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एनजीटी से स्कूल बस व मिनी ट्रकों को राहत
Updated Fri, 23 Jun 2017 01:11 AM IST
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एनजीटी से स्कूल बस और मिनी ट्रकों को राहत
मुजफ्फरनगर। नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल (एनजीटी) से शहर के कई स्कूलों, मिनी ट्रक एसोसिएशन समेत चरथावल-गढ़ीखाम मार्ग को राहत मिली है। इन तीनों याचिकाकर्ताओं को एनजीटी ने 10 साल पुराने वाले संचालन करने की हरी झंडी दे दी है। हालांकि इसके लिए पहले एआरटीओ से री-वैरीफिकेशन के साथ फिटनेस, प्रदूषण की जांच-पड़ताल करानी होगी। इसके बाद ही इनका संचालन हो सकेगा।
एनजीटी ने एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को लेकर 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर शिकंजा कसा था। इसके लिए जनपदवार आरटीओ, एआरटीओ को ऐसे वाहनों को चिह्नित करने के आदेश हुए थे। जनपद में करीब ऐसे 40 हजार से अधिक वाहन निकले, जिनमें बस, मिनी बस, ट्रक समेत जीप और अन्य छोटे वाहन शामिल थे। इन्हें जिले से बाहर भेजने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई। एआरटीओ ने वाहनों का संचालन बंद किया तो स्वामियों के तोते उड़ गए। इसको लेकर शहर के कई स्कूल प्रशासन, मिनी ट्रक एसोसिएशन और चरथावल-गढ़ीखाम मार्ग के प्राइवेट बस संचालक एनजीटी की अदालत में पहुंच गए। फरवरी माह से उक्त तीनों याचिकाधारियों के केस पर एनजीटी सुनवाई कर रही थी। सभी तथ्यों को देखकर एनजीटी ने मई माह में इन्हें राहत दे दी है। एनजीटी ने आरटीओ को आदेश जारी किए हैं। इनमें कहा गया है कि मुजफ्फरनगर के शारदेन, रेडरोज, स्टेपिंग स्टोन पब्लिक स्कूल, मिनी ट्रक एसोसिएशन और चरथावल-गढ़ीखाम मार्ग के प्राइवेट बस ऑपरेटरों के 10 पुराने वाहनों के संचालन पर हरी झंडी दिखाई है। हालांकि इन सभी लोगों को पहले एआरटीओ से वाहन की फिटनेस, प्रदूषण समेत अन्य सभी कागजात पूरे कराने होंगे। इसके बाद समय-समय पर एआरटीओ विभाग में प्रदूषण की जांच कराएंगे। इसके बाद ही इनका संचालन जारी रह सकेगा। साथ ही एनजीटी ने साफ किया है कि उक्त तीनों याचिकादारियों को जनपद मुजफ्फरनगर में सीएनजी स्टेशन लगने तक ही अनुमति रहेगी। सीएनजी स्टेशन लगते ही इन वाहनों को एआरटीओ की निगरानी में निष्क्रिय किया जाएगा। एआरटीओ राजीव कुमार बंसल ने बताया कि कुछ लोगों को राहत दी गई है, जिनके दस साल पुराने वाहन चलाने की अनुमति दी गई है। इस बाबत आदेश आए हैं। इनकी जांच पड़ताल कराई जा रही है।
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मुजफ्फरनगर। नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल (एनजीटी) से शहर के कई स्कूलों, मिनी ट्रक एसोसिएशन समेत चरथावल-गढ़ीखाम मार्ग को राहत मिली है। इन तीनों याचिकाकर्ताओं को एनजीटी ने 10 साल पुराने वाले संचालन करने की हरी झंडी दे दी है। हालांकि इसके लिए पहले एआरटीओ से री-वैरीफिकेशन के साथ फिटनेस, प्रदूषण की जांच-पड़ताल करानी होगी। इसके बाद ही इनका संचालन हो सकेगा।
एनजीटी ने एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को लेकर 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर शिकंजा कसा था। इसके लिए जनपदवार आरटीओ, एआरटीओ को ऐसे वाहनों को चिह्नित करने के आदेश हुए थे। जनपद में करीब ऐसे 40 हजार से अधिक वाहन निकले, जिनमें बस, मिनी बस, ट्रक समेत जीप और अन्य छोटे वाहन शामिल थे। इन्हें जिले से बाहर भेजने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई। एआरटीओ ने वाहनों का संचालन बंद किया तो स्वामियों के तोते उड़ गए। इसको लेकर शहर के कई स्कूल प्रशासन, मिनी ट्रक एसोसिएशन और चरथावल-गढ़ीखाम मार्ग के प्राइवेट बस संचालक एनजीटी की अदालत में पहुंच गए। फरवरी माह से उक्त तीनों याचिकाधारियों के केस पर एनजीटी सुनवाई कर रही थी। सभी तथ्यों को देखकर एनजीटी ने मई माह में इन्हें राहत दे दी है। एनजीटी ने आरटीओ को आदेश जारी किए हैं। इनमें कहा गया है कि मुजफ्फरनगर के शारदेन, रेडरोज, स्टेपिंग स्टोन पब्लिक स्कूल, मिनी ट्रक एसोसिएशन और चरथावल-गढ़ीखाम मार्ग के प्राइवेट बस ऑपरेटरों के 10 पुराने वाहनों के संचालन पर हरी झंडी दिखाई है। हालांकि इन सभी लोगों को पहले एआरटीओ से वाहन की फिटनेस, प्रदूषण समेत अन्य सभी कागजात पूरे कराने होंगे। इसके बाद समय-समय पर एआरटीओ विभाग में प्रदूषण की जांच कराएंगे। इसके बाद ही इनका संचालन जारी रह सकेगा। साथ ही एनजीटी ने साफ किया है कि उक्त तीनों याचिकादारियों को जनपद मुजफ्फरनगर में सीएनजी स्टेशन लगने तक ही अनुमति रहेगी। सीएनजी स्टेशन लगते ही इन वाहनों को एआरटीओ की निगरानी में निष्क्रिय किया जाएगा। एआरटीओ राजीव कुमार बंसल ने बताया कि कुछ लोगों को राहत दी गई है, जिनके दस साल पुराने वाहन चलाने की अनुमति दी गई है। इस बाबत आदेश आए हैं। इनकी जांच पड़ताल कराई जा रही है।
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