{"_id":"5b956de5867a557ecf6058aa","slug":"71536519653-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रालोद मुखिया को मकसद में कामयाबी की झलक दिखाई दी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रालोद मुखिया को मकसद में कामयाबी की झलक दिखाई दी
Updated Mon, 10 Sep 2018 12:30 AM IST
विज्ञापन
जाट-मुसलमानों को लुभाने की कोशिश
बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। जनसंवाद कार्यक्रम के माध्यम से क्षेत्र की जनता का दिल टटोलने आए रालोद मुखिया अजित सिंह को अपने मकसद में कामयाबी की झलक दिखाई पड़ी। रालोद की जाट और मुसलमानों को साधने की पूरी कोशिश है। यही वजह है कि जनसंवाद कार्यक्रम में पहुंचे जाट और मुसलमानों को एक साथ देखकर अजित सिंह काफी खुश नजर आए। कस्बे में लोकनिर्माण विभाग के निरीक्षण भवन परिसर में रालोद के जनसंवाद कार्यक्रम में सपा के पूर्व विधानसभा क्षेत्र प्रभारी अतहर हसन, अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी के भाई अयाजुद्दीन सिद्दीकी, सपा नेता आदेश त्यागी सहित सपा के कई लोगों ने पार्टी को छोड़कर रालोद का दामन थामा। इस मौके पर आई जाट व मुसलमानों की भीड़ को देखकर चौधरी अजित सिंह का चेहरा खिल उठा। अगले लोकसभा चुनाव को लेकर रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह ने जाट व मुसलमानों को अपना फोकस बनाया है। दोनों समुदायों को एक साथ जोड़कर ही चुनावी भवसागर से पार होने की उनकी नीति है। इस गठजोड़ के कारण कैराना लोकसभा के उपचुनाव में सफलता प्राप्त की थी।
विज्ञापन
बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। जनसंवाद कार्यक्रम के माध्यम से क्षेत्र की जनता का दिल टटोलने आए रालोद मुखिया अजित सिंह को अपने मकसद में कामयाबी की झलक दिखाई पड़ी। रालोद की जाट और मुसलमानों को साधने की पूरी कोशिश है। यही वजह है कि जनसंवाद कार्यक्रम में पहुंचे जाट और मुसलमानों को एक साथ देखकर अजित सिंह काफी खुश नजर आए। कस्बे में लोकनिर्माण विभाग के निरीक्षण भवन परिसर में रालोद के जनसंवाद कार्यक्रम में सपा के पूर्व विधानसभा क्षेत्र प्रभारी अतहर हसन, अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी के भाई अयाजुद्दीन सिद्दीकी, सपा नेता आदेश त्यागी सहित सपा के कई लोगों ने पार्टी को छोड़कर रालोद का दामन थामा। इस मौके पर आई जाट व मुसलमानों की भीड़ को देखकर चौधरी अजित सिंह का चेहरा खिल उठा। अगले लोकसभा चुनाव को लेकर रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह ने जाट व मुसलमानों को अपना फोकस बनाया है। दोनों समुदायों को एक साथ जोड़कर ही चुनावी भवसागर से पार होने की उनकी नीति है। इस गठजोड़ के कारण कैराना लोकसभा के उपचुनाव में सफलता प्राप्त की थी।