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महर्षि दयानंद ने फैलाया सत्य का प्रकाश : चन्द्रदेव
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महर्षि दयानंद ने फैलाया सत्य का प्रकाश : चंद्रदेव
मुजफ्फरनगर। आर्य समाज गांधी कालोनी में ऋषि बोधत्सव पर सत्य को ग्रहण करने तथा असत्य को त्यागने का आह्वान किया गया।
स्वामी चंद्रदेव ने कहा कि महर्षि दयानंद ने अज्ञान, पाखंड, अंधविश्वास और कुरीतियों के विरुद्ध वैदिक क्रांति का बिगुल बजा कर देश में सत्य का प्रकाश फैलाया था। गांधी कालोनी आर्य समाज में तीन दिवसीय ऋषि बोधत्सव में प्रात: वेदमंत्रों से यज्ञ आहुतियां अर्पित की गई। यज्ञ ब्रह्मा सुरेंद्र कुमार शास्त्री और यज्ञमान कविता एवं प्रदीप बालियान, राकेश ढिंगरा रहे। वेद की ज्योति जलती रहे , ओम का झंडा ऊंचा रहे का जयघोष किया गया। मेरठ से पधारे स्वामी चंद्रदेव ने कहा कि वैदिक संस्कृति मनुष्यता और नैतिकता की शिक्षा देती है। दूसरों को दुख पहुंचाना पाप है। शुभ कर्म करना पुण्य है। महाशिवरात्रि पर ऋषि दयानंद को सत्य को खोज का बोध हुआ। देशभर की आर्य समाजों में ऋषि बोधत्सव मनाया जाता है। मूल शंकर ने सच्चे शिव के दर्शन को गृह त्याग किया और महर्षि दयानंद बनकर सोते भारत को जगाया। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि ऋषि जैसा निर्भीक, वेदों का उद्धारक, देशभक्त सन्यासी भारत में पैदा नही हुआ। वैदिक संस्कृति के प्रचार को आर्य समाज अधिक क्षमता से कार्य करें। युवा शक्ति सत्यार्थ प्रकाश पढ़े, उनका जीवन सफल हो जाएगा। पूर्व प्राचार्य डॉ. लक्ष्मण सिंह टांक, डॉ. महावीर सिंह, गजेंद्र राणा, इंद्रपाल शास्त्री, ब्रजपाल तोमर, देवेंद्र सिंह राणा, प्रधानाचार्य मानपाल सिंह आदि ने विचार रखे। उषा पटपटिया, बीना चौधरी, संगीता राठी, कमल अरोरा, नन्दिनी आर्य , चन्द्रवती चौधरी आदि मौजूद रही।
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मुजफ्फरनगर। आर्य समाज गांधी कालोनी में ऋषि बोधत्सव पर सत्य को ग्रहण करने तथा असत्य को त्यागने का आह्वान किया गया।
स्वामी चंद्रदेव ने कहा कि महर्षि दयानंद ने अज्ञान, पाखंड, अंधविश्वास और कुरीतियों के विरुद्ध वैदिक क्रांति का बिगुल बजा कर देश में सत्य का प्रकाश फैलाया था। गांधी कालोनी आर्य समाज में तीन दिवसीय ऋषि बोधत्सव में प्रात: वेदमंत्रों से यज्ञ आहुतियां अर्पित की गई। यज्ञ ब्रह्मा सुरेंद्र कुमार शास्त्री और यज्ञमान कविता एवं प्रदीप बालियान, राकेश ढिंगरा रहे। वेद की ज्योति जलती रहे , ओम का झंडा ऊंचा रहे का जयघोष किया गया। मेरठ से पधारे स्वामी चंद्रदेव ने कहा कि वैदिक संस्कृति मनुष्यता और नैतिकता की शिक्षा देती है। दूसरों को दुख पहुंचाना पाप है। शुभ कर्म करना पुण्य है। महाशिवरात्रि पर ऋषि दयानंद को सत्य को खोज का बोध हुआ। देशभर की आर्य समाजों में ऋषि बोधत्सव मनाया जाता है। मूल शंकर ने सच्चे शिव के दर्शन को गृह त्याग किया और महर्षि दयानंद बनकर सोते भारत को जगाया। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि ऋषि जैसा निर्भीक, वेदों का उद्धारक, देशभक्त सन्यासी भारत में पैदा नही हुआ। वैदिक संस्कृति के प्रचार को आर्य समाज अधिक क्षमता से कार्य करें। युवा शक्ति सत्यार्थ प्रकाश पढ़े, उनका जीवन सफल हो जाएगा। पूर्व प्राचार्य डॉ. लक्ष्मण सिंह टांक, डॉ. महावीर सिंह, गजेंद्र राणा, इंद्रपाल शास्त्री, ब्रजपाल तोमर, देवेंद्र सिंह राणा, प्रधानाचार्य मानपाल सिंह आदि ने विचार रखे। उषा पटपटिया, बीना चौधरी, संगीता राठी, कमल अरोरा, नन्दिनी आर्य , चन्द्रवती चौधरी आदि मौजूद रही।