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सिंगल लाइन बनी जान-माल की दुश्मन

Mon, 21 Aug 2017 01:08 AM IST
Updated Mon, 21 Aug 2017 01:08 AM IST
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सिंगल लाइन बनी जान-माल की दुश्मन
सिंगल लाइन बनी जान-माल की दुश्मन
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मुजफ्फरनगर। दिल्ली-सहारनपुर वाया मेरठ मंडल की रेलवे लाइन पर लोगों के जान-माल का दुश्मन सिंगल रेलवे लाइन बन गई। ट्रैक पुराना होने के कारण ट्रेन के पहियों की भी पकड़ ढीली पड़ रही है। इसी ट्रैक से दिल्ली, अंबाला, देहरादून के साथ हरिद्वार, सहारनपुर आदि क्षेत्रों के लिए 24 घंटे में अप और डाउन में 55 ट्रेन गुजरती हैं। जिनमें सुपर फास्ट, एक्सप्रेस समेत पैसेंजर गाड़ियां शामिल हैं।
दिल्ली डिविजन मेरठ से सहारनपुर तक रेलवे लाइन का दोहरीकरण किया जा रहा है। 374 करोड़ रुपये इस प्रोजेक्ट से करीब 55 किलोमीटर तक नया ट्रैक बिछाया जा रहा है। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि मेरठ से दौराला तक ही रेलवे का दोहरीकरण मार्च 2017 में पूर्ण होना था, लेकिन यहां यह कार्य जुलाई माह में पूरा किया गया। हालांकि वर्ष 2017 के अंत तक मुजफ्फरनगर पूरा किया जाना था, लेकिन कभी मुआवजे की लड़ाई तो कभी रेलवे बोर्ड की लापरवाही ने दोहरीकरण की गति पर ब्रेेक लगा दिया। शनिवार को उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के पीछे ट्रैक की मरम्मत के साथ सिंगल रेलवे लाइन भी एक कारण माना जा रहा है।
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दिल्ली से अंबाला, अमृतसर और देहरादून, सहारनपुर के लिए यह ट्रैक सबसे व्यस्त में एक है। इस ट्रैक पर दिनभर में करीब 55 गाड़ियों को अप और डाउन में निकाला जाता है। जिनमें कई गाड़ियों की औसत स्पीड 100 से ऊपर है। ऐसे में खतौली और सकौती के साथ मंसूरपुर क्षेत्र में भी ट्रैक ही हालत हाईस्पीड के लायक नहीं हैं। हादसे और हादसे के बाद राहत में मद्द के लिए सबसे बड़ी बाधा सिंगल रेलवे लाइन बनी हैं। रेलवे के आलाधिकारियों को हाईपॉवर की क्रैन खतौली तक लाने में पसीने छूट गए, क्योंकि सिंगल रेलवे लाइन होने के कारण मशीन घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाई। रेलवे के डीआरएम आरएन सिंह भी दिन निकलते ही खतौली पहुंच गए। उन्होंने बताया कि दोहरीकरण में कई समस्याएं सामने आई थीं, जिन्हें दूर करने के बाद कार्य तीव्र गति से किया जा रहा है।
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नया ट्रैक बिछाकर लाई गई क्रेन
उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद स्थिति बेकाबू रही। स्पीड से दौड़ रही ट्रेन ने स्लीपर के साथ ट्रैक तक उखाड़ फेंका। रविवार को राहत कार्य के लिए आई क्रेन को नए सिरे से ट्रैक बिछाकर चलाया गया। जिनता ट्रैक बिछता, उतनी ही क्रेन आगे बढ़ पाती। जिसके चलते ट्रैक पर पलटे पड़े कोचों को हटाने के लिए कड़ी मशक्कत की गई।


12 घंटे के बाद हटा पहला कोच
उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन शनिवार को 5:36 पर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। जिसके चलते एक-दूसरे पर चढ़े डिब्बों को हटाने के लिए टीमों को करीब 14 घंटे लग गए। रविवार सुबह करीब छह बजे बड़ी क्रेन से पहला कोच हटाया जा सका।
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