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लग्जरी वाहनों में ड्यूटी, पैसे के नाम पर चुप्पी
Updated Wed, 28 Mar 2018 12:16 AM IST
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लग्जरी वाहनों में ड्यूटी, पैसे के नाम पर चुप्पी
मुजफ्फरनगर।
प्रदेश में नई सरकार को सत्ता संभाले एक वर्ष बीत गया है, लेकिन चुनावी ड्यूटी में लगे वाहनों का भुगतान नहीं हो सका है। प्रशासन, पोलिंग पार्टियों के लिए अनुबंधित किए गए वाहनों का पैसा प्रशासन जारी कर चुका है, मगर पुलिस अधिकारियों, जवानों के लिए लगे वाहनों का भुगतान रुका है। ऐसे में ट्रांसपोर्ट्र्स ने एआरटीओ कार्यालय में अर्जी देकर भुगतान की गुहार लगाई है।
वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव के लिए जिले में बड़े पैमाने पर निजी वाहनों का अनुबंध किया गया। निजी वाहनों को चुनावी ड्यूटी में रखने की एवज में उनका किराया भत्ता भी तय किया गया। जिले में चार हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहन एआरटीओ विभाग ने अधिग्रहण किए थे। जिनका इस्तेमाल गांवों, शहर और कस्बों के भीतर पोलिंग पार्टियां भेजने, लाने और सामग्री पहुंचाने में किया गया। जबकि लग्जरी वाहन इनोवा, स्कॉर्पियो, बोलेरो, टाटा सफारी, सूमो आदि वाहनों को अधिग्रहण कर अधिकारियों के लिए रखा गया। प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा पुलिस के जवान, दरोगा आदि को भी निजी वाहन दिए गए। पुलिस विभाग को अधिकांश बोलेरो, जीप, टाटा सूमो, मैजिक, मिनी ट्रक और बस दिए गए थे। इसी तरह नगर निकाय चुनाव में किया गया। प्रशासन ने 800 रुपये जीप, 1500 रुपये सूमो, क्वालिस, 1000 रुपये, इनोवा 2000 रुपये, मिनी बस 2500 रुपये और ट्रैक्टर 800 से 1000 रुपये प्रतिदिन किराया तय किया गया था। पुलिस के लिए विधानसभा में 1500 से अधिक वाहन रहे थे, जबकि निकाय चुनाव में भी इसी तरह वाहन अधिग्रहण किए गए थे। इनका भुगतान रुका हुआ है। जिसके चलते ट्रांसपोर्ट्र्स ने एआरटीओ को अर्जी देकर भुगतान की गुहार लगाई है। एआरटीओ राजीव कुमार बंसल ने बताया कि चुनाव ड्यूटी में पुलिस के लिए चले वाहनों का भुगतान रुका हुआ है। रोडवेज, प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों के लिए अधिग्रहण किए गए वाहनों का भुगतान हो चुका है।
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मुजफ्फरनगर।
प्रदेश में नई सरकार को सत्ता संभाले एक वर्ष बीत गया है, लेकिन चुनावी ड्यूटी में लगे वाहनों का भुगतान नहीं हो सका है। प्रशासन, पोलिंग पार्टियों के लिए अनुबंधित किए गए वाहनों का पैसा प्रशासन जारी कर चुका है, मगर पुलिस अधिकारियों, जवानों के लिए लगे वाहनों का भुगतान रुका है। ऐसे में ट्रांसपोर्ट्र्स ने एआरटीओ कार्यालय में अर्जी देकर भुगतान की गुहार लगाई है।
वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव के लिए जिले में बड़े पैमाने पर निजी वाहनों का अनुबंध किया गया। निजी वाहनों को चुनावी ड्यूटी में रखने की एवज में उनका किराया भत्ता भी तय किया गया। जिले में चार हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहन एआरटीओ विभाग ने अधिग्रहण किए थे। जिनका इस्तेमाल गांवों, शहर और कस्बों के भीतर पोलिंग पार्टियां भेजने, लाने और सामग्री पहुंचाने में किया गया। जबकि लग्जरी वाहन इनोवा, स्कॉर्पियो, बोलेरो, टाटा सफारी, सूमो आदि वाहनों को अधिग्रहण कर अधिकारियों के लिए रखा गया। प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा पुलिस के जवान, दरोगा आदि को भी निजी वाहन दिए गए। पुलिस विभाग को अधिकांश बोलेरो, जीप, टाटा सूमो, मैजिक, मिनी ट्रक और बस दिए गए थे। इसी तरह नगर निकाय चुनाव में किया गया। प्रशासन ने 800 रुपये जीप, 1500 रुपये सूमो, क्वालिस, 1000 रुपये, इनोवा 2000 रुपये, मिनी बस 2500 रुपये और ट्रैक्टर 800 से 1000 रुपये प्रतिदिन किराया तय किया गया था। पुलिस के लिए विधानसभा में 1500 से अधिक वाहन रहे थे, जबकि निकाय चुनाव में भी इसी तरह वाहन अधिग्रहण किए गए थे। इनका भुगतान रुका हुआ है। जिसके चलते ट्रांसपोर्ट्र्स ने एआरटीओ को अर्जी देकर भुगतान की गुहार लगाई है। एआरटीओ राजीव कुमार बंसल ने बताया कि चुनाव ड्यूटी में पुलिस के लिए चले वाहनों का भुगतान रुका हुआ है। रोडवेज, प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों के लिए अधिग्रहण किए गए वाहनों का भुगतान हो चुका है।
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