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‘बेटियों को उड़ने दो, आसमान को छूने दो’
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देवबंद (सहारनपुर)। अमर उजाला फाउंडेशन की अनूठी मुहिम अपराजिता 100 मिलियन स्माइल के तहत बृहस्पतिवार को दून वैली पब्लिक स्कूल में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें बेटियों ने रंग व तूलिका से कैनवस पर अपने मनोभाव की कलाकृतियों को उकेरकर हुनर दिखाया।
प्रतियोगिता का उद्घाटन प्रधानाचार्य सीमा शर्मा ने रिबन काटकर किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को समृद्ध बनाना है, क्योंकि एक सशक्त महिला ही अपने बच्चों का भविष्य बनाने के साथ ही देश का भविष्य सुनिश्चित करती है। भारतीय समाज में महिलाओं को समाज की धुरी माना गया है। यही कारण है कि वैदिक ऋचाओं की रचना में भी उन्हें स्थान मिला है। ईश्वर ने भी सृजन का अधिकार केवल महिला को दिया है। भारतीय नारी प्रकृति से ही अपराजिता है। वह दुर्गा स्वरूप है। अपने अधिकार के लिए संघर्ष करना उसका नैसर्गिक स्वभाव है। कार्यक्रम में विभिन्न कक्षाओं की करीब 150 छात्राओं ने भाग लिया। जिन्होंने रंगों व तूलिका से कैनवास पर सुंदर कलाकृतियां उकेरी। इनमें उन्हें उड़ने दो आसमान को छूने दो, गिव देम फ्रीडम टू फ्लाई, वूमन हैव, इक्वल पावर एज दी मैन, मुझे पैदा होने से पहले ही मत मारो, स्ट्रांग वूमन स्ट्रांग वर्ल्ड, गर्ल्स आर इक्वल टू ब्वाय, महिला सशक्तिकरण, बाक्सिंग पंच, वूमन आर द फ्यूचर, तराजू में लड़का लड़की की तुलना करना, चांद पर यात्रा, वूमन आर ग्रोइंग, दहेज प्रथा, लड़का व लड़की में समानता, बेटी बचाओ देश को सही राह पर ले जाओ, गलत कपड़े नहीं सोच होती है, अब नारी की बारी है, पावर ऑफ ए वूमन, एजे-15 नासा और क्लास रूम की गतिविधियां आदि विषय को इंगित करते हुए अपनी कलाकृतियों में मनोभाव को उजागर किया। प्रतियोगिता के माध्यम से बेटियों ने संदेश दिया कि वह किसी भी क्षेत्र में लड़कों से कम नहीं हैं। अपनी प्रतिभा का अपने दम पर लोहा मनवाने का उनमें हुनर है।
उच्च पदों पर आसीन है भारतीय नारी
राजनीति हो या सामाजिक सरोकार ऐसे अनेक उदाहरण है जो सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। भारतीय लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण देश के उच्च पदों पर आसीन हैं। नर्मदा घाटी की आवाज के रूप में प्रसिद्ध मेघा पाटकर, लगातार पांच बार विश्व मुक्केबाजी में चैंपियन मैरीकॉम तथा पर्यावरणविद सुनीता नारायण हो या भारतीय मूल की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स सभी ने अपनी योग्यताओं का लोहा मनवाया है। अमर उजाला का सार्थक प्रयास अपराजिता प्रशंसनीय है।
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- सीमा शर्मा, प्रधानाचार्य
भारत देश की आधी आबादी महिला शक्ति
पुरुष प्रधान देश की आधी आबादी महिला शक्ति है। महिला को केवल घर में काम करने और घर संभालने को मजबूर किया जाता है, लेकिन वह शायद नहीं जानते कि महिलाएं इस समाज की आधी शक्ति है। पुरुष और महिला दोनों साथ में कदम से कदम मिलाकर चलें तो ये देश की पूरी शक्ति बन जाएगी। जो विकासशील देश को विकसित कर देंगे।
- मानसी अग्रवाल, शिक्षिका
अदम्य, साहस का परिचय दे रही महिलाएं
प्रतियोगिता में छात्राओं ने महिला सशक्तिकरण की विभिन्न कलाकृतियों को बड़े ही सुंदर रूप में दर्शाया है। छात्राएं हर क्षेत्र में अपने अदम्य साहस का परिचय दे रही हैं। महिलाएं इस समाज की आधी शक्ति हैं। अमर उजाला का यह कदम सराहनीय है।
- नीरज शर्मा, शिक्षिका
त्वरित बुद्धि का परिचय देती है महिला
यदि महिलाओं को अवसर मिले तो वह अपनी त्वरित बुद्धि का परिचय देती है। वह साक्षात मां सरस्वती के रूप में अलौकिक छटा बिखेरती है। विकट परिस्थिति में मां दुर्गा बनकर कष्टों पर विजय पा लेती है।
-अंजू धीमान, शिक्षिका
नौवीं कक्षा की छात्रा हर्षिता जैन कहती है कि यूं तो समय-समय पर होने वाली प्रतियोगिताओं में भाग लेने का उन्हें अवसर मिलता है, लेकिन अमर उजाला की चित्रकला प्रतियोगिता अनूठी मुहिम है। इसमें सिर्फ महिला सशक्तिकरण को उजागर किया गया है जो सराहनीय कदम है।
नौवीं कक्षा की छात्रा खुशी त्यागी कहती है कि आज का समय अपने अधिकारों को पहचानने, सशक्त और आत्मनिर्भर बनने तथा अपराजेय साहस का परिचय देकर प्रत्येक क्षेत्र में सफलता के कीर्तिमान स्थापित करने का है। जिसमें बेटियां अपने अदम्य साहस का परिचय दे रही हैं।
कनुप्रिया ने कहा कि आज बालिकाओं ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि उन्हें पर्याप्त अवसर और स्वतंत्रता दी जाए तो वह स्वयं और देश को उन्नति के मार्ग पर ले जा सकती हैं।
आठवीं कक्षा की अनुष्का गोस्वामी कहती है कि महिला समाज की आधी शक्ति है इन्हें आगे बढ़ने का उचित अवसर मिलना ही चाहिए। क्योंकि लड़कियां आज किसी भी क्षेत्र में लड़कों से कम नहीं है।
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प्रतियोगिता का उद्घाटन प्रधानाचार्य सीमा शर्मा ने रिबन काटकर किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को समृद्ध बनाना है, क्योंकि एक सशक्त महिला ही अपने बच्चों का भविष्य बनाने के साथ ही देश का भविष्य सुनिश्चित करती है। भारतीय समाज में महिलाओं को समाज की धुरी माना गया है। यही कारण है कि वैदिक ऋचाओं की रचना में भी उन्हें स्थान मिला है। ईश्वर ने भी सृजन का अधिकार केवल महिला को दिया है। भारतीय नारी प्रकृति से ही अपराजिता है। वह दुर्गा स्वरूप है। अपने अधिकार के लिए संघर्ष करना उसका नैसर्गिक स्वभाव है। कार्यक्रम में विभिन्न कक्षाओं की करीब 150 छात्राओं ने भाग लिया। जिन्होंने रंगों व तूलिका से कैनवास पर सुंदर कलाकृतियां उकेरी। इनमें उन्हें उड़ने दो आसमान को छूने दो, गिव देम फ्रीडम टू फ्लाई, वूमन हैव, इक्वल पावर एज दी मैन, मुझे पैदा होने से पहले ही मत मारो, स्ट्रांग वूमन स्ट्रांग वर्ल्ड, गर्ल्स आर इक्वल टू ब्वाय, महिला सशक्तिकरण, बाक्सिंग पंच, वूमन आर द फ्यूचर, तराजू में लड़का लड़की की तुलना करना, चांद पर यात्रा, वूमन आर ग्रोइंग, दहेज प्रथा, लड़का व लड़की में समानता, बेटी बचाओ देश को सही राह पर ले जाओ, गलत कपड़े नहीं सोच होती है, अब नारी की बारी है, पावर ऑफ ए वूमन, एजे-15 नासा और क्लास रूम की गतिविधियां आदि विषय को इंगित करते हुए अपनी कलाकृतियों में मनोभाव को उजागर किया। प्रतियोगिता के माध्यम से बेटियों ने संदेश दिया कि वह किसी भी क्षेत्र में लड़कों से कम नहीं हैं। अपनी प्रतिभा का अपने दम पर लोहा मनवाने का उनमें हुनर है।
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उच्च पदों पर आसीन है भारतीय नारी
राजनीति हो या सामाजिक सरोकार ऐसे अनेक उदाहरण है जो सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। भारतीय लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण देश के उच्च पदों पर आसीन हैं। नर्मदा घाटी की आवाज के रूप में प्रसिद्ध मेघा पाटकर, लगातार पांच बार विश्व मुक्केबाजी में चैंपियन मैरीकॉम तथा पर्यावरणविद सुनीता नारायण हो या भारतीय मूल की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स सभी ने अपनी योग्यताओं का लोहा मनवाया है। अमर उजाला का सार्थक प्रयास अपराजिता प्रशंसनीय है।
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- सीमा शर्मा, प्रधानाचार्य
भारत देश की आधी आबादी महिला शक्ति
पुरुष प्रधान देश की आधी आबादी महिला शक्ति है। महिला को केवल घर में काम करने और घर संभालने को मजबूर किया जाता है, लेकिन वह शायद नहीं जानते कि महिलाएं इस समाज की आधी शक्ति है। पुरुष और महिला दोनों साथ में कदम से कदम मिलाकर चलें तो ये देश की पूरी शक्ति बन जाएगी। जो विकासशील देश को विकसित कर देंगे।
- मानसी अग्रवाल, शिक्षिका
अदम्य, साहस का परिचय दे रही महिलाएं
प्रतियोगिता में छात्राओं ने महिला सशक्तिकरण की विभिन्न कलाकृतियों को बड़े ही सुंदर रूप में दर्शाया है। छात्राएं हर क्षेत्र में अपने अदम्य साहस का परिचय दे रही हैं। महिलाएं इस समाज की आधी शक्ति हैं। अमर उजाला का यह कदम सराहनीय है।
- नीरज शर्मा, शिक्षिका
त्वरित बुद्धि का परिचय देती है महिला
यदि महिलाओं को अवसर मिले तो वह अपनी त्वरित बुद्धि का परिचय देती है। वह साक्षात मां सरस्वती के रूप में अलौकिक छटा बिखेरती है। विकट परिस्थिति में मां दुर्गा बनकर कष्टों पर विजय पा लेती है।
-अंजू धीमान, शिक्षिका
नौवीं कक्षा की छात्रा हर्षिता जैन कहती है कि यूं तो समय-समय पर होने वाली प्रतियोगिताओं में भाग लेने का उन्हें अवसर मिलता है, लेकिन अमर उजाला की चित्रकला प्रतियोगिता अनूठी मुहिम है। इसमें सिर्फ महिला सशक्तिकरण को उजागर किया गया है जो सराहनीय कदम है।
नौवीं कक्षा की छात्रा खुशी त्यागी कहती है कि आज का समय अपने अधिकारों को पहचानने, सशक्त और आत्मनिर्भर बनने तथा अपराजेय साहस का परिचय देकर प्रत्येक क्षेत्र में सफलता के कीर्तिमान स्थापित करने का है। जिसमें बेटियां अपने अदम्य साहस का परिचय दे रही हैं।
कनुप्रिया ने कहा कि आज बालिकाओं ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि उन्हें पर्याप्त अवसर और स्वतंत्रता दी जाए तो वह स्वयं और देश को उन्नति के मार्ग पर ले जा सकती हैं।
आठवीं कक्षा की अनुष्का गोस्वामी कहती है कि महिला समाज की आधी शक्ति है इन्हें आगे बढ़ने का उचित अवसर मिलना ही चाहिए। क्योंकि लड़कियां आज किसी भी क्षेत्र में लड़कों से कम नहीं है।