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जैन मंदिर में चातुर्मास निष्ठापन व पिच्छी परिवर्तन समारोह
Updated Mon, 12 Nov 2018 12:01 AM IST
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ईश्वर की भक्ति में मन लगाओ : क्षमाभूषण महाराज
खतौली। पीसनोपाड़ा जैन मंदिर के प्रवचन हाल में परम पूज्य एलाचार्य क्षमाभूषण महाराज का चातुर्मास निष्ठापन कार्यक्रम मांगलिक व धार्मिक क्रियाओं के साथ संपन्न कराया गया। इस अवसर पर प्रात:काल में भक्तों ने वीतरागी प्रभु का अभिषेक व पूजन किया। क्षमाभूषण महाराज ने कहा कि ईश्वर की भक्ति में मन लगाने से भलाई संभव है।
इस समारोह का शुभारंभ ध्वजारोहण करके सुशील जैन मंडी वालों ने किया। श्रावकों ने आध्यात्मिक भजन भी प्रस्तुत किए। धर्मसभा का संचालन करते हुए कल्पेंद्र जैन ने बताया कि चातुर्मास धर्म आराधना का समय होता है। इस अवधि में साधु, संत एक स्थान पर विराजमान होकर धर्म की साधना करते हैं। क्षमाभूषण महाराज ने कहा कि दिगंबर साधु की पहचान पिच्छी कमंडल से होती है। कमंडल शुद्धि का उपकरण होता है। पिच्छी मोर के पंखों से निर्मित होती है। आप सभी को अपने जीवन में मृदुता लानी है। संयम व दया का यह उपकरण संयमी व्यक्ति ही ग्रहण करते हैं। जीवन में संकल्प अवश्य ग्रहण करना चाहिए। कषाय से मन को हटाकर प्रभु भक्ति में लगाओ। अपने विचारों में शुद्धि लाएं। जीवन में सहनशीलता का परिचय दें। सुश्रावकों ने मुनिश्री को शास्त्र भेंट किए। पुरस्कार वितरण संजय जैन एलपी परिवार द्वारा किया गया। वात्सल्य भोज व्यवस्था भूषण आढ़ती परिवार द्वारा की गई। कार्यक्रम संयोजन अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन ने किया। इस अवसर पर हितेश सराफ, राहुल, राजकुमार प्रवक्ता, शशांक महलका, रामकुमार जैन, मुकेश आढ़ती, मुकेश एडवोकेट, राजीव बैंक वाले, अनंतवीर, पवन, मनोज आढ़ती, अनुपम आढ़ती, दीपक भैंसी, शशांक सराफ, पतेंद्र, गौरव सराफ, विनोद प्रवक्ता, मदन, कुलदीप, अंकित, अनुराग जैन, अतुल, सरला, रजनी, मृदुला, प्रभा, अर्चना, नीरज जैन प्रवक्ता आदि उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता एलएम जैन ने की।
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खतौली। पीसनोपाड़ा जैन मंदिर के प्रवचन हाल में परम पूज्य एलाचार्य क्षमाभूषण महाराज का चातुर्मास निष्ठापन कार्यक्रम मांगलिक व धार्मिक क्रियाओं के साथ संपन्न कराया गया। इस अवसर पर प्रात:काल में भक्तों ने वीतरागी प्रभु का अभिषेक व पूजन किया। क्षमाभूषण महाराज ने कहा कि ईश्वर की भक्ति में मन लगाने से भलाई संभव है।
इस समारोह का शुभारंभ ध्वजारोहण करके सुशील जैन मंडी वालों ने किया। श्रावकों ने आध्यात्मिक भजन भी प्रस्तुत किए। धर्मसभा का संचालन करते हुए कल्पेंद्र जैन ने बताया कि चातुर्मास धर्म आराधना का समय होता है। इस अवधि में साधु, संत एक स्थान पर विराजमान होकर धर्म की साधना करते हैं। क्षमाभूषण महाराज ने कहा कि दिगंबर साधु की पहचान पिच्छी कमंडल से होती है। कमंडल शुद्धि का उपकरण होता है। पिच्छी मोर के पंखों से निर्मित होती है। आप सभी को अपने जीवन में मृदुता लानी है। संयम व दया का यह उपकरण संयमी व्यक्ति ही ग्रहण करते हैं। जीवन में संकल्प अवश्य ग्रहण करना चाहिए। कषाय से मन को हटाकर प्रभु भक्ति में लगाओ। अपने विचारों में शुद्धि लाएं। जीवन में सहनशीलता का परिचय दें। सुश्रावकों ने मुनिश्री को शास्त्र भेंट किए। पुरस्कार वितरण संजय जैन एलपी परिवार द्वारा किया गया। वात्सल्य भोज व्यवस्था भूषण आढ़ती परिवार द्वारा की गई। कार्यक्रम संयोजन अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन ने किया। इस अवसर पर हितेश सराफ, राहुल, राजकुमार प्रवक्ता, शशांक महलका, रामकुमार जैन, मुकेश आढ़ती, मुकेश एडवोकेट, राजीव बैंक वाले, अनंतवीर, पवन, मनोज आढ़ती, अनुपम आढ़ती, दीपक भैंसी, शशांक सराफ, पतेंद्र, गौरव सराफ, विनोद प्रवक्ता, मदन, कुलदीप, अंकित, अनुराग जैन, अतुल, सरला, रजनी, मृदुला, प्रभा, अर्चना, नीरज जैन प्रवक्ता आदि उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता एलएम जैन ने की।
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