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खतौली पर दूसरी बार लगा हादसे का कलंक
Updated Mon, 21 Aug 2017 01:08 AM IST
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दूसरी बार खतौली पर लगा हादसे का कलंक
मुजफ्फरनगर। पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने से खतौली पर दूसरी बार रेल हादसे का कलंक लगा है। 25 साल पहले भी खतौली में ट्रेन हादसा हुआ था, तब अंबाला से दिल्ली जा रही मालगाड़ी बेपटरी हो गई थी। ट्रेन के 16 डिब्बे ट्रैक से उतरे थे, जो कि इसी तरह से आसपास के मकानों में जा घुसे थे, तब कोई जनहानि नहीं हुई थी।
खतौली में शनिवार शाम उत्कल एक्सप्रेस तहसील के सामने दुर्घटनाग्रस्त हुई। इस भीषण हादसे को देखकर यहां के लोगोें को 25 साल पहले का ट्रेन हादसा याद आ गया। दो जून 1992 की शाम करीब 4.30 बजे ट्रेन हादसा हुआ था। अंबाला से दिल्ली जा रही रनथ्रू मालगाड़ी ट्रेन खतौली स्टेशन से पहले अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। मालगाड़ी के 16 डिब्बे बेपटरी हुए थे। जिन लोगों ने इस हादसे की क्षति को झेला था, वे हादसे को याद कर सिहर उठे।
ट्रैक के पास रहने वाले वीरेंद्र कुमार उर्फ बीरे हलवाई, मनीष आहूजा उर्फ बिल्ला के मकानों में मालगाड़ी के डिब्बे घुस गए थे। साथ ही शराब के ठेकों को भी डिब्बों ने चपेट में ले लिया था। हादसे के दौरान दोनों घरों के परिजन मकान के अन्य हिस्सों में बैठे थे। हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई थी। कई दिनों तक मेरठ-सहारनपुर के बीच रेल संचालन बंद रहा था। उस समय जिले में पहली बड़ी रेल दुर्घटना होने से खतौली का नाम चर्चाओं में आया था। शनिवार को कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने से खतौली कस्बे पर दूसरी बार ट्रेन हादसे का कलंक लग गया। इस भीषण ट्रेन हादसे में 22 यात्रियों की जान जाने से कसबा खतौली फिर से सुर्खियों में आ गया है।
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हादसे का मंजर देखने की हिम्मत नहीं जुटा पाए
मुजफ्फरनगर। 25 साल पहले ट्रेन हादसे का झेल चुके वीरेंद्र कुमार और मनीष आहूजा समेत उन्हें परिजन कलिंग उत्कल हादसे का मंजर देख कर पुराने हादसे को याद कर सिहर उठे। वीरेंद्र के बेटे विपिन ने बताया कि मम्मी-पापा की हिम्मत मकान की छत पर जाकर हादसे को देखने तक की नहीं हो सकी थी।
मात्र 30 हजार रुपये का मिला था मुआवजा
मुजफ्फरनगर। मनीष आहूजा और बीरे हलवाई ने बताया कि मकान में मालगाड़ी के डिब्बे घुसने से करीब दो लाख रुपये का नुकसान हुआ था, मगर तब रेलवे ने क्षतिपूर्ति के नाम पर मात्र 30 हजार रुपये दिए थे।
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एक ही स्थान पर हुए दोनों हादसे
मुजफ्फरनगर। यह भी दुर्भाग्य की बात है कि खतौली कसबे में दोनों ही हादसे एक ही स्थान पर हुए हैं। 25 साल पहले जिस स्थान पर ट्रेन हादसा हुआ था, उसी स्थान पर शनिवार को कलिंग उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हुई है।
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मुजफ्फरनगर। पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन के दुर्घटनाग्रस्त होने से खतौली पर दूसरी बार रेल हादसे का कलंक लगा है। 25 साल पहले भी खतौली में ट्रेन हादसा हुआ था, तब अंबाला से दिल्ली जा रही मालगाड़ी बेपटरी हो गई थी। ट्रेन के 16 डिब्बे ट्रैक से उतरे थे, जो कि इसी तरह से आसपास के मकानों में जा घुसे थे, तब कोई जनहानि नहीं हुई थी।
खतौली में शनिवार शाम उत्कल एक्सप्रेस तहसील के सामने दुर्घटनाग्रस्त हुई। इस भीषण हादसे को देखकर यहां के लोगोें को 25 साल पहले का ट्रेन हादसा याद आ गया। दो जून 1992 की शाम करीब 4.30 बजे ट्रेन हादसा हुआ था। अंबाला से दिल्ली जा रही रनथ्रू मालगाड़ी ट्रेन खतौली स्टेशन से पहले अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। मालगाड़ी के 16 डिब्बे बेपटरी हुए थे। जिन लोगों ने इस हादसे की क्षति को झेला था, वे हादसे को याद कर सिहर उठे।
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ट्रैक के पास रहने वाले वीरेंद्र कुमार उर्फ बीरे हलवाई, मनीष आहूजा उर्फ बिल्ला के मकानों में मालगाड़ी के डिब्बे घुस गए थे। साथ ही शराब के ठेकों को भी डिब्बों ने चपेट में ले लिया था। हादसे के दौरान दोनों घरों के परिजन मकान के अन्य हिस्सों में बैठे थे। हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई थी। कई दिनों तक मेरठ-सहारनपुर के बीच रेल संचालन बंद रहा था। उस समय जिले में पहली बड़ी रेल दुर्घटना होने से खतौली का नाम चर्चाओं में आया था। शनिवार को कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने से खतौली कस्बे पर दूसरी बार ट्रेन हादसे का कलंक लग गया। इस भीषण ट्रेन हादसे में 22 यात्रियों की जान जाने से कसबा खतौली फिर से सुर्खियों में आ गया है।
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हादसे का मंजर देखने की हिम्मत नहीं जुटा पाए
मुजफ्फरनगर। 25 साल पहले ट्रेन हादसे का झेल चुके वीरेंद्र कुमार और मनीष आहूजा समेत उन्हें परिजन कलिंग उत्कल हादसे का मंजर देख कर पुराने हादसे को याद कर सिहर उठे। वीरेंद्र के बेटे विपिन ने बताया कि मम्मी-पापा की हिम्मत मकान की छत पर जाकर हादसे को देखने तक की नहीं हो सकी थी।
मात्र 30 हजार रुपये का मिला था मुआवजा
मुजफ्फरनगर। मनीष आहूजा और बीरे हलवाई ने बताया कि मकान में मालगाड़ी के डिब्बे घुसने से करीब दो लाख रुपये का नुकसान हुआ था, मगर तब रेलवे ने क्षतिपूर्ति के नाम पर मात्र 30 हजार रुपये दिए थे।
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एक ही स्थान पर हुए दोनों हादसे
मुजफ्फरनगर। यह भी दुर्भाग्य की बात है कि खतौली कसबे में दोनों ही हादसे एक ही स्थान पर हुए हैं। 25 साल पहले जिस स्थान पर ट्रेन हादसा हुआ था, उसी स्थान पर शनिवार को कलिंग उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हुई है।