{"_id":"5ba29a89867a557ed0491c4d","slug":"51537383049-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वैराग्य और भक्ति तीनों परिपूर्ण हैं-ओमानंद महाराज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वैराग्य और भक्ति तीनों परिपूर्ण हैं-ओमानंद महाराज
Updated Thu, 20 Sep 2018 12:20 AM IST
विज्ञापन
‘वैराग्य और भक्ति है परिपूर्ण’
मोरना। शुक्रताल स्थित शुकदेव आश्रम के दयालू भागवत भवन में साप्ताहिक भागवत कथा के शुभारंभ हुआ।
पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महराज ने कहा कि ज्ञान, वैराग्य और भक्ति तीनों परिपूर्ण है। इसलिए भागवत कथा सात दिनों में मानव जीवन को मुक्ति का ज्ञान करा देती है। भक्ति जब बढ़ती है, तब भगवान को दृश्य होना पड़ता है। भागवत कथा से चरित्र निर्माण होता है। चरित्र की पवित्रा से बड़ी कोई संपत्ति नहीं है। चरित्र बल से व्यक्ति संसार की सभी संपदाओं को जीत सकता है। चरित्र मानव आत्माओं को विकसित करता है। इसलिए चरित्र की उपासना करनी चाहिए। चरित्र जीवन को सफल और उन्नत बनाने की चाबी है। भागवत विशुद्ध परम शास्त्र है। इस मौके पर कथा व्यास स्वामी आचार्य अतुल कृष्ण का माल्यार्पण कर ग्रंथ भेंट उन्हें सम्मानित किया गया। कथा के आयोजन में राधा कृष्ण मंडल गौतमबुद्धनगर के अनुयायी ने मुख्य भूमिका निभाई। इस दौरान हर्ष मंडी, आचार्य, श्याम शास्त्री, अचल शास्त्री, सुमन शास्त्री, राजू, अनिल आदि रहे।
विज्ञापन
मोरना। शुक्रताल स्थित शुकदेव आश्रम के दयालू भागवत भवन में साप्ताहिक भागवत कथा के शुभारंभ हुआ।
पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महराज ने कहा कि ज्ञान, वैराग्य और भक्ति तीनों परिपूर्ण है। इसलिए भागवत कथा सात दिनों में मानव जीवन को मुक्ति का ज्ञान करा देती है। भक्ति जब बढ़ती है, तब भगवान को दृश्य होना पड़ता है। भागवत कथा से चरित्र निर्माण होता है। चरित्र की पवित्रा से बड़ी कोई संपत्ति नहीं है। चरित्र बल से व्यक्ति संसार की सभी संपदाओं को जीत सकता है। चरित्र मानव आत्माओं को विकसित करता है। इसलिए चरित्र की उपासना करनी चाहिए। चरित्र जीवन को सफल और उन्नत बनाने की चाबी है। भागवत विशुद्ध परम शास्त्र है। इस मौके पर कथा व्यास स्वामी आचार्य अतुल कृष्ण का माल्यार्पण कर ग्रंथ भेंट उन्हें सम्मानित किया गया। कथा के आयोजन में राधा कृष्ण मंडल गौतमबुद्धनगर के अनुयायी ने मुख्य भूमिका निभाई। इस दौरान हर्ष मंडी, आचार्य, श्याम शास्त्री, अचल शास्त्री, सुमन शास्त्री, राजू, अनिल आदि रहे।