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बंद होने के कगार पर राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल

Mon, 10 Dec 2018 11:38 PM IST
Updated Mon, 10 Dec 2018 11:38 PM IST
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बंद होने के कगार पर राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल
बंद होने के कगार पर राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल
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अमर उजाला ब्यूरो
भोपा। क्षेत्र का एकमात्र राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल स्टाफ की कमी से बंद होने के कगार पर है। कॉलेज में एकमात्र नियुक्ति प्रधानाचार्य रमेश चंद के रूप में है और वे भी मार्च-2019 में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। नई नियुक्ति के लिए विभागीय अफसर इसी माह घोषित होने वाले एलटी रिजल्ट के भरोसे हैं, जिसके बाद कॉलेज में पढ़ने वालीं 48 छात्राओं की शिक्षा-दीक्षा अधर में लटक जाएगी।
भोपा में वर्ष 1965 के आसपास कांधला व भैंसी के साथ ही राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल का शुभारंभ किया गया था। शुरूआत में कॉलेज को किराये के भवन में खोला गया था, जिसे वर्ष 2000 में अपना भवन मिला, जिसमें कृषि फार्म के साथ ही क्रीड़ा स्थल भी है। विद्यालय में कुल छह कमरे हैं। कालांतर में कांधला का कन्या जूनियर हाईस्कूल डिग्री कॉलेज की शक्ल ले चुका है, जबकि भैंसी का विद्यालय काफी समय पहले इंटर कॉलेज बन गया था। बावजूद इसके भोपा का राजकीय कन्या विद्यालय जस का तस ही है और उसके अब बंद होने की स्थिति आ खड़ी हुई है। विद्यालय में कुछ वर्ष पूर्व तक तीन सौ से अधिक छात्राएं पढ़ती थीं। पूर्व प्रधानाचार्या शारदा वर्मा व विनोद शर्मा के कार्यकाल में छात्राओं को शिक्षा के साथ ही सिलाई-कढ़ाई भी सिखाई जाती थी, लेकिन आज स्कूल में केवल 48 छात्राएं ही अध्ययनरत रह गईं हैं। वर्तमान में स्कूल में शिक्षक के रूप में एकमात्र नियुक्ति प्रधानाचार्य रमेश चंद के रूप में है और वे भी मार्च-2019 में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इनके अलावा स्टाफ की कमी के चलते मोरना से कल्पना नामक शिक्षिका को एक साल के लिए स्कूल में संबद्ध किया गया था, वह भी कार्यकाल पूरा होने पर मूल स्कूल में लौट जाएंगी। स्कूल में अन्य स्टाफ के रूप में खाना बनाने के लिए दो महिला कर्मचारी और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। इस स्कूल में पढ़ने वाली 48 छात्राओं में से अधिकांश निम्न आयवर्ग से ताल्लुक रखती हैं। बावजूद इसके पिछले पांच साल से स्कूल को छात्रवृत्ति तो दूर की बात, छात्राओं को जर्सी तक नहीं मिल पाई है। प्रधानाचार्य रमेशचंद की मानें तो उन्हें स्कूल बिल्डिंग के रखरखाव के लिए पिछले पांच वर्ष में मात्र पांच हजार रुपये ही मिल पाए हैं। यही नहीं स्कूल में सफाई कर्मचारी की तैनाती नहीं होने से स्कूल परिसर के साथ ही क्रीड़ा स्थल में भी कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। ऐसे में यदि जल्द ही स्कूल में अन्य स्टाफ की तैनाती नहीं हुई तो इस स्कूल के बंद होने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा। प्रधानाचार्य रमेश चंद का कहना है कि संबंधित अधिकारियों से मिलकर नए स्टॉफ की नियुक्ति के प्रयास किए जा रहे हैं।
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इन्होंने कहा ........
राजकीय इंटर कॉलेज के शिक्षक व कार्यवाहक डीआईओएस आरसी शर्मा ने बताया कि जनपद के अधिकांश स्कूल स्टाफ की कमी झेल रहे हैं। इसी माह एलटी परीक्षा का रिजल्ट आने वाला है, जिसके बाद प्रशिक्षण कराकर स्कूल में नई नियुक्ति कर दी जाएगी। इसके अलावा वैकल्पिक व्यवस्था भी की जा सकती है।
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