी मिलाकर बेच रहे हैं, जबकि मावा भी सेहत के हिसाब से ठीक नहीं है। दूध और मावा के नमूनों की जो रिपोर्ट आई है। वह काफी चौंकाने वाली है। दूध में पानी की मात्रा अधिक पाई गई है और मावा सॉलिड फैट कम निकला है। 40 से अधिक लोगों के खिलाफ एडीएम प्रशासन की कोर्ट में वाद दायर किए गए हैं।
खाद्य पदार्थों में मिलावट कर जनता की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। कुछ रुपयों के लालच में व्यापारी, कारोबारी मनमाने तरीके से खाद्य पदार्थ बेच रहे हैं। एफएसडीए ने शहर और देहात क्षेत्र में कार्रवाई कर 121 दूध के नमूने लेकर जांच के लिए भिजवाए। जांच होने के बाद लैब से रिपोर्ट विभाग पहुंची है। 121 में 101 नमूनों की रिपोर्ट आई है। इनमें दूध के 47 सैंपल फेल मिले हैं। लैब में जांच की गई तो दूध में पानी की मात्रा अधिक पाई गई। इससे दूध की क्वालिटी और उसके फैट (चिकनाई) पर प्रभाव मिला है। इसके अलावा खोया-मावा के करीब 54 नमूने भेजे गए, इनमें से लैब ने 40 की रिपोर्ट भेजी है। 40 में से 27 खोया-मावा के सैंपल फेल मिले हैं। मावा में सॉलिड फैट नहीं पाया गया है। इसके चलते मावेे को पौष्टिक नहीं माना गया।
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दूध के 29 और मावे के 18 वाद डाले गए
मिलावट कर खाद्य एक्ट से धोखाधड़ी के आरोप में स्थानीय अधिकारियों ने दूध और मावा विक्रेताओं के विरुद्ध वाद डाले हैं। दूध के करीब 29 मामलों को कोर्ट में रखा गया है, जबकि खोया-मावा के करीब 18 मामलों में विभाग ने कार्रवाई कर एडीएम प्रशासन की कोर्ट में केस दायर किए हैं। एडीएम प्रशासन ने खाद्य पदार्थों में मिलावट करने को गंभीर माना है। इसके चलते दूध के 12 मामलों में सुनवाई कर एक लाख 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही मावे के तीन केस में 30 हजार रुपये बतौर जुर्माने के वसूले गए हैं।
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यह होती है दूध-मावे की जांच
लैब में दूध और मावे के नमूनों की जांच के लिए कई प्रकार के टेस्ट किए जाते हैं। इनमें फैट, मिल्क सॉलिड, यूरिया, कार्बोनेट, शुगर, स्ट्राय, ग्लूकोज, डिर्टजेंट, एसटीओ-2 और बीआर आदि दूध में तथा मावे में उक्त टेस्ट के साथ केसिन टेस्ट भी होता है।
मिलावट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। दूध और मावे के नमूने फेल आए हैं, इनमें कुछ के विरुद्ध एडीएम प्रशासन कोर्ट में मुकदमे दायर किए गए हैं। आगे भी मिलावटखोरों पर कार्रवाई होगी। - विनीत कुमार, अभिहित अधिकारी, एफएसडीए।